
महाराष्ट्र की सियासत का अहम चेहरा रहे बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई. बाबा सिद्दीकी का वर्चस्व सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी था. बाबा सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है.
लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में बंद है. सिद्दीकी की हत्या के मामले में पुलिस ने छह आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से तीन को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकियों की तलाश की जा रही है.
लॉरेंस बिश्नोई अब क्राइम की दुनिया का वो नाम बन गया है, जो कुछ सालों से हाई प्रोफाइल मर्डर में शामिल रहा है. हैरान करने वाली बात ये है कि इन हत्याओं की साजिश जेल में रची जाती है. सुपारी के लिए शूटर्स को हायर किया जाता है और वारदात को अंजाम दिया जाता है. बाबा सिद्दीकी की हत्या की प्लानिंग भी पटियाला जेल में हुई. वहां लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गों ने मोहम्मद जीशान अख्तर को बाबा सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी दी. जीशान अख्तर जून में ही जेल से बाहर आया था.
पंजाब के फजिल्का जिले के दुतरांवाली गांव में जन्मा लॉरेंस बिश्नोई आज देश का बड़ा गैंगस्टर बन चुका है. उसकी तुलना अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम तक से होने लगी है. एनआईए की चार्जशीट से पता चलता है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके सिंडिकेट भी ठीक उसी तरह फैला, जैसा 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम का नेटवर्क फैला था. दाऊद भी छोटे-मोटे अपराधों से अंडरवर्ल्ड की दुनिया में आ गया था.
छात्र राजनीति से क्राइम की दुनिया तक
इंटरनेट पर लॉरेंस बिश्नोई के बारे में जो जानकारी मौजूद है, उसके मुताबिक वो 12 फरवरी 1993 को पैदा हुआ था. उसके पिता हरियाणा पुलिस में सिपाही थे. पांच साल में ही उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया और खेती-बाड़ी शुरू कर दी.
लॉरेंस बिश्नोई का असली नाम सतविंदर सिंह बताया जाता है. उसके माता-पिता चाहते थे कि वो गांव से बाहर निकले, इसलिए चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल में उसका एडमिशन कराया गया. लॉरेंस को एथलेटिक्स में इंट्रेस्ट था, इसलिए वो पंजाब यूनिवर्सिटी भी आने-जाने लगा. 2007 में उसने लॉ की पढ़ाई के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 में पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के चुनाव में लॉरेंस का दोस्त रॉबिन बराड़ खड़ा हुआ. तब सामने खड़े उम्मीदवार को धमकाने के मकसद से लॉरेंस ने अपने दोस्त की लाइसेंसी रिवॉल्वर से उसे गोली मार दी. पुलिस ने लॉरेंस और उसके दोस्तों के खिलाफ अटेम्प्ट टू मर्डर का केस दर्ज किया. इस कारण लॉरेंस को दो महीने जेल में बिताने पड़े. उसके जेल में रहने के कारण रॉबिन चुनाव हार गया. जेल से बाहर आने के बाद लॉरेंस ने जीते हुए उम्मीदवार के भाई पर गोली चला दी और उस पर अटेम्प्ट टू मर्डर का एक और केस दर्ज हो गया. जेल में रहते हुए वो कई अपराधियों से मिला और यहीं से क्राइम की दुनिया में उसकी एंट्री हुई.
पहला मर्डर
जेल से बाहर आने के बाद लॉरेंस छात्र राजनीति में सक्रिय हो गया. 2010 में उसने कॉलेज के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया. इस हार का बदला लेने के लिए लॉरेंस और उसके दोस्तों ने जीते हुए उम्मीदवार के हाथ-पैर तोड़ दिए. उसे कई दिन तक जेल में रहना पड़ा.
जमानत पर रिहा होने के बाद उसने छात्र राजनीति पर ध्यान दिया और 2011 में अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही लॉरेंस की मुलाकात गोल्डी बराड़ से हुई. गोल्डी बराड़ भी एनआईए की वांटेड लिस्ट में है.
2012 में ग्रेजुएट होने के बाद भी उसने छात्र राजनीति में अपना दबदबा बनाए रखा. उसका गैंग बढ़ रहा था. कॉलेजों-यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनावों में लॉरेंस की गैंग के लोग उम्मीदवार बनते थे.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2013 में मुक्तसर के सरकारी कॉलेज के चुनाव में जब लॉरेंस का उम्मीदवार चुनाव हार गया, तो उसने जीतने वाले उम्मीदवार की हत्या कर दी. इसके बाद, लुधियाना नगर निगम चुनाव में उसने अपने दोस्त के चचेरे भाई के खिलाफ खड़े उम्मीदवार की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी.
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ऐसे फैलता गया अपराध का साम्राज्य
साल 2013 में लुधियाना नगर निगम के एक उम्मीदवार की हत्या के बाद लॉरेंस बिश्नोई काफी लंबे वक्त तक जयपुर में अपने दोस्त के यहां छिपकर रहा. यहां उसने शराब के कारोबार में किस्मत आजमाई.
द हिंदू ने लॉरेंस के क्रिमिनल डोजियर के हवाले से बताया है कि जयपुर में उसने हरियाणा के एक शराब कारोबारी के कारोबार में पैसा लगाया. कुछ महीने बाद लॉरेंस के चचेरे भाई अमनदीप की चार लोगों ने मिलकर हत्या कर दी. अमनदीप भी एक शराब कारोबारी थी, जिसके बिजनेस में लॉरेंस ने पैसा लगाया था. बताया जाता है कि दो साल तक लॉरेंस ने अमनदीप के हत्या में शामिल सभी लोगों का पीछा किया और हिट लिस्ट बनाई.
2014 में उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया गया. उसी साल जब उसे पेशी के लिए अदालत ले जाया जा रहा था, तब वो पुलिस की कस्टडी से भाग गया. 2016 में उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया.
लॉरेंस जेल में था, लेकिन उसके अपराध का साम्राज्य फैलता जा रहा था. उसका छोटा भाई अनमोल बिश्नोई भी अब गैंग संभालता है. उसका काम राजस्थान में बिश्नोई गैंग का दबदबा बढ़ाना है. इसी साल अप्रैल में बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर पर फायरिंग हुई थी. इसकी जिम्मेदारी अनमोल बिश्नोई ने ही ली थी.
जेल से ही चल रही बिश्नोई गैंग?
लॉरेंस बिश्नोई 2016 से जेल में बंद है, लेकिन उसके बावजूद उसकी गैंग बढ़ती जा रही है. लॉरेंस बिश्नोई के काम करने का पैटर्न भी अलग है. वो जेल में रहते हुए अपराधियों से मिलता है, उन्हें अपनी गैंग में शामिल करता है और जब वो बाहर आते हैं तो उसकी प्लानिंग को अंजाम देते हैं.
जेल में रहते हुए लॉरेंस ने अपराधियों की एक गैंग तैयार की है. रिहा होने के बाद वो आर्म्स डीलर और स्थानीय माफियाओं के साथ मिलकर अपराध करते हैं.
इतना ही नहीं, कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि लॉरेंस बिश्नोई जेल में रहकर वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल यानी VOIP के जरिए कॉल करता है. इसमें इंटरनेट से कॉल किया जाता है. ऐसी कॉल को ट्रेस कर पाना बहुत मुश्किल होता है.
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कहां-कहां फैली है बिश्नोई गैंग?
लॉरेंस बिश्नोई की गैंग का ज्यादातर कामकाज कनाडा में बैठा गोल्डी बराड़ संभालता है. गोल्डी बराड़ भी वांटेड अपराधी है.
एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई की गैंग में 700 से ज्यादा शूटर्स हैं, जिनमें से 300 तो अकेले पंजाब में है. एनआई के मुताबिक, कभी बिश्नोई गैंग सिर्फ पंजाब तक सीमित था, लेकिन गोल्डी बराड़ की मदद से वो अब उत्तर भारत के कई राज्यों तक फैल गया है.
अब बिश्नोई गैंग के गुर्गे पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान और झारखंड समेत पूरे उत्तर भारत में हैं. युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाते हैं. लॉरेंस बिश्नोई को अदालत से लाने-ले जाने की तस्वीरें पोस्ट की जाती हैं.
जून 2022 में सामने आए क्रिमिनल डोजियर के मुताबिक, 12 साल में लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ 36 क्रिमिनल केस दर्ज किए जा चुके थे. ये केस पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में दर्ज थे. 36 में से 21 मामलों में सुनवाई अब भी जारी है, जबकि 9 मामलों में उसे बरी कर दिया गया है. 6 मामलों में बिश्नोई को दोषी ठहराया जा चुका है.
अब बना दाऊद जैसा डॉन!
लॉरेंस बिश्नोई की तुलना अब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से होने लगी है. पिछले साल एनआईए ने जो चार्जशीट फाइल की थी, उसमें कहा था कि बिश्नोई गैंग भी वैसे ही काम कर रही है, जैसे 90 के दशक में दाऊद की गैंग ने किया था.
बिश्नोई और उसकी गैंग अब खुलेआम धमकाती है. बिश्नोई गैंग के एक सदस्य ने सोशल मीडिया पर धमकाते हुए लिखा है कि जो भी सलमान खान और दाऊद गैंग की मदद करेगा, वो अपना हिसाब-किताब लगाकर रखना.
मई 2022 में पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या का आरोप भी लॉरेंस बिश्नोई पर ही है. साल 2021 में लॉरेंस बिश्नोई को राजस्थान की जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया था. अगस्त 2023 से वो गुजरात की साबरमती जेल में बंद है.