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जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा कब मिलेगा? अमित शाह बोले- संसद में बता चुका हूं कि...

Agenda Aaj Tak 2024: एजेंडा आजतक 2024 में गृह मंत्री अमित शाह ने 'शाह है तो संभव है' सत्र में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है, पर्यटन बढ़ा है और चुनाव शांतिपूर्ण रहे हैं. पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के सवाल पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी.

अमित शाह ने एजेंडा आजतक में कई मुद्दों पर चर्चा की अमित शाह ने एजेंडा आजतक में कई मुद्दों पर चर्चा की
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:53 PM IST

Agenda Aaj Tak 2024: गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को आजतक के कार्यक्रम एजेंडा आजतक के मंच पर आए. यहां उन्होंने जम्मू कश्मीर, बांग्लादेश के साथ-साथ राहुल गांधी, मणिपुर महाराष्ट्र चुनाव जैसे मुद्दों पर बात की. 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद यह उनका पहला इंटरव्यू था.

गृह मंत्री ने 'शाह है तो संभव है' सेशन में जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा की. गृह मंत्री ने बताया कि जम्मू कश्मीर की स्थिति अब बेहतर है. जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा कब मिलेगा? इसपर शाह ने कहा कि मैं संसद में पहले ही बता चुका हूं कि उचित समय पर उचित निर्णय लिए जाएंगे.

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लोकसभा चुनाव के बाद अपने पहले इंटरव्यू में जम्मू कश्मीर में आतंक की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल पर अमित शाह ने कहा कि दो करोड़ से ज्यादा यात्री जम्मू कश्मीर गए हैं. सिनेमाहाल खुला है. ताजिया का जुलूस निकला है. चुनाव में एक गोली नहीं चली. एक व्यक्ति मरा नहीं है और कहीं भी रीपोलिंग नहीं हुई.

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अमित शाह ने कहा कि हमने वादे को निभाया है और चुनाव भी हुआ है और एक पॉपुलर गवर्नमेंट वहां बैठी है. वही बताता है कि जम्मू कश्मीर में स्थिति बेहतर है. राज्य के दर्जे पर उन्होंने कहा कि जब उचित समय आएगा, हम वह दे देंगे. ये हमने संसद में कहा था. संसद चल रही है तब तो यहां और नहीं बता सकता.

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5 साल में 75 साल जितना इन्वेस्टमेंट

गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद खत्म कब तक होगा? सवाल पर कहा कि 33 साल में पहली बार दो करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट जम्मू कश्मीर में गए हैं. 30 साल के बाद घाटी में सिनेमा हॉल खुले हैं. 33 साल के बाद पहली बार ताजिया का जुलूस निकला. आजादी के 75 सालों में जितना इन्वेस्टमेंट आया था, उतना इन्वेस्टमेंट इन पांच सालों में गया है.

'चुनाव शांतिपूर्ण हुए'

गृह मंत्री ने शांतिपूर्ण चुनाव पर कहा कि पहले जम्मू कश्मीर में चुनाव होते थे तो ढेर सारी हिंसा होती थी. लोकसभा का चुनाव हुआ, पंचायत चुनाव हुए और एक भी गोली नहीं चली. कहीं पर दोबारा चुनाव भी नहीं कराना पड़ा. इससे बेहतर उदाहण नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जैसे ही हालात ठीक हुए, राष्ट्रपति शासन को हटाने का वादा था उसे हटाया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि वहां हालात अच्छे हैं.

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अमित शाह ने पूर्ण राज्य दिए जाने के किसी संभावित टाइमफ्रेम पर कहा कि टाइमफ्रेम संसद में दे दिया था कि जैसे ही स्टेटहुड देने का समय आएगा, तो उचित फैसले लेकर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बताना उचित नहीं होगा और संसद चल रही है तो बिल्कुल भी उचित नहीं होगा.

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बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कही ये बात

केंद्रीय गृहमंत्री कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा का 96% हिस्सा फेंसिंग से सुरक्षित किया जा चुका है, वहां से घुसपैठ नहीं हो रही, लेकिन 4% हिस्से पर फेंसिंग नहीं हुई है, क्योंकि वहां नाला है, ब्रह्मपुत्र नदी हैं, बड़े-बड़े तालाब हैं, जंगल की सीमाएं हैं, पहाड़ियां हैं जहां ऊपर-खाबड़ जमीन हैं, वहां फेंसिंग हो ही नहीं सकती. लोकसभा चुनाव के बाद अमित शाह ने किसी मीडिया हाउस को दिए अपने पहले इंटरव्यू में कहा कि जहां से घुसपैठ हो रही है, उन इलाकों को चिह्नित कर मैंने दिसंबर 2019 में राज्य सरकारों को रिपोर्ट भेजी थी. 

मैंने निर्देश दिए थे कि अगर कोई राशन कार्ड, आधार कार्ड या मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन करता है तो उसकी पूछताछ ढंग से होनी चाहिए. इस प्रक्रिया में सावधानी बरती जाए. असम में ये रुक चुका है. मैं भरोसा दिलाता हूं कि ओडिशा में भी ये रुक जाएगा, लेकिन बंगाल और झारखंड में नहीं रुक रहा है. अमित शाह ने आरोप लगाया कि कुछ राज्य सरकारें इन घुसपैठियों को वोटबैंक के तौर पर देखती हैं और इस वजह से इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहीं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि देश की सुरक्षा क्या राज्य सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है? अमित शाह ने कहा कि राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने पटवारी, पुलिस और कलेक्टर को सतर्क करें.

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'वन नेशन, वन इलेक्शन नई बात नहीं'

उन्होंने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' कोई नई बात नहीं है. 1952 में सभी चुनाव एक साथ हुए थे. 1957 में अलग-अलग तारीखों के बावजूद, आठ राज्यों की विधानसभाएं भंग कर दी गईं ताकि एक साथ चुनाव कराए जा सकें. इसके बाद तीसरी बार भी यह प्रक्रिया अपनाई गई. इस प्रक्रिया को तब रोका गया जब पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने केरल में सीपीआई (एम) की सरकार गिरा दी. इसके बाद इंदिरा गांधी ने बड़े पैमाने पर यह सिलसिला जारी रखा. 1971 में तो सिर्फ चुनाव जीतने के लिए लोकसभा को समय से पहले भंग कर दिया गया. इसी वजह से चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे.

EVM से जुड़े सवाल पर दिया ये जवाब

विपक्ष द्वारा EVM पर उठाए जाने वाले सवालों को लेकर अमित शाह ने कहा कि लोकसभा चुनाव ईवीएम से हुआ था, राहुल गांधी मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में वो जीत गए हैं, तो ईवीएम ठीक थी, झारखंड में कांग्रेस शपथ लेकर सत्ता में बैठ गई, तो ईवीएम ठीक थी, लेकिन महाराष्ट्र में जनता ने पटखनी दे दी तो ईवीएम खराब है, हरियाणा में कांग्रेस हार गई तो वहां भी ईवीएम खराब है. उन्होंने कहा कि विपक्ष की हालत -'नाच ना जाने आंगन टेढ़ा' के जैसी है. ईवीएम पर भारत के चुनाव आयोग ने तीन दिन तक सार्वजनिक विज्ञापन देकर कहा था कि अगर ईवीएम हैक हो सकती है तो कोई भी एक्सपेरिमेंट करके बताए,लेकिन इस पर कोई भी सामने नहीं आया. उन्होंने कहा कि विपक्ष का कल्चर है कि आरोप लगाओ और भाग जाओ. 

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मणिपुर का समाधान निकालेंगे: शाह

गृह मंत्री ने मणिपुर हिंसा को लेकर पूछे गए सवालों के भी जवाब दिए और कहा कि वहां नस्लीय हिंसा हो रही है. ये न आतंकी हैं और ना ही धर्म के आधार पर दंगे हो रहे. जब भी मणिपुर में नस्लीय हिंसा हुई, एक-डेढ़ साल तक चला है. कई बार तीन-तीन साल तक चला है. अब हिंसा कम हुई है और स्थिति ठीक हो जाएगी.

मणिपुर में सीएम बदलने की डिमांड को लेकर सवाल पर अमित शाह ने कहा कि यह निर्णय पार्टी करती है. बदलेंगे तो उसके बाद का रिएक्शन क्या होगा, उसकी भी चिंता करनी होती है क्योंकि ये कम्युनिटी का संघर्ष है. सभी पहलुओं पर हम राय कर रहे हैं और इसका समाधान निकालेंगे.

'शिंदे के नाराज होने की वजह नहीं'

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर भी शाह से सवाल किया गया. पूछा गया कि क्या शिंदे सीएम पद फडणवीस के पास जाने से नाराज हैं? इसपर शाह ने कहा, 'शिंदे के नाराज होने की वजह नहीं है. क्योंकि ये पहले से तय था कि सीएम इलेक्शन के बाद चुना जाएगा.' शाह ने आगे कहा कि हमने उनको (शिंदे) सीएम बनाया और ढाई साल मजबूती से चट्टान की तरह उनके पीछे खड़े रहे.

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