
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मामलों के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से पूछा गया कि अंतरिक्ष में तिरंगा कैसे फहरेगा? इस पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि बहुत बड़ा बदलाव 4-5 वर्षों में आया है. हमारे वैज्ञानिकों में टैलेंट भी है. क्षमता भी है. जज्बा भी था. अभाव था अनुकूलता का. अभाव था राजनैतिक ढृढ़ता का. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने का बाद ये सब हो पाया है.
पहले इसरो कोई जाता नहीं था. अब चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग हो या आदित्य-एल1 की, वहां 1000 मीडियाकर्मी मौजूद रहते हैं. पहले अखबारों में किसी कोने में खबर लगती थी. अब वहां पर स्कूलों के बच्चे जा रहे हैं. कॉलेजों के बच्चे जा रहे हैं. कोई ऐसा भारतवासी नहीं है, जो उस समय नहीं जुड़ा था टीवी से. 2019 में स्पेस स्टार्टअप एक था. इस समय यह बढ़कर 190 तक पहुंच गई हैं. स्पेस इंडस्ट्री में 1000 करोड़ से ज्यादा निजी निवेश हो चुका है.
हम खुद को सेल्फ इंपोज्ड रेस्ट्रिक्शन में बांधकर बैठे थे. हम तुलना करते थे नासा से. लेकिन ये भूल जाते थे नासा का आधा रिसोर्स निजी कंपनियों से आता है. हमारी प्राइवेट लॉन्चिंग कई गुना बढ़ गई है. आज अमेरिका और रूस के सैटेलाइट हमारे पास से लॉन्च हो रहे हैं.
दस साल में 400 विदेश सैटेलाइट इसरो ने छोड़े
जितने विदेशी सैटेलाइट लॉन्च हुए हैं, उनमें से 400 सैटेलाइट इसी दस साल में लॉन्च हुए हैं. स्पेस इंडस्ट्री से भारत को पैसे मिल रहे हैं. स्पेस टेक्नोलॉजी हर घर में पहुंच गया है. डिजिटल हेल्थ है, स्वामित्व कार्यक्रम, रॉकेट लॉन्चिंग, ढांचागत विकास में इसरो है. स्पेस टेक्नोलॉजी हर जगह मौजूद है. आज दूसरे देश भारत के अगुवाई में आगे बढ़ना चाहता है.
नासा और रूस हमारी क्षमता से चौंक गए हैं
नासा और रूस जैसे देश हमारी क्षमता से चौंक गए हैं. लेकिन पानी होने का प्रमाण चंद्रयान लेकर आया. अमेरिका ने इंसान उतारा लेकिन वो हमारी क्षमता से हैरान हैं. हमारे मिशन की कीमत को लेकर लोग पूछते हैं कि मुझे क्या फर्क पड़ेगा. हमारा चंद्रयान-3 मिशन 600 करोड़ रुपए का. रूस वाले का 12 हजार करोड़ रुपए. लेकिन वो फेल हो गया.
हमारे पास दिमाग है, टेक्नोलॉजी संभाल लेंगे
हमारे पास दिमागी लोग है. हमने एक महीना लगाया चांद तक पहुंचने पर. हमारा फ्यूल बच रहा था. हम ग्रैविटेशनल फोर्स के साथ चल रहे थे. रूस का फेल हो गया मिशन. हमारा सेरिब्रल रिसोर्स अच्छा है.
श्रीहरिकोटा हर किसी को जाना चाहिए...
मैं चाहता हूं पूरे देश के लोग श्रीहरिकोटा जाएं. इसरो सेंटर घूमे. आसपास के लोगों के कल्चर को देखें. कैसे वो जीते हैं. वैज्ञानिकों के साथ समय बिताएं. टैलेंट के हिसाब से युवाओं को मौका दिया जा रहा है. लॉन्चिंग के बाद पूजा होती है. लड्डू बंटता है. शैंपेन नहीं खुलता. केक नहीं कटता. इसरो में बड़ा संस्कारी माहौल है.
पहले रोबोट फिर एस्ट्रोनॉट जाएगा गगनयान में
गगनयान मिशन... लॉकडाउन की वजह डिले हुआ. रूस में हमारे एस्ट्रोनॉट्स फंस गए थे. मानव को अंतरिक्ष में भेजना जितना आनंददायक है. उतना उन्हें लाना भी जरूरी है. इसरो 2025 के शुरूआत में व्योमित्र महिला रोबोट जाएगा. उसके बाद जब वो वापस लौटेंगी तब उन्हें रिकवर किया जाएगा. इसके बाद 2025 के मध्य तक पहला भारतीय अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
गगनयान मिशन के बाद पूरा होगा समुद्रयान
समुद्रयान... अगर सारे मिशन एक साथ चल रहे हैं तो यह इत्तेफाक है. प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद उन्होंने विज्ञान को आगे बढ़ाने की बात ही नहीं कही, बल्कि उसके लिए रास्ते खोले. गगनयान का 2025 का टारगेट है. डीप सी मिशन समुद्रयान भी शुरू हो रहा है. समुद्रयान को दो-तीन साल लग जाएंगे. 2047 में देश शिखर पर होगा. तो उसमें वैल्यू एडिशन कहां से होगा. हमारे वैज्ञानिक साधन हैं. हमारे कई रिसोर्स हैं जिनके बारे में कभी स्टडी नहीं की है. उसमें समुद्र है.
बायो-इकोनॉमी के लिए भारत से बेहतर कोई देश नहीं
हमारे पास समुद्र है. हिंद महासागर से मिनरल्स निकालेंगे. बायो-इकोनॉमी में समंदर बड़ा किरदार निभाएगा. इसे बढ़ावा हिमालय मिशन और समुद्रयान मिशन के जरिए मिलेगा. एग्री-स्टार्टअप पर हमने ध्यान नहीं दिया. हमारा एक्सक्लूसिव एग्री है. बायो है. मिनरल है. हमारा ओशन रिसोर्स, हिमालयन रिसोर्स और स्पेस रिसोर्स. इनके जरिए ही भारत 2040 तक 100 बिलियन डॉलर्स तक पहुंच जाएंगे.
अभी हमारे दरवाजे खुले हैं. जल होने का प्रमाण चंद्रयान लाया. दक्षिणी ध्रुव का डेटा हमसे मांग रहे हैं. अब हमारे भारतीय एस्ट्रोनॉट को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा जाएगा. हम फ्रंटलाइन नेशन हैं. आज हमारी स्पेस टेक्नोलॉजी हर सेक्टर में इस्तेमाल हो रही है.