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लगभग 60 लाख की आबादी वाले देश अल साल्वाडोर ने क्यों बनाई दुनिया की सबसे बड़ी जेल, अमेरिका भी भेज रहा अपने कैदी

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन बगैर दस्तावेज के रहते लोगों को वापस उनके देश डिपोर्ट कर रहा है. साथ ही कई क्रिमिनल्स को अल-साल्वाडोर की एक जेल में भेजा जा रहा है. आतंकवादियों के लिए बनी इस जेल को दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक जेलों में रखा जाता रहा. अल साल्वाडोर एक छोटा-सा देश है, तो उसे इतने बड़े कैदखाने की जरूरत क्यों पड़ी? और अमेरिका अपने कैदी वहां क्यों भेज रहा है?

अल साल्वाडोर ने डोमेस्टिक क्राइम पर लगाम के लिए मेगा जेल बना रखी है. (Photo- Reuters) अल साल्वाडोर ने डोमेस्टिक क्राइम पर लगाम के लिए मेगा जेल बना रखी है. (Photo- Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 3:43 PM IST

कुछ हफ्तों पहले डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों को निकाल-बाहर करना शुरू किया. साथ ही बहुत से लोग अल सल्वाडोर की जेल में भी भेजे जाने लगे. हाल में अमेरिकी सरकार ने स्वीकारा कि उन्होंने प्रशासनिक भूल में भी एक शख्स को कुख्यात जेल में भेज दिया. इसके बाद से ही साल्वाडोर के कैदखाने पर चर्चा हो रही है. हाई सिक्योरिटी टैररिस्ट प्रिजन में जो एक बार गया, उसके बाहर आने की गुंजाइश कम ही रहती है. संयुक्त राष्ट्र इसे ह्यूमन राइट्स का नर्क भी कह चुका. 

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साल्वाडोर कैसा देश है

मध्य अमेरिकी देश को दुनिया के सबसे हिंसक मुल्कों में गिना जाता रहा. नब्बे के दशक में यहां क्राइम और खासकर गैंग कल्चर इतना बढ़ा कि सरकार तक लाचार थी. दो बड़े गैंग थे, जो पूरे साल्वाडोर को चला रहे थे. सड़कों पर हत्याएं और लूटपाट आम थी. हालात का अंदाजा इसी से लगा लीजिए कि कुछ साल पहले यहां हत्या की दर सबसे ज्यादा थी, जबकि देश खुद काफी छोटा है. यहां रोज औसतन 18 लोग मारे जाते थे. ये गैंग से जुड़े नहीं, बल्कि आम लोग भी हो सकते थे, जो गलती से घटनास्थल पर मौजूद थे. 

कुछ साल पहले बदला माहौल

देश की सुरक्षा एजेंसियां भी इसके सामने बेबस थीं लेकिन कोई कुछ कर नहीं पा रहा था. साल 2019 में एक नायिब बुकेले की सरकार आई. राष्ट्रपति बनने से पहले ही उन्होंने अपराध को खत्म करने का वादा किया था. आते ही वे इस काम में लग गए. साल 2022 में जब गैंग्स ज्यादा आक्रामक हुए तो बुकेले ने तुरत-फुरत इमरजेंसी लगा दी. इसके तहत पुलिस और सेना को बिना किसी वारंट के लोगों को गिरफ्तार करने की छूट मिल गई. कुछ ही वक्त में 70 से 80 हजार लोग अरेस्ट हो गए. 

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अब सरकार के सामने एक नई समस्या खड़ी हुई कि इतने कैदियों को कहां रखा जाए. गैंग कल्चर की वजह से जेलें पहले से ही भरी हुई थीं. इसी कारण, बुकेले ने एक नई जेल बनाने का फैसला किया, जिसका नाम रखा गया- सेंटर फॉर टैररिज्म कनफाइनमेंट (CECOT).

सीएनएन ने इसपर एक रिपोर्ट की, जिसमें बताया गया कि जेल कैसी है और कैदी किन हालात में रखे जाते हैं. लगभग 40000 कैदियों की क्षमता वाली जेल को रिपोर्ट में बदतर में भी सबसे बदतर बताया गया है. कैदियों के लिए यहां कोई बिस्तर नहीं, बल्कि मेटल के बंक बेड्स होते हैं. मौसम चाहे कितना ठंडा हो, उन्हें बिना कंबल के वहीं सोना होता है. सेल में चौबीसों घंटे रोशनी होती है.

साल्वाडोर की जेल में चूंकि खूंखार आतंकी और क्रिमिनल रखे जाते हैं, लिहाजा सुरक्षा के लिए उनसे कोई काम भी नहीं करवाया जाता. लोगों को केवल आधे घंटे के लिए बाहर निकाला जाता है, जहां वे बाइबल पढ़ते हैं या कोई फिजिकल एक्टिविटी करते हैं. उनसे मिलने-जुलने कोई नहीं आ सकता. 

डोमेस्टिक अपराधों के खिलाफ बुकेले का ये बड़ा हमला था. देश में अपराध काफी कम हो भी चुके. हालांकि इस जेल के चलते राष्ट्रपति की आलोचना भी होने लगी. गैंग से जुड़े लोगों को पकड़ने के दौरान सरकार आम लोगों को कैद में डालने लगी. कई लोग बिना सबूत भीतर गए और बाहर नहीं निकल सके. चूंकि दो बड़ी गैंग्स के लोग टैटू बनवाते थे, लिहाजा टैटू बनाए हुए सारे लोगों को पकड़ा जाने लगा. माना जाता है कि गिरफ्तार हुए लोगों में हजारों निर्दोष हो सकते हैं.  लेकिन सरकार ने किसी भी आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम उठाना जरूरी था.

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सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, साल्वाडोर के लीडर बुकेले ने अमेरिका को ये प्रस्ताव दिया कि उनकी जेल को वे अपने कैदियों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. आइडिया ट्रंप को पसंद आया. एक करार हुआ, जिसमें अमेरिकी सरकार साल्वाडोर को 6 मिलियन डॉलर देगी. ये रकम इस खर्चीली जेल को चलाए रखने में मदद करेगी.

इसके बाद से ही अमेरिका घुसपैठियों से लेकर गैंग्स से जुड़े अपराधियों को वहां भेज रहा है. लेकिन साल्वाडोर ही नहीं, यूएस कई और देशों से भी ऐसे समझौते कर सकता है. खासकर अफ्रीकी देश. यहां उन देशों के अवैध प्रवासी भेजे जाएंगे, जिसके मूल देश अपने ही नागरिकों को वापस लेने से मना कर चुके. 

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