
Big Boss OTT का पहला एलिमिनेशन हो चुका है. इस शो की पॉप्युलैरिटी को लेकर बिग बॉस ओटीटी के पहले सीजन की विनर रह चुकीं दिव्या अग्रवाल से हमारी एक्सक्लूसिव बातचीत की. दिव्या बताती हैं, उन्हें इस सीजन में कुछ खास मजा नहीं आ रहा है, बल्कि उन्हें इस सीजन के कंटेस्टेंट को देखकर कोफ्त हो रही है कि वो अच्छा बनने का ढोंग कर रहे हैं.
पुनीत से ही असली मजा आता
दिव्या बताती हैं, मैंने इस सीजन के 13 कंटेस्टेंट्स को देखा. पहले के दो ऐपिसोड में पुनीत बाहर हुआ था. मैं मानती थी कि पुनीत एक स्ट्रॉन्ग कंटेंटर हो सकता था. उसका निकाला जाना सही नहीं था. अगर वो थोड़े समय और सरवाइव कर लेता, तो शायद गेम कुछ इंट्रेस्टिंग मोड़ लेता. आप उसे शो से बाहर निकालने के बजाए, जेल में डाल सकते थे. देखो, पुनीत शो में एकमात्र ऐसा बंदा था, जिसके बारे में हर कोई बात करता था. पुनीत के अलावा मनीषा रानी इंट्रेस्टिंग है, उसका अपना अलग अंदाज है. उसकी बातें सुनना अच्छा लगता है.
इतना अच्छा बनने का ढोंग क्यों कर रहें हैं ?
इस सीजन पर दिव्या कहती हैं, बाकि कंटेस्टेंट तो इतना सेफ और अच्छा बनने का ढोंग कर रहे हैं कि बिग बॉस ओटीटी बोरिंग होता जा रहा है. यहां किसी को अच्छा नहीं बनना है बल्कि सरवाइव करना होता है. मैं, प्रतीक और निशांत अभी तक तो वहां बवाल मचा दिए होते. हम तो सबकी करंसी छीनकर बैठे होते. मुझे तो सब फेक लग रहे हैं, भई इतनी जल्दी भाईचारा कैसे हो जाता है? वहीं प्रतीक और मेरी लड़ाई कितनी एंटरटेनिंग होती थी. निशांत नारदमुनी का काम बड़ी ही चालाकी से किया करता था. हमारे यहां खूबी यह थी कि बेशक लड़ाईयां बहुत होती थी, कंटेस्टेंट एक दूसरे को हेट नहीं करते थे. जैसा यहां पुनीत के साथ हुआ था.
ये सीजन इतना बोरिंग है कि हमें अपना शो देखना पड़ा
दिव्या ने बताया, पिछले दिनों ही मैं अक्षरा सिंह और निशांत यही चर्चा कर रहे थे कि यार मजा नहीं आ रहा है. मतलब इतना बोरिंग है कि हमें अपना शो याद आ गया. शो से निकलने के बाद हमने अपना ओटीटी देखा नहीं था. उस दिन हम साथ बैठकर हमारा फर्स्ट ऐपिसोड देख रहे थे. वो ज्यादा एंटरटेनिंग था.
पूरे अग्रेशन के साथ खेला था गेम
दिव्या आगे कहती हैं, मैं अगर अपने शो को याद करूं, तो देखकर हैरानी होती है. मैं अगर जीती भी हूं, तो इसका श्रेय घरवालों को ही जाता है. उन्होंने मुझसे किनारा कर लिया था. मैं अकेले उनके साथ लड़ी. जब मैं उस घर में थी, तब भी निजी जिंदगी में कई दिक्कतों से गुजर रही थी. ऊपर से लोगों का बर्ताव, इन सबने मेरे अंदर फ्यूल का काम किया था. तब जाकर मैंने अग्रेशन में गेम खेला था और ट्रॉफी अपने नाम की थी.