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AstraZeneca की कोविड वैक्सीन से दुष्परिणाम! दवा कंपनी ने कुबूला, इन देशों ने लगा दिया था बैन

खून का थक्का जमने से मौत की घटनाएं बढ़ने पर कई देशों ने शुरुआत में ही एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन पर बैन लगा दिया था. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन इसकी वकालत करता रहा था. अब खुद दवा कंपनी ने अदालत में मान लिया कि वैक्सीन से 'रेयर हालातों में' खून के थक्के जम सकते हैं. इसके बाद से हंगामा मचा हुआ है.

कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका पर सवाल उठ रहे हैं. (Photo- PTI) कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका पर सवाल उठ रहे हैं. (Photo- PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 9:48 PM IST

कोविड 19 जब दुनियाभर में कोहराम मचा रहा था, तब मेडिकल वर्ल्ड में सबसे ज्यादा उठापटक हुई. कोशिश थी कि जल्दी से जल्दी वैक्सीन बना ली जाए और उसे फटाफट मंजूरी भी मिल जाए. आनन-फानन एक के बाद एक कई वैक्सीन्स को दुनियाभर में मंजूरी मिली. इसी में एक थी ऐस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले पर काम करने वाली कोविशील्ड. कंपनी ने खुद माना है कि दुर्लभ मामलों में इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं.

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किस शख्स ने घसीटा कोर्ट तक 

ब्रिटेन के जेमी स्कॉट नाम के शख्स का आरोप था कि अप्रैल 2021 में वैक्सीन लेने के बाद उनकी कंडीशन खराब होने लगी. उनके शरीर में खून के थक्के जमने लगे, जिसका असर ब्रेन पर भी हुआ. यहां तक कि डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था. 

पिछले साल उन्होंने एस्ट्राजेनेका के खिलाफ कोर्ट केस किया था. जबाव में कंपनी ने पहले तो इससे इनकार किया, लेकिन हाल में जाकर माना कि उनकी वैक्सीन से रेयर हालातों में दुष्परिणाम भी हो सकते हैं. थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) इनमें से एक है.

स्कॉट की पत्नी केट ने कहा कि इस बीमारी की वजह से उनके पति समेत पूरे परिवार को काफी तकलीफ झेलनी पड़ी. स्कॉट को स्थाई ब्रेन इंजुरी हो चुकी है, और वे नौकरी करने की हालत में नहीं. सोमवार को एस्ट्राजेनेका के स्वीकारनामे के साथ ही स्कॉट एंड फैमिली ने कंपनी से माफी मांगने के अलावा मुआवजे की भी मांग की है. साथ ही उन सारे परिवारों से माफी मांगने को कहा है, जिन्हें ये तकलीफ झेलनी पड़ी. 

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बता दें कि यूके की मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी ने माना कि उनके अपने देश में 80 से ज्यादा ऐसे मामले हैं, जिनमें डर है कि उनकी मौत वैक्सीन के कारण हुए टीटीएस यानी खून के थक्के जमने से हुई. एक्ट्राजेनेका की वैक्सीन अब ब्रिटेन में एडमिनिस्टर नहीं की जा रही.

मार्केट में आने के कुछ ही समय बाद वहां इसके खतरे भांप लिए गए थे, हालांकि दुनिया के बाकी देशों में इस फॉर्मूले पर काम होता रहा. यहां तक कि कंपनी ने साइड इफेक्ट की बात से हमेशा इनकार करते हुए उन्हें मामूली ही बताया था. अब पहली बार टीटीएस जैसी बातें हो रही हैं. हालांकि कंपनी का अब भी यही कहना है कि रेयर मामलों में ऐसा होता है. 

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के खिलाफ कितने मामले

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश अदालतों में प्रभावित परिवारों के 51 केस चल रहे हैं. ये हर्जाना मांग रहे हैं, जो यूके के हिसाब से सौ मिलियन पाउंड है. 

किन देशों ने किया एस्ट्राजेनेका को बैन

आननफानन में बनी वैक्सीन को शुरुआत में तो दुनिया ने स्वीकार किया, लेकिन मामला संभलते ही इसकी स्टडी होने लगी. डेनमार्क ने इसपर सबसे पहले बैन लगा दिया. इसके बाद आयरलैंड, थाइलैंड, नीदरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, कांगो और बल्गेरिया ने भी एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन पर पाबंदी लगा दी. 

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यूरोपियन देश, जैसे जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन ने साल 2021 में ही ब्लड क्लॉट के मामले देखते हुए बैन का फैसला ले लिया था. इनके पीछे कनाडा, स्वीडन, स्लोवाकिया भी बैन करने वाले देशों में शामिल हो गए. हालांकि इन पाबंदियों के बीच ही वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने एक स्टेटमेंट निकाला कि एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन बिल्कुल सेफ है, और इसके फायदे, खतरों से कहीं ज्यादा हैं. 



कोविशील्ड को यूरोपियन यूनियन ने नहीं दिया था ग्रीन पास

यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने कोविशील्ड को ग्रीन पास तक देने से मना कर दिया. बता दें कि ग्रीन पास यूरोपियन यूनियन का डिजिटल सर्टिफिकेट है जो कोविड वैक्सीन लगी होने की बात बताता है. ईयू के आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, उसने 2.3 बिलियन सर्टिफिकेट अलग-अलग वैक्सीन्स के लिए जारी किए, एस्ट्राजेनेका का कोविशील्ड उनमें शामिल नहीं. 

क्या है टीटीएस, एस्ट्राजेनेका में जिसका जोखिम बताया जा रहा

थ्रोम्बोसिस का इस्तेमाल ब्लड क्लॉटिंग के लिए होता है. ये तब होता है, जब खून में प्लेटलेट और प्रोटीन साथ चिपकने लगते हैं. ये थक्का बनकर जमने लगते हैं, जिससे ऑर्गन्स पर बुरा असर होता है. अगर ये क्लॉटिंग हार्ट में बने तो उसे खून पंप करने में दिक्कत होती है. या ब्रेन में हो तो ब्लड क्लॉट से ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम रहता है. 

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क्या कहती है भारतीय स्टडी

हार्ट या ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामलों को हाल में वैक्सीन से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने हाल ही में इसके कनेक्शन से इनकार किया था. स्टडी में पूरे देश से 18 से 45 उम्र के ऐसे लोगों को रखा गया, जिनकी 1 अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2023 के बीच अचानक मौत हुई थी. ऐसे सात सौ ज्यादा मौतों के कारण साफ नहीं हो पाए थे. स्टडी में यह सामने आया कि कोविड वैक्सीन से युवाओं में सडन डेथ का खतरा नहीं बढ़ा, बल्कि इसके पीछे कई अलग-अलग कारण थे. 

क्या है एस्ट्राजेनेका वैक्सीन

एस्ट्राजेनेका फार्मा कंपनी ने एक वैक्सीन बनाई, जिसे AZD1222 या भारत में कोविशील्ड नाम मिला.  यह वायरल वैक्टर वैक्सीन है. भारत में इसका निर्माण पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया. जिसे बाद में लो और मिडिल इनकम देशों में भी सप्लाई किया गया. 

कैसे काम करती है ये 

कोविशील्ड के फॉर्मूले में चिंपाजी में मिलने वाले कॉमन कोल्ड वायरस के कमजोर वर्जन को लिया जाता है, जिसे कोविड प्रोटीन के जीन को ले जाने के लिए मॉडिफाई किया गया हो. इंजेक्ट होने के बाद वैक्सीन इम्यून सिस्टम को एंटीबॉडी बनाने के लिए उकसाता है, साथ ही टी सेल्स को एक्टिव करता है. इससे जब असल में वायरस का हमला होता है तो शरीर पहले से ही तैयार हो चुका रहता है. इसके बाद भी इंफेक्शन होता तो है, लेकिन काफी हल्का. 

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कैसे बनी वैक्सीन

एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर ये वैक्सीन तैयार की. ऑक्सफोर्ड की इस मामले में एंट्री इसलिए हुई कि वो पहले से ही चिंपाजी में पाए जाने वाले एडिनोवायरस पर काम कर रहा था. ऐसे में जब कोविड 19 में वैक्सीन की जरूरत नजर आई तो पुरानी रिसर्च काम आ गई. 

भारत में वैक्सीन लगने की शुरुआत जनवरी 2021 से हुई. पहली वैक्सीन कोविशील्ड ही थी. इसके बाद कोवैक्सीन आई, जो देशी वैक्सीन थी. इसका निर्माण भारत बायोटेक ने किया था. इसके अलावा कई विदेशी वैक्सीन्स को हमारे यहां मंजूरी मिली. जैसे रूस की वैक्सीन स्पुतनिक-V और अमेरिकी स्पाइकवैक्स. 

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