
मुसलमानों के खिलाफ चीन में अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब वहां के युन्नान प्रांत में 14वीं शताब्दी की एक मस्जिद को तोड़ने की कोशिश हो रही है. इसके चलते वहां के मुसलमानों में काफी गुस्सा है. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें मस्जिद के सामने सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हैं. उन्हें कंट्रोल करने के लिए पुलिस बल भी वहां तैनात है.
कौन हैं हुई मुसलमान?
चीन में उइगर मुसलमानों पर हिंसा की खबरें तो आती रहीं, लेकिन इस बार निशाने पर हुई मुस्लिम हैं. चीन में दूध में पानी की तरह घुलमिल चुकी ये सुन्नी कम्युनिटी काफी अलग है. साल 2020 की जनगणना के मुताबिक वहां लगभग साढ़े 11 मिलियन हुई रहते हैं. आबादी के अनुसार वे चीन का चौथा बड़ा समुदाय हैं. चीन में मौजूद दूसरा मुस्लिम समुदाय उइगर जहां तुर्की से ताल्लुक रखता है, हुई चीन के ही मुस्लिम हैं और वहां के लोग इन्हें पूरी तरह अपना चुके.
चीन में आराम से रहते रहे
ये बात हुई मुस्लिमों के रहन-सहन में दिखती भी है. वे किसी एक प्रांत में सिमटकर रहने की बजाए लगभग पूरे देश में फैले हुए हैं. ज्यादातर मुसलमान समुदायों से अलग वे चीनियों की तरह रहते-खाते हैं. वे चीनी ही बोलते हैं और उन्हीं की तरह कपड़े भी पहनते हैं. ये अकेला ऐसा मुस्लिम समुदाय है, जिसके बारे में चीन में अलग से कोई बात नहीं होती. यहां तक कि इन्हें प्रेफर्ड मुस्लिम्स ऑफ चाइना कहा जाता रहा. हालांकि दमन की कहानी इस समुदाय के पास भी है.
लगभग 9 साल पहले बदलने लगा माहौल
साल 2009 में जब चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगरों पर हिंसा हो रही थी, हुई मुसलमान चीन के लगभग हर प्रांत में आराम से घूमफिर रहे थे. इसकी वजह ये थी कि चीन इस समुदाय को अपने से अलग नहीं मानता. हालांकि हुई मुस्लिमों का हाल साल 2014 से बदलने लगा. चीन में एक कैंपेन चला, जो इस्लाम को सिनिसाइज करने की बात करता है. यानी इस्लाम का भी चीनीकरण. कुल मिलाकर चीन चाहता है कि उनके देश में कोई भी धर्म मानने वाले बिल्कुल उनकी तरह रहें.
इस्लाम के चीनीकरण की कोशिश
अमेरिकी न्यूज मीडिया रेडियो फ्री एशिया की एक रिपोर्ट इस बारे में बात करती है. उसके मुताबिक चीनी प्रशासन ने पांच सालों का प्रोग्राम बनाया, जिसमें इस्लाम का सिनिसाइजेशन (sinicization) हो जाना चाहिए. यानी इस धर्म को मानने वाले अपनी धार्मिक पहचान को छोड़ दें, जैसे लंबी दाढ़ी रखना, अलग कपड़े पहनना, या मस्जिदों में बार-बार जाना.
मजहबी पहचान कम से कम करने पर जोर
चीन ने इसके लिए बीजिंग, शंघाई, हुनान, युन्नान समेत 8 राज्यों से मुस्लिम प्रतिनिधि बुलाए और उनसे प्लान शेयर किया. मस्जिदों में कहा गया कि वो ज्यादा से ज्यादा चीनी बातों का प्रचार-प्रसार करें, जिससे मुसलमान अपनी मजहबी पहचान में उतने कट्टर न रहें. पॉलिसी मेकर्स की इस योजना के बाद से हुई समुदाय पर भी शिकंजा कसने लगा. धार्मिक तौर पर थोड़े भी कट्टर हुए तो चीन ऐसे लोगों को बस से उतारने लगा. या बिजनेस में समस्या आने लगी.
मस्जिदों पर हो चीन की छाप!
चीन के मुस्लमों को लेकर खौफ का सबसे बड़ा उदाहरण है, मस्जिदों का भी चीनीकरण. ये आदेश जारी होने लगा कि मस्जिदों से गुंबद हटाकर उसे दोबारा बनवाया जाए ताकि वे अलग-थलग न लगें. प्रांत की सरकारें इसके लिए समय सीमा तय करने लगीं कि इतने महीनों के भीतर गुंबद हट जाएं और नक्काशियों से हरा रंग हटा दिया जाए. हाल में युन्नान प्रांत में मस्जिद के साथ भी यही किया जा रहा था, जब स्थानीय लोगों ने इमारत को घेर लिया.
कितनी मस्जिदों में हुई तोड़फोड़?
कुल कितनी मस्जिदों पर चीनी वास्तुकला का ठप्पा लग चुका, इसका कोई हिसाब नहीं, लेकिन शिनजियांग प्रांत का डेटा डराने वाला है. ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) के अनुसार, पूरे प्रांत में 533 मस्जिदें थीं. इनमें से 31 प्रतिशत से ज्यादा मस्जिदें पूरी तरह से तोड़ी जा चुकीं. लगभग 32 प्रतिशत में तोड़फोड़ हो चुकी. अब केवल 35 प्रतिशत यानी 188 मस्जिदें ही बाकी हैं, जो सही हालत में हैं.
ASPI ये भी अनुमान लगाता है कि पूरे चीन में लगभग 16 हजार मस्जिदों को तोड़ाफोड़ा जा चुका है, और 8 हजार से ज्यादा इमारतें पूरी तरह ढहाई जा चुकीं. आमतौर पर चीन का प्रशासन स्थानीय लोगों, खासकर माइनोरिटी को कोई वजह नहीं देता है कि वो ये काम क्यों कर रहा है. फिलहाल तक जितनी भी मस्जिदें ढहाई गईं, उनके बारे में कोई सफाई नहीं मिली, बल्कि एक नोटिस दे दिया जाता है. साल 2020 में मामला काफी उछला था, जब मस्जिदों को पब्लिक टॉयलेट बनाने के नाम पर तोड़ने की कोशिश हुई थी.