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'वन नेशन, वन इलेक्शन' भारत के लिए ऐसे साबित हो सकता है गेम चेंजर, पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने बताया

Agenda AajTak 2024: भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, एजेंडा आजतक के मंच पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने 'एक देश, एक चुनाव' के फायदों के बारे में बातचीत की. उन्होंने कहा कि देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए, इसकी उपयोगिता और इसके फायदे बहुत हैं. 

भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (तस्वीर: Arun Kumar, Rajwant Rawat) भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (तस्वीर: Arun Kumar, Rajwant Rawat)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 13 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:25 AM IST

Agenda AajTak 2024: एजेंडा आजतक 2024 के मंच पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) पहुंचे. इस दौरान उन्होंने 'वन नेशन वन इलेक्शन' कमेटी की रिपोर्ट और उसको मिली मंजूरी के सवाल पर बात करते हुए रामनाथ कोविंद ने कहा, "मुझे लगता है कि वन नेशन वन इलेक्शन, सिर्फ एक फ्रेज है, इसका सही अर्थ यही है कि देश में 1952 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही होते थे. बाद में बदलाव हुआ."

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उन्होंने आगे कहा कि पहले चुनाव एक साथ होते थे और ये करीब 15 साल तक हुए. देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए. इसकी उपयोगिता और इसके फायदे बहुत हैं. 

'जनता गवर्नेंस के लिए वोट देती है...'

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, "संविधान में लोकसभा, विधानसभा, लोकल बॉजीडज और पंचायतों के चुनाव के बारे में कहा गया है और ये चुनाव होते हैं. ये सभी चुनाव अलग-अलग वक्त पर होने के दौरान पांच साल में चार साल इसी में निकल जाते हैं. मतदाता अपना वोट गवर्नेंस के लिए देता है, चुनाव लड़ने के लिए नहीं. 

उन्होंने आगे कहा कि 2023 के आखिरी हिस्से में कई राज्यों में चुनाव हुए. राजस्थान में अक्टूबर में चुनाव हुए, नवंबर में सरकार बन गई. अब जनता मंत्री, मुख्यमंत्री और विधायक के पास जाती है और चुनावी वादों को लेकर बात करती है, तो सबका जवाब एक हो गया कि हमें वादे याद हैं लेकिन प्लीज लोकसभा का चुनाव निपट जाने दीजिए. 

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'मतदाताओं के साथ अन्याय...'

रामनाथ कोविंद ने कहा, "राजस्थान की सरकार को जनता ने जो वक्त दिया था, उसका 6-7 महीने का वक्त निकल गया. इसके बाद हमें बताया गया कि अब लोकल बॉडीज और पंचायतों के चुनाव होंगे. इसमें गवर्नेंस को छोड़कर चुनाव लड़ने की तैयारी होती है. पांच साल में साढ़े तीन साल मुकम्मल तौर पर इसी में निकल जाते हैं. ये मतदाताओं के साथ अन्याय है या नहीं."

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अगर हम संविधान की बात करें, तो संविधान में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की बात कही गई है. मतदाताओं के साथ न्याय के बजाय अन्याय होता है. अगर सभी सियासी दल एक देश एक चुनाव पर सहमति बना लेते हैं, तो यह देश के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.

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