
ब्रिटेन ने अमेरिकी नस्ल के एक कुत्ते पर बैन लगा दिया है. प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बताया कि अमेरिकन एक्सएल बुली डॉग पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है. हाल ही में कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाओं के बाद ये फैसला लिया गया है.
सुनक ने सोशल मीडिया साइट X पर वीडियो जारी कर कहा, 'अमेरिकन एक्सएल बुली डॉग्स हमारे समाज, खासकर बच्चों के लिए खतरा हैं.'
अमेरिकन एक्सएल बुली डॉग की गिनती खूंखार कुत्तों में होती है. माना जाता है कि इन्हें थोड़ी देर में ही गुस्सा आ जाता है. इनमें इतनी ताकत होती है कि ये अगर किसी को काट लें तो उसकी हड्डियां चूर-चूर हो जाए.
यूके में आठ-दस साल पहले ही कुत्तों की ये नस्ल आई थी. कोविड महामारी के दौरान इनकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई. हालांकि, यूके केनल क्लब में इनको रजिस्टर नहीं किया गया है. सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, इंटरनेशनल कैनाइन क्लब और अमेरिकन केनल क्लब ने भी इन डॉग को मान्यता नहीं दी है.
क्रॉस ब्रीडिंग से बने हैं ये डॉग
आमतौर पर अमेरिकन बुली और पिटबुल डॉग्स को एक ही समझ लिया जाता है. लेकिन ऐसा नहीं हैं. अमेरिकन बुली डॉग्स क्रॉस ब्रीडिंग का नतीजा है. बताया जाता है कि कम से कम पांच अलग-अलग नस्ल के कुत्तों की क्रॉस ब्रीडिंग के बाद अमेरिकन बुली डॉग्स की उत्पत्ति हुई है.
अमेरिकन पिटबुल टेरियर इन डॉग्स की पैरेंट ब्रीड है. 1980 के दशक में इनकी उत्पत्ति हुई थी. लेकिन इसे और ज्यादा मांसल कुत्ता बनाने के लिए दूसरे नस्ल के कुत्तों से ब्रीडिंग करवाई गई.
अमेरिकन बुली डॉग्स चार तरह के होते हैं. स्टैंडर्ड, पॉकेट, एक्सएल और क्लासिक. स्टैंडर्ड मीडियम साइज के होते हैं, जिनकी ऊंचाई 16 से 20 इंच होती है. पॉकेज सबसे छोटा साइज होता है और ये सिर्फ 13 से 16 इंच ही ऊंचे होते हैं. एक्सएल साइज के कुत्तों की हाइट 19 से 23 इंच होती है. क्लासिक कुत्तों का साइज भी एक्सएल के बराबर ही होता है.
खूंखार इतने कि हड्डियां चूर-चूर कर दें
अमेरिकन बुली डॉग को शिकारी कुत्तों के तौर पर इस्तेमाल के लिए पैदा किया गया था. ब्रीडर्स मानते हैं कि इस नस्ल के कुत्ते जल्दी सीख लेते हैं.
लेकिन इनका गुस्सा बड़ा खतरनाक होता है. इस कारण ज्यादातर लोग इन्हें पसंद नहीं करते. कई ब्रीडर्स इस बात को भी मानते हैं कि अगर इन्हें सही तरह से न पाला जाए या सिखाया जाए तो ये बहुत खतरनाक हो सकते हैं.
लंदन स्थित बुली वॉच ग्रुप का दावा है कि 2021 से 2023 के बीच अमेरिकन बुली डॉग के हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है.
ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सिस्टम के कंसल्टेंट सर्जन रिचर्ड बार्कर का कहना है कि एक्सएल बुली अगर काट ले तो इससे जो घाव होते हैं, वो दूसरे नस्ल के कुत्तों के काटने से कहीं ज्यादा गंभीर होते हैं. इनके काटने से स्किन फट सकती है और हड्डियां पूरी तरह से चकनाचूर हो सकती हैं. उनका कहना है कि इनके काटने से जो क्षति पहुंचती है, वो कभी ठीक नहीं होती.
इसलिए होती है इन कुत्तों पर बैन की मांग
पिछले हफ्ते बर्मिंघम में एक बच्ची पर अमेरिकन एक्सएल बुली डॉग ने हमला कर दिया था. उस बच्ची को बचाने आए दो लोगों पर भी इस डॉग ने हमला किया. इसमें तीनों बुरी तरह घायल हो गए थे.
इसके कुछ दिन बाद ही स्टॉनल में एक शख्स पर भी कुत्ते ने हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये अमेरिकन एक्सएल बुली डॉग था.
इसी साल मई में मैनचेस्टर के पास एक 37 साल के डॉग केयरटेकर की मौत हो गई थी. जांच में पुलिस ने यहां से अमेरिकन एक्सएल बुली डॉग्स के 15 कुत्ते बरामद किए थे. माना गया कि इन्हीं कुत्तों के हमले में इसकी मौत हुई होगी.
पिछले साल मार्च में मर्सीसाइड में एक 17 साल की बच्ची को भी इसी नस्ल के कुत्ते ने मार डाला था. बच्ची के परिवार ने एक हफ्ते पहले ही अमेरिकन एक्सएल बुली नस्ल के डॉग को पालने के लिए खरीदा था.
इस साल जून में कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद जॉन हायेस ने हाउस ऑफ कॉमन्स में मुद्दा उठाते हुए इस नस्ल के कुत्तों पर तत्काल बैन लगाने की मांग की थी. हालांकि, तब केनल क्लब ने तर्क दिया था कि कुत्तों के काटने की समस्या गैर-जिम्मेदार मालिकों की वजह से है और प्रतिबंध लगाने से इसका समाधान नहीं होगा.
यूके में प्रतिबंध होने वाली अमेरिकन बुली डॉग पांचवी नस्ल है. इससे पहले यूके में पिटबुल टेरियर, जापानी टोसा, डोगो अर्जेंटीनो और फिला ब्रासीलीरो पर बैन लग चुका है.
इन देशों में भी है बैन
अमेरिकन बुली डॉग्स पर कई देशों में प्रतिबंध है. आयरलैंड ने इस नस्ल के कुत्तों को 'बैनडॉग' की कैटेगरी में डाला है. इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से इन कुत्तों को घुमाता है तो उस समय उसके मुंह पर मास्क लगा होना चाहिए.
तुर्की में भी अमेरिकन बुली को पालना गैर-कानूनी है. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने भी इन कुत्तों की खरीद, बिक्री और पालने पर रोक लगा रखी है.
भारत में नहीं है बैन
भारत में अमेरिकन बुली डॉग्स पर बैन नहीं है. इस नस्ल के एक डॉग की कीमत 30 से 80 हजार रुपये तक हो सकती है. ये डॉग की उम्र, साइज और कलर पर निर्भर करती है.
वैसे तो ब्रीडर्स इन्हें अच्छा पेट डॉग मानते हैं. लेकिन साथ ही वो ये भी सलाह देते हैं कि इस नस्ल के कुत्तों को सही तरह से ट्रेन्ड किया जाए.
अमेरिकन बुली डॉग्स दूसरे कुत्तों को देखकर आक्रामक हो सकते हैं. ये दूसरों को देखकर भी भड़क सकते हैं, जिससे स्थिति संभालना मुश्किल हो सकती है. चूंकि ये ताकत वाले मांसल कुत्ते होते हैं, इसलिए इन्हें संभाल पाना मुश्किल होता है.
इस नस्ल के कुत्तों के साथ एक दिक्कत ये भी है कि ये बड़ी जिद्दी होते हैं. अगर इन्होंने एक बार कुछ करने की ठान ली तो फिर उसे करके ही रहते हैं. फिर ये अपने मालिक की भी नहीं सुनते.