
कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 के रेड कारपेट से इंडियन सेलेब्रिटीज की तस्वीरें, इन दिनों हर रोज सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रही हैं. जहां ऐश्वर्या राय के गोल्डन-ब्लैक गाउन को सोशल मीडिया की जनता अपनी 'कड़ी आलोचना' के चश्मे से देखती नजर आई. वहीं, कियारा अडवाणी को आइवरी-वाइट, थाई-हाई गाउन में देखकर काफी लोग अपने दिल थामते नजर आए.
दुनिया के सबसे बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में से एक कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत, आजकल अपनी फिल्मों से ज्यादा सेलेब्रिटीज के जरिए मौजूदगी दर्ज कराता है. इंडियन सेलेब्रिटीज के कान्स रेड कारपेट लुक पिछले कई सालों से फैशन लवर्स में चर्चा का मुद्दा रहते हैं. मगर इस साल सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम ही नहीं, बल्कि देश के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के रेड कारपेट पर अपने फैशन से लाइमलाइट बटोरते नजर आए.
आयुष मेहरा, नमिता थापर, विराज गेलानी, आरजे करिश्मा, अंकुश बहुगुणा विष्णु कौशल, नैन्सी त्यागी और आस्था शाह जैसी नामी डिजिटल क्रिएटर्स कान्स के रेड कारपेट पर फैशन का जलवा बिखेरते दिखे. सोशल मीडिया की जनता ने इनमें से कई लोगों के रेड कारपेट लुक को, कई बड़े सेलेब्स के लुक से बेहतर बताया.
डिजिटल क्रिएटर्स की मेहनत पर लगते हैं सवाल
सिर्फ इंडिया ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स या डिजिटल क्रिएटर्स का सेलेब्रिटी स्टेटस, दुनिया भर में 'सेलेब्रिटी' की परिभाषा को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन पैदा कर देता है. जो लोग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सेलेब्रिटी मानते हैं, उनकी राय रहती है कि इनका जनता की पहुंच में होना, सेलेब्रिटी सिस्टम में एक अच्छा चेंज है.
जबकि बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जिनका मानना है कि सिर्फ वीडियो बनाकर पॉपुलर हुए ये लोग कोई 'रियल वर्क' थोड़े ही करते हैं! और शायद यही नोशन है, जिसकी वजह से कान्स फिल्म फेस्टिवल जैसे, सिनेमा के प्रतिष्ठित मंच पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी देखकर बहुत सारे लोग शॉक या सरप्राइज हुए जा रहे हैं.
हाल ही में सोशल मीडिया का एक कमेंट लोगों में काफी जिज्ञासा जगाता दिखा. इंडिया के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के कान्स वाले रेड कारपेट लुक्स की झलक दिखाती एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट किया, 'अगर आप लोगों को पता न हो तो, 300 यूरो (करीब 27 हजार रुपये) खर्च करके कोई भी इस रेड कारपेट पर चल सकता है. इसका कामयाबी से कोई लेना देना नहीं है.'
जैसी कि सोशल मीडिया की परम्परा है, झट से इस कमेंट का स्क्रीनशॉट हुआ और ये एक दूसरे प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर कई पोस्ट का मुद्दा बना. लोग पूछते नजर आए कि क्या सच में 27 हजार रुपये में कोई कान्स रेड कारपेट पर पहुंच सकता है? ऐसे ही एक पोस्ट पर कई दिलचस्प कमेंट भी थे. एक कमेंट में किसी ने व्यंग्य में लिखा, 'ये सच भी हो तो प्लीज इंडियन यूट्यूबर्स और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर्स को मत बताना. ये सीक्रेट अपने तक ही रखना.' वहीं एक कमेंट करने वाले ने कहा, 'ये सच है तो अगले साल मैं भी जाता हूं.'
इन कमेंट्स में जिस तरह इन इन्फ्लुएंसर्स की मेहनत या इनकी अचीवमेंट को कमतर आंकने की कोशिशें नजर आती हैं, या जिस तरह इनको एक 'सेलेब्रिटी' के तौर पर पूरी तरह 'कैंसिल' कर दिया जाता है, उसे तो छोड़ ही देते हैं. एक कामयाब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने के लिए कितनी मेहनत, वक्त, मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजिकल अनुशासन लगता है, उसे भी अभी किनारे रख देते हैं. बात सीधा मुद्दे की करते हैं... क्या 27 हजार रुपये में कोई कान्स रेड कारपेट पर पहुंचकर, एक सेलेब्रिटी की तरह जलवे बिखेर सकता है?
इतना आसान है कान्स के रेड कारपेट पर जाना?
इसका जवाब बिल्कुल सीधा है- नहीं. जिस व्यक्ति ने 300 यूरो या 27 हजार में कान्स के रेड कारपेट पर पहुंचने की बात का सबसे पहला जिक्र अपने सोशल मीडिया कमेंट में किया, उससे शायद एक चूक हो गई. कान्स फिल्म फेस्टिवल की ऑफिशियल वेबसाइट बताती है कि '300 यूरो प्लस टैक्स' असल में, इस फेस्टिवल के लिए अपनी फिल्म भेजने की फीस है.
दुनिया भर के फिल्ममेकर्स अपनी फिल्में भेजते हैं. फिल्म फेस्टिवल की ज्यूरी उनमें से स्क्रीनिंग के लिए फिल्में चुनती है. जिन फिल्मों की स्क्रीनिंग होती है, उनकी टीम को कान्स में इनवाईट किया जाता है.
दूसरा सबसे पॉपुलर तरीका है ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिए कान्स में एंट्री. अगर कोई सेलेब्रिटी किसी ब्रांड को एंडोर्स करता है और वो ब्रांड, कान्स के स्पॉन्सर्स/पार्टनर्स में से एक है, तो वो ब्रांड उस सेलेब्रिटी को इनवाईट कर सकता है. और ये रेड कारपेट पर जाने का मौका दिलाता है. यहां सेलेब्रिटी को इनवाईट भले ब्रांड कर रहा है, मगर ये सब कान्स के ऑर्गनाइजर्स की देखरेख में होता है. इसके अलावा अगर आप कान्स की ज्यूरी में मेंबर हैं तब रेड कारपेट पर जा सकते हैं.
इस बार आपको कान्स में जो इंडियन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर दिख रहे हैं वो मीडिया प्लेटफॉर्म ब्रूट इंडिया की तरफ से कान्स गए हैं. कान्स फिल्म फेस्टिवल के ऑफिशियल पार्टनर्स में से एक ब्रूट इंडिया का एक इनिशिएटिव है जो डिजिटल क्रिएटर्स को हाईलाइट करता है. अंकुश बहुगुणा, विष्णु कौशल, नैन्सी त्यागी और डिजिटल क्रिएशन के बाकी बड़े नाम ऐसे ही कान्स में नजर आ रहे हैं.
अगर आपके पास कान्स की फिल्म स्क्रीनिंग का टिकट है, तो भी आप रेड कारपेट पर पहुंच सकते हैं. लेकिन ये टिकट भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े या मीडिया से जुड़े लोगों को ही मिलते हैं. हर फिल्म की स्क्रीनिंग का टिकट अलग प्राइस पर होता है और रिपोर्ट्स बताती हैं कि कान्स 2024 के स्क्रीनिंग्स के टिकटों की कीमत 5 लाख से 25 लाख रुपये के बीच है. स्क्रीनिंग का ये टिकट आपको रेड कारपेट पर फोटो क्लिक करवाने का मौका तो दिला सकता है, मगर रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि कान्स की सिक्योरिटी 'पर्याप्त फैशनेबल' न लगने वाले लोगों को रेड कारपेट से हटाने के लिए बदनाम रही है!
पिछले कई सालों से हर साल कान्स में भारत का अपना एक पवेलियन रहता है. इसे सूचना और प्रसारण मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय मिलकर सेट अप करते हैं. ये पवेलियन में इंडियन फिल्ममेकर्स, भारत सरकार और राज्य सरकारों के रिप्रेजेंटेटिव होते हैं. यहां इंडियन फिल्म कम्युनिटी को कान्स में अलग-अलग एक्टिविटीज में हिस्सा लेने का एक प्लेटफॉर्म मिलता है. जैसे- भारत इस साल पहली बार कान्स में 'भारत पर्व' होस्ट कर रहा है, जिसमें कई इवेंट्स होने हैं. इंडियन डेलिगेशन का हिस्सा बने लोग भी कान्स के रेड कारपेट पर जा सकते हैं.
कान्स के रेड कारपेट पर पहुंचने के ये नियम-कायदे जानने के बाद एक बात तो माननी पड़ेगी कि यहां तक कोई भी 'ऐसे ही' नहीं पहुंच जाता. या उसने फिल्मी दुनिया में या ब्रांड एंडोर्समेंट में अपना इतना नाम तो बनाया है जो उसे कान्स का इनवाइट मिला है. जनता का एक बड़ा हिस्सा भले डिजिटल क्रिएटर्स या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को 'काम' के रेगुलर पैमानों में फिट करने में मुश्किल महसूस करता हो, लेकिन 'सेलेब्रिटीज' की परिभाषा में दखल देने वाले इन नए लोगों ने चाहे जैसे अपने नाम को ब्रांड बनाया हो, मगर बनाया तो है ही.