
एजेंडा आजतक के महामंच पर शनिवार को राजनीतिक जगत के कई दिग्ग्जों ने शिरकत की जिसमें जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं.
उन्होंने कार्यक्रम के दौरान जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात को लेकर मोदी सरकार पर जमकर हमला किया. महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'हमने महात्मा गांधी, नेहरू, आंबेडकर और सरदार वल्लभ भाई पटेल के धर्मनिरपेक्ष भारत से हाथ मिलाया था और अगर वो नहीं होते तो कश्मीर पाक के साथ जाता.
महबूबा मुफ्ती ने कहा, जवाहरलाल नेहरू हों या बाबा साहेब आंबेडकर उन्होंने हमें वो गारंटी दी थी जिसे आप आर्टिकल 370 या 35 ए कहते हैं. इसे हटाकर कश्मीर का भरोसा तोड़ा गया है.
महबूबा मुफ्ती ने एजेंडा के महामंच पर कहा, धर्म के आधार पर अगर कश्मीरियों को साथ जाना होता तो वो पाकिस्तान के साथ जाते क्योंकि वो मुस्लिम बहुसंख्यक देश है. लेकिन वो लड़े और भारत के साथ रहे.
महबूबा मुफ्ती ने कहा, गांधी और नेहरू ने जब कश्मीरियों को भरोसा दिलाया तो मुल्क के अंदर कुछ सांप्रदायिक लोगों ने सांप की तरह फन उठाया और नारा दिया, एक विधान, एक प्रधान और एक संविधान जिससे कश्मीरियों का माथा ठनका.
उन्होंने कहा, जब इस देश में एक विधान, एक प्रधान और एक संविधान की बात हुई तो कश्मीरियों को लगा कि उनसे उनकी जमीन छिन जाएगी. पीडीपी नेता ने कहा, नेहरू के दौर में जो वादे हुए और अब जो हो रहा है उससे कश्मीर के कुछ लोगों का रूझान पाकिस्तान की तरफ बढ़ा है.
महबूबा मुफ्ती ने कार्यक्रम के दौरान कहा, 30 साल तक कश्मीर जलता रहा फिर अटल बिहारी वाजपेयी आए जिन्होंने कश्मीर को दिल से समझा. कारगिल और संसद पर हमले के बाद भी उन्होंने पाकिस्तान से बात की.'
पीडीपी प्रमुख ने कहा, अगर एक विधान, एक संविधान, एक प्रधान की बात नहीं करते तो आज कश्मीर में हालत ऐसे नहीं होते, मैं अटल बिहारी वाजपेयी को सलाम करती हूं क्योंकि उन्होंने हमेशा राजधर्म निभाया.
बीजेपी से गठबंधन को लेकर महबूबा मुफ्ती ने कहा, बीजेपी के साथ गठबंधन की पहली शर्त थी की आप धारा 370 नहीं हटाएंगे और पाकिस्तान से बात करेंगे लेकिन वो नहीं हुआ. बदकिस्मती से 2019 में इन्होंने उसे हटा दिया और बताते हैं नया कश्मीर बनाएंगे. अगर यही हालात 1947 में रहते तो कश्मीर कभी भारत के साथ नहीं जाता.
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