
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हो गए हैं. गुरुवार को दो घंटे पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें अरेस्ट कर लिया. सीएम केजरीवाल को दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया है.
अरविंद केजरीवाल पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें पद पर रहते हुए गिरफ्तार किया गया है. उनसे पहले इसी साल झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से पहले इस्तीफा दे दिया था.
सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी को आम आदमी पार्टी ने 'राजनीतिक साजिश' बताया है. तमाम विपक्षी पार्टियों ने भी इसे गलत ठहराया है.
बहरहाल, दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे.
आतिशी ने कहा, 'हम पहले भी कह चुके हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो केजरीवाल दिल्ली से सरकार चलाएंगे. वो जेल सरकार चला सकते हैं और कोई नियम उन्हें ऐसा करने से नहीं रोक सकता. वो दोषी नहीं ठहराए गए हैं, इसलिए वो दिल्ली के मुख्यमंत्री रहेंगे.'
इससे पहले पिछले साल नवंबर में जब ईडी ने केजरीवाल को पहला समन जारी किया था, तब भी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने उनकी गिरफ्तारी की आशंका जताई थी. उस वक्त भी पार्टी के नेताओं ने कहा था कि केजरीवाल जेल से ही सरकार चलाएंगे.
क्या ऐसा हो सकता है?
जेल से सरकार चलाना थोड़ा अतार्किक लगता है, लेकिन ऐसा कोई कानून या नियम नहीं है जो मुख्यमंत्री को ऐसा करने से रोक सके.
फिर भी केजरीवाल के लिए जेल से सरकार चलाना टेढ़ी खीर है. दरअसल, जब भी कोई कैदी आता है, तो उसे वहां का जेल मैनुअल फॉलो करना पड़ता है. जेल के अंदर सभी कैदी के सारे विशेषाधिकार खत्म हो जाते हैं, भले ही वो अंडरट्रायल कैदी ही क्यों ना हो. हालांकि, मौलिक अधिकार बने रहते हैं.
जेल में हर काम सिस्टमैटिक तरीके से होता है. जेल मैनुअल के मुताबिक, जेल में बंद हर कैदी को हफ्ते में दो बार अपने रिश्तेदार या दोस्तों से मिलने की इजाजत होती है. हर मुलाकात का समय भी आधे घंटे का होता है.
इतना ही नहीं, जेल में बंद नेता चुनाव तो लड़ सकता है, सदन की कार्यवाही में भी शामिल हो सकता है, लेकिन वहां किसी तरह की बैठक नहीं कर सकता. जनवरी में जब ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था, तो PMLA कोर्ट ने उन्हें विश्वास मत में भाग लेने की इजाजत दे दी थी.
इसके अलावा, कैदी जब तक जेल में है, उसकी कई सारी गतिविधियां कोर्ट के आदेश पर निर्भर होती हैं. कैदी अपने वकील के जरिए किसी कानूनी दस्तावेज पर तो दस्तखत कर सकता है. लेकिन किसी सरकारी दस्तावेज पर दस्तखत करने के लिए कोर्ट की मंजूरी लेनी होगी.
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तो क्या इस्तीफा देंगे केजरीवाल?
अरविंद केजरीवाल अभी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए बाध्य नहीं हैं. ये अलग बात है कि वो खुद अपनी मर्जी से इस्तीफा दे दें. और फिर कोई नया मुख्यमंत्री बने.
1951 के जनप्रतिनिधि कानून में कहीं इसका जिक्र नहीं है कि जेल जाने पर किसी मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद या विधायक को इस्तीफा देना होगा.
कानून के मुताबिक, किसी मुख्यमंत्री को तभी अयोग्य ठहराया जा सकता है, जब उन्हें किसी मामले में दोषी ठहराया गया हो. इस मामले में केजरीवाल को अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है. उन्हें अभी सिर्फ गिरफ्तार किया गया है.
हालांकि, अरविंद केजरीवाल अगर इस्तीफा नहीं देते हैं तो दिल्ली में संवैधानिक संकट खड़ा होने का खतरा है. क्योंकि उनके जेल में रहने से सरकारी कामकाज में बाधा आ सकती है.
अगर केजरीवाल इस्तीफा दे भी देते हैं, तो भी वो विधायक रहेंगे ही. क्योंकि जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक, किसी विधायक या सांसद को अयोग्य तभी ठहराया जा सकता है, जब किसी आपराधिक मामले में उसे दो साल या उससे ज्यादा की सजा हुई हो.
हालांकि, आम आदमी पार्टी के नेताओं समेत दिल्ली विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल का कहना है कि केजरीवाल इस्तीफा नहीं देंगे.
क्या पद से हटाया जा सकता है?
ऐसा भी होने की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है. मुख्यमंत्री को पद से हटाने के लिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाना जरूरी है.
लेकिन अविश्वास प्रस्ताव भी ऐसी स्थिति में लाया जाता है, जब लगे कि सरकार बहुमत खो चुकी है. मगर, दिल्ली विधानसभा की 70 में से 62 सीटें आम आदमी पार्टी के पास हैं.
फिर भी, मान लिया जाए कि केजरीवाल सरकार के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो इसका गिरना लगभग-लगभग तय है. ऐसे में केजरीवाल जब तक खुद न चाहें, उन्हें मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया जा सकता.
लेकिन केजरीवाल की गिरफ्तारी क्यों?
दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति में कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच ईडी कर रही है. इसे शराब घोटाला भी कहा जाता है.
जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने एलजी वीके सक्सेना को रिपोर्ट सौंपी थी. इसमें आबकारी नीति में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था. मामले में पहले सीबीआई ने केस दर्ज किया और फिर ईडी ने.
इस कथित शराब घोटाले में पिछले साल 26 फरवरी को दिल्ली के तत्कालीन डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया था. फिर 4 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी ईडी ने गिरफ्तार कर लिया.
पिछले साल ही 2 नवंबर को ईडी ने केजरीवाल को पहला समन भेजा था. तब से लेकर 21 मार्च तक ईडी 10 समन जारी कर चुकी है, लेकिन केजरीवाल पेश नहीं हुए.
गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी थी. गुरुवार शाम 7 बजे ईडी की टीम सीएम आवास पहुंची और दो घंटे पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
तो क्या किसी CM को गिरफ्तार किया जा सकता है?
संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत, राष्ट्रपति या राज्यपाल जब तक पद पर हैं, तब तक उन्हें न तो गिरफ्तार किया जा सकता है और न ही हिरासत में लिया जा सकता है. कोई अदालत भी उनके खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं कर सकती.
लेकिन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद या विधायक को ऐसी छूट नहीं है. कोड ऑफ सिविल प्रोसिजर की धारा 135 के तहत प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य, मुख्यमंत्री, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों को सिर्फ सिविल मामलों में गिरफ्तारी से छूट मिली है. क्रिमिनल मामलों में नहीं.
चूंकि, कथित शराब घोटाले में ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है और ये एक क्रिमिनल केस है. इसलिए सीएम केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया है.
अब आगे क्या?
गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ही अरविंद केजरीवाल के वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे. उन्होंने गिरफ्तारी को चुनौती दी है.
केजरीवाल के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार से गुरुवार रात को ही सुनवाई करने की अपील की थी. हालांकि, ऐसा हो नहीं सका.
अब शुक्रवार को केजरीवाल के वकील सुप्रीम कोर्ट के सामने मामले को मेंशन करेंगे. उसके बाद ही साफ हो पाएगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा या नहीं. अगर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करता है और केजरीवाल को राहत मिलती है तो उनकी रिहाई हो सकती है. लेकिन कोर्ट का फैसला उनके खिलाफ जाता है तो उन्हें जेल में ही रहना होगा.