
आज तक की 'धर्म संसद' में भजन सम्राट अनूप जलोटा ने शिरकत की. उन्होंने कार्यक्रम का शानदार आगाज अपनी गायिकी के साथ किया. अनूप जलोटा ने यहां अपने लोकप्रिय भजन 'ऐसी लागी लगन' के कंपोजिशन के बारे में बताया. साथ ही कुंभ का महत्व और इसकी खासियत का जिक्र किया.
हर साल कुंभ जाते हैं अनूप जलोटा
भजन सम्राट ने बताया कि वो हर साल कुंभ में जाकर साधु संतों के दर्शन करते हैं. ऐसा कर वो बड़ा आनंदित महसूस करते हैं. अनूप जलोटा ने कहा- पिछले 50 सालों में जितने कुंभ हुए हैं हर जगह मैं जाता रहा हूं. प्रयागराज आकर अच्छा लग रहा है ये बहुत महान पर्व है. 144 साल के बाद ये महाकुंभ हो रहा है. यहां पर जब ईश्वर के नाम उच्चारण होता है और सामूहिक गायन होता है तो इसमें बड़ा बल होता है.
कैसे बना सॉन्ग 'ऐसी लागी लगन'?
उन्होंने कहा- 'ऐसी लागी लगन' इस गाने ने मुझे संसार में भजन गायक के रूप में प्रसिद्ध किया. कुछ लोग अपनी खुशी से मुझे भजन सम्राट कहते हैं. लेकिन सच ये है कि एक गायक सम्राट बनने में सारे प्रयास लगा देता है. मेरे लिए मेरे पिता, मेरे गुरु भजन सम्राट हैं. जब वो भजन गाते हैं ऐसा लगता है भजन आकर सामने खड़ा हो गया और आपसे चर्चा कर रहा है. उनके गायन की ये सबसे बड़ी विशेषता है.
1977 की बात है अमेरिका में अपने दोस्त के घर भोजन कर रहा था. उनकी पत्नी ने मुझे किताब दी और पढ़ने को कहा. मैं किताब के पन्ने पलट रहा था और खाना खा रहा था. एक पन्ने पर मैं रुका. उस पर लिखा था- ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मग्न. मैंने खाना खाते खाते उसकी धुन बना ली और उन्हें सुना दी. मुझे लगता है नक्षत्र बहुत बड़ा काम करते हैं. शायद इस तरह एक भजन की कंपोजिशन होनी थी. आज इसी भजन से मैं जाना जाता हूं.
क्या है कुंभ की खासियत?
अनूप जलोटा ने कुंभ की सबसे बड़ी खासियत बताते हुए कहा- कुंभ में वो संत महात्मा दर्शन देते हैं जो सालों से पर्वतों पर पूजा करते हैं. कुंभ के अवसर पर वो पर्वतों को छोड़कर आते हैं. उनके दर्शन पाना बहुत कठिन है. मैंने भी यहां आकर ऐसे लोगों के दर्शन किए. बहुत खुशी महसूस कर रहा हूं.