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'कैश के नए कुबेर' धीरज साहू का कुनबा कितना बड़ा... क्या करते हैं भाई-भतीजे

कांग्रेस सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर छापेमारी में आयकर विभाग ने 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का कैश बरामद किया है. आयकर विभाग का मानना है कि देसी शराब की नकद बिक्री से ये रकम जोड़ी गई है. धीरज साहू के परिवार में कौन-कौन हैं? साम्राज्य कितना बड़ा है? जानते हैं...

धीरज साहू के ठिकानों पर मिली नकदी को गिनने के लिए 80 लोगों की 9 टीम बनाई गई थी. धीरज साहू के ठिकानों पर मिली नकदी को गिनने के लिए 80 लोगों की 9 टीम बनाई गई थी.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 13 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:19 PM IST

कांग्रेस सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी में भर-भरकर नोटों की गड्डियां मिली हैं. कुल मिलाकर 351 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की है.

छापेमारी के दौरान आयकर विभाग को नोटों से भरी 10 अलमारियां मिली थीं. इतना कैश देखने के बाद 200 अधिकारियों की एक और टीम को बुलाया गया. इन नोटों को गिनने के लिए आयकर विभाग और बैंकों के 80 लोगों की 9 टीमें लगी हुई थीं. नोटों को गिनने में पांच दिन का वक्त लगा.

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आयकर विभाग ने ये छापेमारी 6 दिसंबर को शुरू की थी. ये छापेमारी बौद्ध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों पर हुई थी. बलदेव साहू इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड इसकी ग्रुप कंपनी है. ये कंपनी कथित तौर पर कांग्रेस सांसद धीरज साहू और उनके परिवार से जुड़ी है.

नोटों की गिनती तो पूरी हो गई है, लेकिन छापेमारी अभी भी जारी है. अब तक के इतिहास में छापेमारी में बरामद हुई सबसे बड़ी रकम बताया जा रहा है. इस स्टोरी में हम साहू परिवार का मामला तीन हिस्से में बांटकर बता रहे हैं. पहला- परिवार. दूसरा- कारोबार. और तीसरा- सियासी सफर.

पैसा...पैसा...पैसा...

आयकर विभाग ने टैक्स चोरी और 'ऑफ द बुक' ट्रांजेक्शन के आरोप में 6 दिसंबर को छापा मारा था. इस दौरान आईटी ने ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 40 से ज्यादा ठिकानों पर छापा मारा था. 

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छापेमारी के दौरान आयकर विभाग की टीम को इतना ज्यादा कैश मिला कि इन्हें गिनने के लिए और टीमों को बुलाना पड़ गया.

एसबीआई के रीजनल मैनेजर भगत बेहेरा ने न्यूज एजेंसी को बताया कि आयकर विभाग की टीम के अलावा तीन अलग-अलग बैंकों के कर्मचारियों को भी नोट गिनने के काम में लगाया गया था.

उन्होंने बताया कि नोट गिनने के लिए 40 मशीनें बुलाई गई थीं. 25 मशीनों का इस्तेमाल हुआ, जबकि 15 को बैकअप के लिए रखा गया था. 

इस छापेमारी में सिर्फ नकदी ही बरामद नहीं हुई है. बल्कि तीन किलो सोना भी जब्त किया गया है. 

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बरामद की गई इस नकदी को ले जाने के लिए 200 बैग और ट्रंक लाए गए थे. इनमें नकदी को रखकर ओडिशा के अलग-अलग बैंकों में जमा कराया जाएगा. 

ये इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी है. इससे पहले 2019 में जीएसटी इंटेलिजेंस की छापेमारी में कानपुर के एक कारोबारी के घर से 257 करोड़ रुपये कैश बरामद हुए थे. वहीं, साल 2018 में तमिलनाडु में एक रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी में आयकर विभाग ने 163 करोड़ रुपये जब्त किए थे.

इतना सारा पैसा आया कहां से?

ये सारा पैसा आया कहां से? इस पर अभी तक आयकर विभाग का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन आयकर विभाग का मानना है कि ये सारा पैसा देसी शराब की नकद बिक्री से कमाया गया है.

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दरअसल, साहू परिवार लंबे समय से देसी शराब के कारोबार से जुड़ा हुआ है. बलदेव साहू ग्रुप ऑफ कंपनीज मूल रूप से झारखंड के लोहरदगा जिले की है. कंपनी ने 40 साल पहले ओडिशा में देसी शराब बनानी शुरू की थी. 

कंपनी की बौद्ध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड की साझेदारी फर्म है. इसी कंपनी की बलदेव साहू इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड, क्वालिटी बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और किशोर प्रसाद विजय प्रसाद बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड भी है. इसमें बलदेव साहू इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड फ्लाई ऐश ईंटों का काम करती है. बाकी सभी कंपनियां शराब के कारोबार से जुड़ी हैं.

कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, साहू परिवार 125 साल से शराब के कारोबार से जुड़ा हुआ है. ओडिशा और झारखंड में ज्यादातर शराब की फैक्ट्रियां साहू परिवार की ही हैं.

सिर्फ शराब कारोबार ही नहीं, बल्कि दूसरे बिजनेस में भी साहू परिवार का दबदबा है. रांची का मशहूर सफायर इंटरनेशनल स्कूल भी साहू परिवार ही चलाता है. 

इतना ताकतवर कैसे हुआ साहू परिवार?

साहू परिवार काफी रसूखदार है. धीरज साहू के पिता राय साहब बलदेव साहू कांग्रेस के समर्थक थे. उनकी मां का नाम सुशीला देवी था.

ऐसा कहा जाता है कि 1947 में जब देश आजाद हुआ तो बलदेव साहू ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 47 लाख रुपये और 47 किलो सोना दिया था. 

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किसी जमाने में चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इनके यहां आकर रुकती थीं. देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भी इनके घर आ चुके हैं.

उनके दिवंगत पिता राय साहब बलदेव साहू ने इस पूरे कारोबार की नींव रखी थी. आज इस पूरे ग्रुप की 4 अलग-अलग कंपनियां 6 तरह के कारोबार संभालती हैं.

कंपनी का दावा है कि वो महुआ शराब को बेहतर तरीके से बाजार में पहुंचाने का काम भी करती है. इससे झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की आमदनी बढ़ी है.

साहू परिवार के पुश्तैनी घर को 'व्हाइट हाउस' कहा जाता है. ये मकान लोहरदगा में बना है. इनके यहां फिल्म स्टार्स और क्रिकेटर्स भी आते रहते हैं.

पूरा परिवार संभालता है कारोबार?

धीरज साहू का एक बेटा और एक बेटी है. बेटा हर्षित साहू ओड़िशा में शराब का कारोबार संभालता है. वहीं, बेटी हंसा साहू की शादी हो चुकी है. 

धीरज साहू के बड़े भाई शिवप्रसाद साहू रांची से कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं. शिवप्रसाद साहू का निधन हो चुका है. उनके दो बेटे- संजय साहू और राहुल साहू हैं. परिवार के कारोबार से दूर संजय साहू पांडारा और रांची में कोल्ड स्टोर और टुपुडाना में बोटलिंग प्लांट चलाते हैं. वहीं, राहुल साहू का झारखंड में शराब सिंडिकेट चलता है.

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धीरज के एक और भाई किशोर साहू का निधन भी हो चुका है. उनके दो बेटे- रोहित और रितेश हैं. रोहित रांची में सफायर इंटरनेशनल स्कूल और एक अस्पताल चलाते हैं. जबकि, रितेश साहू ओडिशा में बौद्ध डिस्टिलरी के अलावा शराब कारोबार और स्पिरिट प्लांट को संभालते हैं.

धीरज के एक और भाई नंदलाल साहू का बेटा दुर्गेश साहू भी फैमिली बिजनेस को संभालता है. इसके अलावा दुर्गेश रांची में सुशीला ऑटोमोबाइल और एक मैरिज हॉल भी संभालता है.

उनके एक और भाई उदय शंकर साहू के बेटे अमित साहू रांची के संता बेटा हॉस्पिटल को संभालते हैं. 

कारोबार ही नहीं, सियासत में भी आगे

साहू परिवार की राजनीतिक रूप से भी काफी मजबूत है. उनके पिता राय साहब बलदेव साहू पक्के कांग्रेसी थे. वो लोहरदगा जिले के यूथ कांग्रेस में शामिल रहे थे. 

साल 2009 में धीरज साहू राज्यसभा सांसद बने थे. 2010 में वो दूसरी बार राज्यसभा सांसद बने. 2018 में तीसरी बार राज्यसभा के सदस्य बने.

उनके भाई शिव प्रसाद साहू रांची से दो बार कांग्रेस के सांसद भी रहे हैं. उनके भाई गोपाल साहू ने भी 2019 में हजारीबाग लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे.

अब आगे क्या?

आयकर विभाग के मुताबिक, छापेमारी के दौरान परिवार के जो लोग वहां मौजूद थे, उन सबके बयान दर्ज कर लिए गए हैं. अब इस आधार पर साहू परिवार के लोगों को पूछताछ के लिए समन जारी किया जाएगा. 

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साल 2018 में राज्यसभा चुनाव के दौरान धीरज साहू ने जो हलफनामा दायर किया था, उसमें अपनी कुल संपत्ति 34.83 करोड़ रुपये बताई थी. इसमें उन्होंने हाथ में नकदी सिर्फ 27 लाख रुपये ही बताई थी. लेकिन छापेमारी में 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद हुई है. इतना पैसा कैसे जमा हुआ? अब ये सब जांच में ही पता चलेगा.

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