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बोलीविया में तख्तापलट की एक और नाकाम कोशिश, क्यों इस देश में होती रही सबसे ज्यादा सैन्य बगावतें?

बोलीविया में एक बार फिर तख्तापलट की नाकाम कोशिश हुई. बख्तरबंद गाड़ियों ने राष्ट्रपति आवास समेत अहम सरकारी इमारतों के भीतर घुसना चाहा. फिलहाल हालात काबू में हैं और सेना को उकसाने वाले जनरल को भी गिरफ्तार किया जा चुका. ऐसा पहली बार नहीं हुआ. साल 1825 में स्पेन से आजाद होने के बाद से लेकर अब तक इस मुल्क ने तख्तापलट के करीब दौ सौ प्रयास देख लिए.

बोलीविया में एक बार फिर तख्तापलट का प्रयास हुआ. (Photo- AP) बोलीविया में एक बार फिर तख्तापलट का प्रयास हुआ. (Photo- AP)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 27 जून 2024,
  • अपडेटेड 3:32 PM IST

पूरी दुनिया में अस्थिरता दिख रही है. इस बीच बुधवार को दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में अलग ही एक्सट्रीम दिखा. वहां जनरल जुआन जोस जुनिगा की अगुवाई में सशस्त्र बलों ने राष्ट्रपति भवन पर धावा बोलना चाहा. हालांकि तीन घंटों के भीतर ही विद्रोह शुरू होकर काबू में भी आ गया. बोलीविया में सैन्य तख्तापलट की कोशिश अक्सर ही होती आई है. यहां तक इसे दुनिया में सबसे ज्यादा तख्तापलट के लिए जाना जाता है. 

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आखिर तख्तापलट होते क्यों हैं

ये तब होता है जब किसी देश की सेना उसके सुप्रीम लीडर पर भी भारी पड़ जाती है. इस समय जो उठापटक होती है, उसे सैन्य बदलाव कहते हैं. वहीं कई बार विपक्ष भी सत्ता पक्ष से ज्यादा मजबूत हो जाता है. ऐसे में भी तख्तापलट होता है, लेकिन इसमें खूनखराबा नहीं या कम होता है. दूसरी तरफ सैन्य बदलाव में सरकार और सेना के बीच लड़ाई होती है, यहां तक कि सरकार के पक्ष में खड़े आम लोगों का भी नुकसान होता है.

कहां होते हैं ऐसे प्रयास

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, आमतौर पर सैन्य तख्तापलट वहीं होता है, जहां मानव विकास सूचकांक (HDI) काफी कम होता है. यानी लोग गरीबी, भुखमरी, महंगाई, अराजकता जैसी चीजें झेल रहे हों, वहां सरकार से यकीन कम होने लगता है. सेना जब ये देखती है तो अपनी ताकत बढ़ाने लगती है. वो मौजूदा सत्ता के कई लोगों को अपने पक्ष में कर लेती है और फिर विद्रोह कर देती है. इसके बाद सरकार बेबस हो जाती है. थोड़ी बहुत पुलिस या दूसरे फोर्सेज की मदद से बगावत कुचलने की कोशिश होती है लेकिन सैन्य ताकत के आगे ये कुछ नहीं.

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बोलीविया ने झेला सबसे ज्यादा तख्तापलट

दक्षिण अमेरिकी देश का नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. अगस्त 1825 में स्पेन से आजाद होने के बाद से लेकर अब तक बोलीविया ने 190 से ज्यादा बार तख्तापलट के प्रयास देखे. इसकी आखिरी कोशिश साल 2019 में हुई थी, जब मौजूदा सरकार ने हार मानते हुए खुद ही इस्तीफा दे दिया. इसके बाद चुनी हुई सरकार आई, जिसके नेता राष्ट्रपति लुइस आर्से हैं. उनपर भी अब संकट मंडरा रहा है. 

कोको की फसल के चलते होती रही साजिश

आजादी के तीसरे ही साल से यहां अस्थिरता शुरू हो गई. सत्ता और सेना के बीच संघर्ष होने लगा. बाकी देशों में जहां तख्तापलट की वजह गरीबी और बेरोजगारी होती, यहां एक अलग बात थी. इस देश में कोका या कोको का उत्पादन खूब होता था. यूनाइटेड नेशन्स के अनुसार ये देश कोलंबिया और पेरू के बाद सबसे बड़ा कोका उत्पादक देश है. इसका इस्तेमाल दवाओं, इत्र से लेकर खानपान में भी होता. यही फसाद की वजह थी. दूसरे देश चाहते थे कि वे यहां की जमीन लीज पर ले सकें. इसके लिए वे सत्ता-सेना के बीच फूट डालते और किसी एक पक्ष की मदद का दिखावा करते. 

इंटरनेशनल ताकतें डालती रहीं फूट

'कू: अ स्टोरी ऑफ वायलेंस एंड रेजिस्टेंस इन बोलीविया' नाम की किताब में परत-दर-परत बताया गया कि इस देश ने इतने विद्रोह क्यों झेले, और उसमें विदेशी ताकतों का कितना हाथ रहा. बोलीविया में तख्तापलट की कोशिशें इतनी आम हो गईं, कि जल्द ही इसमें आम लोग भी उतनी ही शिद्दत से शामिल होने लगे. सेना और आम जनता या सरकार और आम लोगों में फर्क घटने लगा.

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क्या कहते हैं आंकड़े 

- साल 1950 से लेकर 2019 तक यहां सरकार को गिराने की करीब 23 कोशिशें हुईं. 
- पूरी दुनिया में इस दौरान तख्तापलट के लगभग 475 प्रयास हुए. 
- अगर प्रतिशत में देखें तो अफ्रीका महाद्वीप में इस लिहाज से सबसे ज्यादा अस्थिरता रही. 
- जिन देशों में HDI कम होता है, वहां सैन्य तख्तापलट का डर ज्यादा रहता है. 
- बोलीविया में पानी को लेकर भी काफी फसाद हुआ. 2000 के दशक में पानी के निजीकरण पर खुद जनता ही सड़क पर उतर आई और सत्ता को हिला दिया. 

इस बार क्यों हुई कोशिश

आर्से की सरकार शुरू से ही संकटग्रस्त रही. इससे पहले साल 2019 में तख्तापलट के बाद वे आए, इससे उनपर भारी दबाव था. देश में महंगाई, बेरोजगारी जैसी दिक्कतें तो हैं ही, साथ ही वाम और दक्षिणपंथ दोनों ही अपनी सरकारें चाहते हैं. पिछले साल ही एक विपक्षी नेता लुइस फर्नांडो कैमाचो को अस्थिरता फैलाने के कथित आरोपों के साथ गिरफ्तार किया गया. 

कौन है वो जनरल, जिसने तख्तापलट करना चाहा

जुआन जोस जुनिगा पर आरोप है कि उनके उकसावे में आकर सेना के टैंक राष्ट्रपति आवास और राजधानी ला पाज में मुख्य सरकारी इमारतों तक पहुंच गए. ये बुधवार दोपहर की बात है. बोलिवियन टीवी में सारी घटना कैद हो गई, जब जनरल को राष्ट्रपति लुइस आर्क ने लताड़ा. उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारा कैप्टन हूं और आदेश देता हूं कि तुम सैनिकों को वापस हटा लो. इस दौरान राष्ट्रपति के समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई. यही वो मौका था, जब आर्मी जनरल को गिरफ्तार कर लिया गया. माना जा रहा है कि विद्रोह के चलते उन्हें बीस सालों की कैद हो सकती है. 

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