
कॉमेडी क्वीन भारती अपने मदरहुड फेज को इंजॉय कर रही हैं. कुछ समय पहले ही मां बनीं भारती अब शूटिंग पर वापसी कर चुकी हैं. अपने प्रेगनेंसी चैलेंज, मदरहुड, मूड स्विंग्स और वर्क कमिटमेंट पर भारती ने aajtak.in से विस्तार से बातचीत की.
सवालः एक वर्किंग मॉम के तौर पर क्या चैलेंजेस फेस करने पड़ रहे हैं?
भारतीः एक वर्किंग मॉम के तौर पर मैं अपने चैलेंजेस को काफी कम मानती हूं. मेरा काम बहुत अच्छा काम है, मेरा पति सपोर्ट करता है. हमें बहुत सी सुविधाएं हैं. मुझे उनके लिए बहुत बुरा लगता है, जो बेचारी ऑफिस में या दिहाड़ी मजदूरी करती हैं. उन मॉम को सैल्यूट है. वैसी मॉम जो कैमरे से अपने बच्चों को देख तक नहीं पाती लेकिन फिर भी कमाई के लिए रोजाना निकलती हैं. मेरे चैलेंज तो उनके सामने कुछ भी नहीं है. मुझे इन्हीं मम्मियों को देखकर ताकत मिलती है. रही बात मेरी, तो मैंने घर में अपने कैमरे लगाए हैं, अगर बेबी जरा सा भी मूव करता है, तो फौरन मुझे नोटिफिकेशन आ जाता है. मैं पूरे डॉक्टर की सलाह पर ही चल रही हूं, डॉक्टर ने कहा है कि मैं काम पर जा सकती हूं. उन्होंने मुझे खुश रहने की नसीहत दी है, कहा है मैं जितना खुश रहूंगी, बच्चे को उतना ही फीड आएगा. घर में रहूंगी, तो डिप्रेशन में रहूंगी. हर कोई आएगा अपनी-अपनी सलाह देगा, वो सब छोड़कर अपना काम करो.
सवालः डिलिवरी के कुछ समय बाद ही आपने काम शुरू कर दिया, कितना प्रेशर महसूस होता है?
भारतीः हां, ये बात सही है कि मैं बहुत कम समय के बाद ही वापस काम पर आ गई हूं. मैं इसलिए वापस आई क्योंकि मैंने वर्क कमिटमेंट किए हुए थे. प्रोफेशनल लाइफ में कमिटमेंट के मायने होते हैं, लोग आप पर डिपेंडेंट भी होते हैं. मेरा छोटा सा बेबी है, जिसके लिए घर पर पूरी फैमिली है. नानी-दादी सब घर पर ही हैं. ऐसा नहीं है कि मैं काम पर आ रही हूं तो उसे दूध नहीं मिलता है. मैं पूरी तैयारी से उसके लिए प्रिजर्व कर रख आई हूं. वो पूरा दिन मेरा ही दूध पीता रहा. प्रेशर बिलकुल भी महसूस नहीं होता है. बल्कि ये अच्छा लग रहा है कि एक बच्चे की वजह से मेरी फैमिली इतनी क्लोज आ गई है.
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सवालः वर्किंग मॉम को जज किया जाता है. आप कभी किसी निगेटिव कमेंट से गुजरी हैं?
भारतीः बिलकुल जज किया जाता है. लोग बहुत सारी सलाह देने लगते हैं. कहते हैं, अरे इतना छोटा बच्चा है काम पर आ गई है...इतनी भी क्या पैसे की जरूरत है. देखें पैसे की बात नहीं है, बात होती है वर्क कमिटमेंट की. केवल आपकी वजह से काम नहीं चलता है, बल्कि आपके साथ हजार से 12 सौ लोग होते हैं. कई लोग मेरे पीछे बातें करते हैं, तो वहीं कुछ लोगों का सपोर्ट भी मिला है. कहते हैं स्ट्रॉन्ग वुमन. मैं हमेशा पॉजिटिव चीजों को ही सुनती हूं, अगर प्रेगनेंसी के पहले महीने के निगेटिव कमेंट्स सुनती रहती न, तो नौ महीने तक काम कर पाना मुश्किल हो जाता. मैं अकेली औरत नहीं हूं, जो प्रेगनेंसी में काम कर रही है. मैंने सिग्नल पर कितनी प्रेगनेंट औरतों को सामान बेचते देखा है. इसलिए मैं भी राजकुमारी नहीं हूं, मुझे भी काम करने की जरूरत है. देखें, लोग घर बैठे चार बातें बना सकते हैं लेकिन जिस पर गुजरती है वो ही जानता है.
सवालः आप अपनी मां के बहुत करीब रही हैं, अब खुद मां बनी हैं तो कैसा फील कर रही हैं?
भारतीः हां, मैं अपनी मॉम के बहुत ज्यादा करीब हूं और बेबी होने के बाद और भी करीब हो गई हूं. कभी-कभी हम अपने मां-बाप की फीलिंग समझ नहीं पाते हैं. उनके कॉल पर गुस्सा करने लगते हैं या चिढ़ जाते हैं. आज जब मां बनी हूं, तो शर्म आती है कि कितनी गलत थी. मैं खुद अपने बच्चे को कैमरे लगा-लगाकर देख रही हूं. हमारे पेरेंट्स के पास तो ये सुविधा भी नहीं थी, तो सोचें वे कितने बेचैन होते होंगे. अब तो मां का कॉल आता है तो सुकून से बात करती हूं
सवालः प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग्स काफी होते होंगे. हर्ष ने कैसे हैंडल किया?
भारतीः बहुत मूड स्विंग्स होते थे. हर्ष ने उसे बखूबी हैंडल किया है. क्योंकि चार महीने तक हमने किसी को रिवील ही नहीं किया था कि मैं प्रेगनेंट हूं. यहां तक कि फैमिली को भी नहीं बताया था. इन चार महीनों में हर्ष ने मेरे सारे नखरे सहे. वो कभी मेरी मां बन जाते, तो कभी सास की ड्यूटी निभाते. एक बहुत ही अच्छे दोस्त और हसबैंड की तरह उन्होंने मेरे मूड स्विंग्स को संभाला है.
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सवालः बच्चे के आने के बाद सुपरस्टीशन पर विश्वास बढ़ा है?
भारतीः हां, वैसे मैं तो नहीं मानती लेकिन जब घर का कोई बड़ा कहता है, तो मैं उसे निभाती हूं. जैसे कहा गया है कि 40 दिन के पहले बच्चे को कहीं बाहर लेकर नहीं जाना है, काला टीका लगाना, घर पर कोई आए न, ये सब चीजें सालों से चलती आ रही हैं और हमें इसमें दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए.
सवालः एक मां के तौर पर अपने अपने अंदर क्या बदलाव महसूस किया है?
भारतीः मैं बहुत बदली हूं. अब मैं मोबाइल पर ज्यादा नहीं रहती. इंस्टाग्राम देखना भी कम कर दिया है. मैं बस बच्चे को देखते रहना चाहती हूं. जल्दी नहाने चली जाती हूं ताकि फट से आकर बेबी के सिरहाने बैठ उसे देखती रहूं. उसने क्या खाया और कितने घंटे सोया, बस यही सब चलता है दिमाग में. ये बदलाव मुझे अच्छे लग रहे हैं. मैं इस मदरहुड को बहुत इंजॉय भी कर रही हूं.