
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'एजेंडा आजतक' में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के मुद्दे पर अपनी बात रखी. लोकसभा चुनाव के बाद यह उनकी पहली मीडिया बातचीत थी. शाह ने आरोपों को खारिज किया कि यह बिल संघीय ढांचे को कमजोर करता है.
उन्होंने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' कोई नई बात नहीं है. 1952 में सभी चुनाव एक साथ हुए थे. 1957 में अलग-अलग तारीखों के बावजूद, आठ राज्यों की विधानसभाएं भंग कर दी गईं ताकि एक साथ चुनाव कराए जा सकें. इसके बाद तीसरी बार भी यह प्रक्रिया अपनाई गई.
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शाह ने कहा, 'इस प्रक्रिया को तब रोका गया जब पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने केरल में सीपीआई (एम) की सरकार गिरा दी. इसके बाद इंदिरा गांधी ने बड़े पैमाने पर यह सिलसिला जारी रखा. 1971 में तो सिर्फ चुनाव जीतने के लिए लोकसभा को समय से पहले भंग कर दिया गया. इसी वजह से चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे.'
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शाह ने यह भी कहा कि यह धारणा गलत है कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बीजेपी के लिए फायदेमंद होगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 2014 और 2019 में ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे, लेकिन बीजेपी वहां हार गई. 2019 में पूरे देश में बड़ा जनादेश मिला, लेकिन आंध्र प्रदेश में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.
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गृह मंत्री के बयान से कुछ घंटे पहले ही केंद्रीय कैबिनेट ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल को मंजूरी दी. इस बिल को संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में अगले हफ्ते पेश किए जाने की संभावना है.
बिल में नया अनुच्छेद 82ए जोड़ने का प्रस्ताव है, जो लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने में मदद करेगा. इसके अलावा, अनुच्छेद 83, 172 और 327 में भी संशोधन किए जाने का प्रस्ताव है.