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सुशांत के पोस्टमॉर्टम पर वकील विकास सिंह ने उठाए 9 सवाल, पढ़ें- डॉक्टरों के जवाब

वकील विकास सिंह ने इस मामले में सीबीआई को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें दोबारा फॉरेंसिक टीम गठन की मांग की गई है और इसके अलावा मौजूदा जांच में कमियां गिनाई गई हैं. 

सुशांत केस को लेकर अभी भी जारी है हलचल सुशांत केस को लेकर अभी भी जारी है हलचल
दिव्येश सिंह
  • मुंबई,
  • 07 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST
  • सुशांत की फॉरेंसिक रिपोर्ट पर वकील के सवाल
  • परिवार के वकील विकास सिंह की CBI को चिट्ठी

फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर अभी भी गुत्थी उलझी हुई है. सीबीआई के द्वारा गठित एम्स के पैनल ने सुशांत की मौत को आत्महत्या बताया है. लेकिन सुशांत के परिवार के वकील इसे मानने को तैयार नहीं. वकील विकास सिंह ने इस मामले में सीबीआई को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें दोबारा फॉरेंसिक टीम गठन की मांग की गई है और इसके अलावा मौजूदा जांच में कमियां गिनाई गई हैं. 

अपनी चिट्ठी में सुशांत के परिवार के वकील ने कई दावे किए हैं, जिनपर अब पोस्टमॉर्टम करने वाली टीम ने जवाब दिया है. विकास सिंह के द्वारा लिखे गए खत में क्या-क्या फैक्चुअल एरर की बात कही गई है, उन्हें जानिए.. 

1.    सवाल: सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमॉर्टम मौत वाले दिन ही देर शाम को क्यों किया गया?
जवाब: पुलिस अधिकारी हमारे पास आए थे, उन्होंने ही हमसे पोस्टमॉर्टम करने को कहा था इसलिए कर दिया गया था. ऐसा कोई नियम नहीं है कि पोस्टमॉर्टम रात को नहीं हो सकता है. 2013 के एक सर्कुलर के अनुसार रात को भी पोस्टमॉर्टम किया जा सकता है. 

2.    सवाल: क्या रात को पोस्टमॉर्टम करने के लिए मजिस्ट्रेट ने इजाजत दी थी?
जवाब: पोस्टमॉर्टम के लिए मजिस्ट्रेट की इजाजत की जरूरत तभी होती है, जब कस्टडी में किसी की मौत हुई हो या दंगे में कोई मरा हो यानी जिसकी मौत 176 CrPC के तहत हुई हो. सुशांत का मामला 174 CrPC के अंतर्गत आता है, जहां पुलिस के पास पोस्टमॉर्टम करवाने का अधिकार है. 

3.    सवाल: पोस्टमॉर्टम के वक्त सुशांत के परिवार से कौन व्यक्ति मौजूद था?
जवाब: हमें नहीं याद कि परिवार से कौन मौजूद था. हमारे पास पुलिस बहन द्वारा साइन किए गए पेपर के साथ आई थी. उसके बाद सुशांत की बहन और जीजा ओपी सिंह पोस्टमॉर्टम सेंटर पर आए थे. 

4.    सवाल: सुशांत की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में निशान की बात कही गई है, फिर इसमें किसी चोट का जिक्र क्यों नहीं है?
जवाब: अगर आप पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के कॉलम 17 को देखें तो निशान ( ligature marks) की बात कही गई है, उसके अलावा कोई चोट नहीं थी. 

5.    सवाल: सुशांत जैसे मामलों में ऑटोप्सी के लिए 2-3 घंटे लगते हैं, फिर ये 90 मिनट में कैसे पूरा हो गया?
जवाब: एक सामान्य पोस्टमॉर्टम के लिए एक घंटा लगता है, लेकिन ऐसी कोई टाइम लिमिट नहीं है. हमने डेढ़ घंटे में पोस्टमॉर्टम पूरा किया और विसरा को प्रिजर्व कर लिया. 

6.    सवाल: सुशांत के शव से विसरा रिपोर्ट के अलावा ऐसा क्या पता लगा जिससे मर्डर की थ्योरी खत्म हो गई?
जवाब: शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं था, जहां उसने फांसी लगाई वहां पर किसी तरह का संघर्ष नहीं हुआ था. गले पर जो निशान मिला, वो उसी फंदे से मिले जिससे सुशांत का शव लटका हुआ मिला था. 

7.    सवाल: जिस फंदे की बात हुई उसपर शक है कि वो सुशांत का वजन उठाने लायक नहीं था?
जवाब: जिस कुर्ते के कपड़े से फांसी लगाई गई, उसे टेस्ट के लिए भेजा गया था. जिसमें पता लगा कि वो 200 किलो तक का वजन झेल सकता है. 

8.    सवाल: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का वक्त क्यों नहीं लिखा गया है?
जवाब: मुंबई पुलिस ने मौत के वक्त को लेकर सवाल खड़े किए थे, लेकिन रिपोर्ट में ये लिखा गया है कि पोस्टमॉर्टम से 10-12 घंटे पहले ही सुशांत की मौत हुई है. 

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9.    सवाल: टेज़र गन थ्योरी को लेकर क्या कहना है, टेज़र गन के इस्तेमाल के बाद गला दबाया गया?
जवाब: टेज़र गन हमेशा गर्दन पर एक जला हुआ निशान छोड़ देती है. लेकिन जो निशान थे वो सिर्फ यही साबित करते हैं कि वो लटकने के कारण हुए हैं. टेज़र गन थ्योरी सिर्फ सोशल मीडिया पर चर्चा में थी. 
 

 

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