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दिल्ली से गुजरात तक पकड़ा जा रहा नशा... जानें- जब्त की गई Drugs का आखिर होता क्या है?

देश में ड्रग्स का नेटवर्क बढ़ता जा रहा है. आए दिन करोड़ों रुपये की ड्रग्स जब्त होती है. दो हफ्ते में दिल्ली और गुजरात में ही 13 हजार करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी गई है. ऐसे में जानते हैं कि जब्त की गई इस ड्रग्स का आखिर क्या होता है?

हाल ही में कई राज्यों में ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ी गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर) हाल ही में कई राज्यों में ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ी गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 12:30 AM IST

दिल्ली और गुजरात पुलिस ने ज्वॉइंट ऑपरेशन में 518 किलो की कोकिन जब्त की. इसकी कीमत 5 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है. पुलिस ने ये कोकिन गुजरात के अंकलेश्वर से जब्त की है. पुलिस ने बताया कि अंकलेश्वर में एक फार्मा कंपनी के यहां छापेमारी में इस ड्रग्स को जब्त किया गया. 

न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बीते दो हफ्ते में दिल्ली और गुजरात में जांच एजेंसियों ने 1,289 किलो कोकिन और 40 किलो हाइड्रोपोनिक मैरिजुआना जब्त किया है. इसकी कीमत 13 हजार करोड़ रुपये के आसपास है.

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इससे पहले 1 अक्टूबर को दिल्ली में 562 किलो कोकिन और 40 किलो मैरिजुआना पकड़ा गया था. इसकी कीमत 5,600 करोड़ रुपये आंकी गई थी. ये दिल्ली में पकड़ी गई सबसे बड़ी खेप थी.

ड्रग्स की ये जब्ती सिर्फ दिल्ली और गुजरात जैसे बड़े राज्यों में ही सीमित नहीं है. बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, जम्मू और पंजाब समेत कई राज्यों से ड्रग्स की खेप पकड़ी जा रही हैं.

जब्त की गई ड्रग्स का क्या होता है?

हर साल हजारों करोड़ों और लाखों टन की मात्रा में ड्रग्स पकड़ी जाती है. नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के मुताबिक, 2023 में ही ड्रग्स की जब्ती के साथ-साथ 1.32 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

पर सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी जाती है, तो उसका होता क्या है? भारत ही नहीं, दुनिया के लगभग सभी मुल्कों में जब भी ड्रग्स की खेप पकड़ी जाती है, तो उसकी सैम्पलिंग होती है. उसके बाद उसे जांच के लिए भेजा जाता है. सबकुछ हो जाने के बाद जब्त किए गए ड्रग्स को डिस्पोज यानी नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू होती है.

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कौन लेता है ड्रग्स डिस्पोज करने का फैसला?

इसके लिए रेवेन्यू डिपार्टमेंट की एक बकायदा गाइडलान है. हर राज्य में एक या उससे ज्यादा ड्रग डिस्पोजल कमेटी होती है, जो ड्रग्स को डिस्पोज करने पर फैसला लेती है. लेकिन इसकी भी शक्तियां सीमित होती हैं. 

ड्रग डिस्पोजल कमेटी एक तय मात्रा तक ही डिस्पोज करने पर फैसला ले सकती है. अगर उस तय मात्रा से ज्यादा ड्रग्स पकड़ी जाती है तो उसको डिस्पोज करने का फैसला हाई लेवल कमेटी लेती है. 5 किलो हेरोइन, 100 किलो चरस, 1000 किलो गांजा और 2 किलो कोकिन तक के डिस्पोजल का फैसला कमेटी ले सकती है.

अगर तय मात्रा से ज्यादा ड्रग्स है, तो उसके डिस्पोजल की सिफारिश ड्रग डिस्पोजल कमेटी एक हाई लेवल कमेटी को भेजेगी और वो आखिरी फैसला लेगी.

कैसे किया जाता है ड्रग्स का डिस्पोजल?

अलग-अलग प्रकार के ड्रग्स को डिस्पोज करने का तरीका भी अलग-अलग है. गाइडलाइन के मुताबिक, अगर अफीम, मॉर्फिन, कोडीन और थिबनीन है तो उसे सरकारी फैक्ट्रियों को नीलाम कर दिया जाता है. 

इसी तरह अगर कोई ड्रग मेडिकल या इंडस्ट्रियल यूज के लिए है तो उसे बेच दिया जाता है या नीलाम कर दिया जाता है. 

इसके अलावा, अगर कोई ऐसा ड्रग है जिसका न तो मेडिकल यूज है और न ही इंडस्ट्रियल और वो सिर्फ नशे के लिए इस्तेमाल होता है, तो उसे जलाकर डिस्पोज कर दिया जाता है. ड्रग्स को जलाकर डिस्पोज करते समय कई सारे सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाता है.

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ड्रग्स बेचने या रखने पर कितनी सजा?

हमारे देश में ड्रग्स अपने पास रखना, खरीदना, बेचना या उसका सेवन करना अपराध है. ऐसा करने पर 1985 के नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS) के तहत कार्रवाई होगी. हालांकि, सजा कितनी होगी, ये ड्रग्स की मात्रा पर निर्भर करता है. 

अगर आपके पास स्मॉल क्वांटीटी में ड्रग्स है तो एक साल की जेल या 10 हजार का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. अगर स्मॉल क्वांटीटी से ज्यादा लेकिन कमर्शियल क्वांटीटी से कम ड्रग्स पाया जाता है तो 10 साल की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है. वहीं, अगर कमर्शियल क्वांटीटी से ज्यादा ड्रग्स बरामद होता है तो 10 से 20 साल तक की कैद और दो लाख रुपये तक का जुर्माना लिया जाएगा.

अब स्मॉल क्वांटीटी और कमर्शियल क्वांटीटी हर ड्रग्स की अलग-अलग होती है. केंद्र सरकार ने 239 ड्रग्स को प्रतिबंधित लिस्ट में डाला है. सरकार के मुताबिक, एसिटोर्फाइन (Acetorphine) ड्रग्स की स्मॉल क्वांटीटी 2 ग्राम है, लेकिन मात्रा 50 ग्राम है तो ये कमर्शियल क्वांटीटी मानी जाएगी. इसी तरह एक किलो गांजे तक को स्मॉल और 20 किलो से ज्यादा को कमर्शियल क्वांटीटी में गिना जाता है.

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