
लगभग हफ्तेभर पहले नाइजर के राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को सेना ने हिरासत में लेते हुए देश का कंट्रोल खुद लेने का ऐलान कर दिया. साथ ही साथ अपने बॉर्डर भी सील कर दिए ताकि कोई दूसरा देश मदद के बहाने न आ जाए. असल में यहां यूरेनियम का भंडार होने की वजह से यूरोपियन यूनियन लगातार मदद की पेशकश कर रहा है. यही कारण है कि नाइजर का मामला काफी उछला हुआ है.
आखिर तख्तापलट होते क्यों हैं?
ये तब होता है जब किसी देश की सेना उसके सुप्रीम लीडर पर भी भारी पड़ जाती है. इस समय जो उठापटक होती है, उसे सैन्य बदलाव कहते हैं. वहीं कई बार विपक्ष भी सत्ता पक्ष से ज्यादा मजबूत हो जाता है. ऐसे में भी तख्तापलट होता है, लेकिन इसमें खूनखराबा नहीं या कम होता है. दूसरी तरफ सैन्य बदलाव में सरकार और सेना के बीच लड़ाई होती है, यहां तक कि सरकार के पक्ष में खड़े आम लोगों का भी नुकसान होता है.
कहां होती हैं ये घटनाएं?
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, आमतौर पर सैन्य तख्तापलट वहीं होता है, जहां मानव विकास सूचकांक (HDI) काफी कम होता है. यानी लोग गरीबी, भुखमरी, महंगाई, अराजकता जैसी चीजें झेल रहे हों, वहां सरकार से यकीन कम होने लगता है. सेना जब ये देखती है तो अपनी ताकत बढ़ाने लगती है. वो मौजूदा सत्ता के कई लोगों को अपने पक्ष में कर लेती है और फिर विद्रोह कर देती है. इसके बाद सरकार बेबस हो जाती है. थोड़ी बहुत पुलिस या दूसरे फोर्सेज की मदद से बगावत कुचलने की कोशिश होती है लेकिन सैन्य ताकत के आगे ये कुछ नहीं.
तख्तापलट की ये कोशिश तभी नाकामयाब होती है, जब कोई दूसरा देश मदद भेज दे. जैसे कई देशों के साथ अमेरिका ये करता रहा है. वो सरकार को मदद भेजकर सैन्य बगावत कुचलने में मदद करता है. इससे तख्तापलट तो रुक जाता है, लेकिन अमेरिका का उस देश में दबदबा हो जाता है. बदले में वो सरकार से कई फेवर लेता है, ऐसे आरोप भी उसपर लगते रहे.
किस देश ने झेले सबसे ज्यादा तख्तापलट?
दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया का नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. उसके आसपास भी कोई नहीं. अगस्त 1825 में स्पेन से आजाद होने के बाद से लेकर अब तक बोलीविया ने करीब 190 तख्तापलट के प्रयास देखे. इसकी आखिरी कोशिश 2019 में हुई थी, जब मौजूदा सरकार ने हार मानते हुए खुद ही इस्तीफा दे दिया.
कोको की फसल भी एक वजह
आजादी के तीसरे ही साल से यहां अस्थिरता शुरू हो गई. इसके साथ सत्ता और सेना के बीच संघर्ष होने लगा. बाकी देशों में जहां तख्तापलट की वजह गरीबी और बेरोजगारी होती, यहां एक अलग बात थी. इस देश में कोका या कोको का उत्पादन खूब होता था. यूनाइटेड नेशन्स के अनुसार ये देश कोलंबिया और पेरू के बाद सबसे बड़ा कोका उत्पादक देश है. इसका इस्तेमाल दवाओं, इत्र से लेकर खानपान में भी होता. कोका की खेती भी फसाद की वजह थी. दूसरे देश चाहते थे कि वे यहां की जमीन लीज पर ले सकें. इसके लिए वे सत्ता-सेना के बीच फूट डालते और किसी एक पक्ष की मदद का दिखावा करते थे.
'कू: अ स्टोरी ऑफ वायलेंस एंड रेजिस्टेंस इन बोलीविया' नाम की किताब में परत-दर-परत बताया गया कि इस देश ने इतने विद्रोह क्यों झेले, और उसमें विदेशी ताकतों का कितना हाथ रहा. बोलीविया में तख्तापलट की कोशिशें इतनी आम हो गईं, कि जल्द ही इसमें आम लोग भी उतनी ही शिद्दत से शामिल होने लगे. सेना और आम जनता या सरकार और आम लोगों में फर्क घटने लगा.
क्या कहते हैं आंकड़े
- साल 1950 से लेकर 2019 तक यहां सरकार को गिराने की करीब 23 कोशिशें हुईं.
- पूरी दुनिया में इस दौरान तख्तापलट के लगभग 475 प्रयास हुए.
- अगर प्रतिशत में देखें तो अफ्रीका महाद्वीप में इस लिहाज से सबसे ज्यादा अस्थिरता रही.
- जिन देशों में HDI कम होता है, वहां सैन्य तख्तापलट का डर ज्यादा रहता है.
- बोलीविया में पानी को लेकर भी काफी फसाद हुआ. 2000 के दशक में पानी के निजीकरण पर खुद जनता ही सड़क पर उतर आई और सत्ता को हिला दिया.
- फिलहाल इस देश में चुनी हुई सरकार है.