
भारतीय एयरलाइंस को निशाना बनाने वाली बम की झूठी धमकियां लगातार मिल रही हैं. इसकी वजह से रूट बदले जा रहे हैं, फ्लाइट्स देर से चल रही हैं या कैंसल भी हो रही हैं. हाल में इसमें एक नई बात पता लगी कि इन हॉक्स धमकियों में से 70 फीसदी का सोर्स एक ही ट्विटर हैंडल एडम लैंजा है. साथ ही सबके संदेश भी लगभग मिलते-जुलते हैं- कोई भी जिंदा नहीं बचेगा. जल्दी प्लेन खाली कर दो. अब संबंधित ट्विटर अकाउंट सस्पेंड हो चुका, लेकिन इस नाम के शख्स ने साल 2012 में अमेरिकी एलिमेंट्री स्कूल में कत्लेआम मचा दिया था.
दिसंबर 2012 में 20 साल के युवक एडम लैंजा ने अमेरिका के कनेक्टिकट में सैंडी हुक एलिमेंट्री स्कूल में एक भयावह घटना को अंजाम दिया. स्कूल में घुसकर एडम ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 6 से 8 साल के 20 बच्चों समेत 6 एडल्ट्स की जान चली गई. इसे अमेरिकी स्कूलों में अब तक की सबसे भयानक घटनाओं में से एक माना जाता है.
घटना की शुरुआत 14 दिसंबर का सूरज उगने के साथ ही हो गई. एडम ने पहले अपनी मां नैन्सी लैंजा को गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद मां की ही गाड़ी ड्राइव करते हुए वो एलीमेंट्री स्कूल की तरफ बढ़ा. इस स्कूल से उसका कोई नाता नहीं था, सिवाय इसके कि वो उसके घर के सबसे पास था.
सुबह साढ़े 9 के लगभग एडम जब स्कूल में घुसा तो हथियारों से लैस था. सीएनएन के अनुसार, उसके पास एक सेमी-ऑटोमैटिक राइफल और दो पिस्तौलें थीं. साथ ही उसने मिलिट्री वेस्ट भी पहना हुआ था. अंदर पहुंचते ही एडम ने फायरिंग शुरू कर दी. वहां मौजूद स्कूल स्टाफ ने बच्चों को बचाने की कोशिश भी की. कई लोग अलमारियों के पीछे या बाथरूम में छिप गए. हालांकि इसमें कम ही लोग बच सके. जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, एडम खुद को भी गोली मार चुका था.
इस घटना ने अमेरिका में गन कंट्रोल जैसे मुद्दे पर बड़ी बहस शुरू की. साथ ही इसपर भी बात होने लगी कि मानसिक सेहत खराब होने की पहचान और इलाज कितना जरूरी है. दरअसल एडम सालों से कई मानसिक समस्याओं से जूझ रहा था. उसे ऑटिज्म, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर और डिप्रेशन जैसे कई डिसऑर्डर थे. बाद में जांच एजेंसियों ने यह भी माना कि उसकी मां उसे लेकर इतनी प्रोटेक्टिव थी कि स्कूल भी छुड़वा दिया था. सालों से वो घर पर ही रहता था.
मानसिक दिक्कतों से जूझते हुए ही उसने मां की गन ली. हालांकि बाकी हथियार उसे कहां से मिले, और उसने अपनी मां समेत स्कूल को क्यों टारगेट किया, इसका खुलासा कभी नहीं हो सका. ये एक रहस्यमयी केस बनकर रह गया. बस हुआ ये कि कोर्ट में केस के दौरान साल 1786 से 2012 तक हुए ऐसे सारे मामलों पर चर्चा हुई, जिसमें मास हत्याएं हुई थीं.
एफबीआई ने कई सारे दस्तावेज सार्वजनिक किए, जिसमें एक महिला का भी इंटरव्यू था, जिसमें माना कि इंटरनेट पर कुछ दिनों की जान-पहचान में भी उसे समझ आ चुका था कि एडम खून-खराबे पर काफी बात करता है. अब एयरलाइन्स को मिल रही धमकियां इस नाम के सोशल हैंडल से जुड़ी हैं, ये बात ज्यादा डराने वाली है. फिलहाल अकाउंट सस्पेंड करने के साथ जांच चल रही है.
एविएशन इंडस्ट्री में वैसे धमकीभले कॉल्स आना नया नहीं. इससे पहले जून में भी एक दिन के भीतर लगभग 40 एयरपोर्ट्स को हॉक्स बम थ्रेट मिला था. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2014 से 2017 के बीच इस तरह की 120 धमकियां मिलीं, जिनमें से आधी धमकियां दिल्ली और मुंबई जैसे सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स को थीं.
क्या असर होता है इसका
देश में रोज तीन हजार से ज्यादा फ्लाट्स चल रही हैं. जिसके लिए डेढ़ सौ से ज्यादा ऑपरेशनल एयरपोर्ट हैं. इनमें भी 33 इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स हैं. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल लगभग 150 मिलियन लोगों ने घरेलू यात्राएं कीं. ये बहुत बड़ा आंकड़ा है, जिसका असर भी उतना ही व्यापक होता है. फिलहाल त्योहारों का मौसम है. यात्राएं निजी और कारोबारी मकसद से की जा रही हैं. ऐसे में धमकीभरे फोन कॉल या संदेश को हल्के ढंग से नहीं लिया जा सकता.
हर ऐसी धमकी के बाद गहन सर्च अभियान चलता है. इसकी वजह से एक ही फ्लाइट डिले नहीं होती, बल्कि सारे शेड्यूल पर असर पड़ता है. कई बार फ्लाइंट कैंसल होती है. इसके पैसे लौटाने होते हैं, या यात्रियों को घंटों के लिए कहीं ठहराना होता है. इस सबका खर्च अच्छा-खासा आता है. साथ ही बार-बार अगर कुछ खास एयरलाइन्स को धमकियां मिलें तो इससे उनकी इमेज भी खराब होती है, जिसका असर भी लंबे समय तक बना रहता है.