
टीएमसी सांसद महुआ ने कैश के बदले संसद में सवाल पूछने के आरोपों का जवाब कल एथिक्स कमेटी में दिया. उनका कहना है कि निजी रिश्ते खराब होने की वजह से लोग उनपर ऐसे आरोप लगा रहे हैं. यहां तक कि पलटवार करते हुए महुआ ने ये तक कह दिया कि एथिक्स कमेटी उनसे गंदे और बहुत पर्सनल सवाल कर रही थी, जिसके बाद वे बाहर निकल आईं. सवालों के बाद उन्होंने लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर कमेटी पर काफी सारे आरोप भी लगा दिए.
कब बनी थी एथिक्स कमेटी?
ये मार्च 1997 में राज्यसभा के चेयरमैन ने बनाई थी ताकि सदस्यों के नैतिक व्यवहार पर नजर रखी जा सके. अगर किसी सदस्य पर अनैतिक या किसी तरह के मिसकंडक्ट का आरोप लगता है तो कमेटी उसे परखती है. यानी ये एक तरह से कैरेक्टर एसेसमेंट का काम करती है.
लोकसभा में ये कमेटी काफी देखभाल कर बनाई गई. एक स्टडी ग्रुप अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया गया, जहां एथिक्स यानी नैतिकता को लेकर संसद के तौर-तरीके देखे. लौटकर उन्होंने लोकसभा के लिए भी कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन ये साल 2000 में हो सका. हालांकि कमेटी तब भी बाहर-बाहर से एक्टिव रही. साल 2015 में इसे संसद का परमानेंट हिस्सा माना गया.
कैसे होता है सदस्यों का चुनाव?
एथिक्स कमेटी के सदस्यों को स्पीकर खुद चुनते हैं. वे एक साल तक काम करते हैं. फिलहाल इसके लीडर बीजेपी के कौशांबी सांसद विनोद कुमार सोनकर हैं. उनके अलावा 14 दूसरे सदस्य हैं जो सभी पार्टियों से लिए गए हैं. इसमें कांग्रेस, बीजेपी, सीपीआई (एम), जेडीयू और बीएसपी ने नेता शामिल हैं.
कौन कर सकता है शिकायत?
एथिक्स कमेटी को लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है. कोई भी व्यक्ति चाहे तो किसी सांसद के खिलाफ शिकायत कर सकता है, लेकिन ये शिकायत लोकसभा एमपी के जरिए जाएगी. साथ में सारे सबूत भी होने चाहिए कि कब-कब अनैतिक व्यवहार हुआ है. इसके अलावा एक एफिडेविट भी जमा करना होगा. अगर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य खुद शिकायत करता है तो एफिडेविट की जरूरत नहीं.
कब शिकायत नहीं ली जाती?
अगर मीडिया में कोई खबर आ जाए कि किसी लीडर ने कुछ गलत किया है, तो उसे शिकायत का आधार नहीं माना जाता. किसी भी शिकायत को पूरी तरह लेने से पहले एथिक्स कमेटी उसकी शुरुआती जांच करती है. आगे सारी तहकीकात के बाद वो अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपती है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाती है. इसपर आधे घंटे की बहस का भी नियम है.
क्या आरोप लगे हैं महुआ मोइत्रा पर?
तृणमूल सांसद वैसे तो कई बातों को लेकर सवालों के घेरे में हैं, लेकिन सबसे बड़ा आरोप ये है कि उन्होंने कैश और तोहफों के बदले लोकसभा मेलआईडी का एक्सेस किसी और को दे दिया. ये एक तरह से संसद के खिलाफ और उसकी सुरक्षा में सेंध की तरह देखा जा रहा है. कथित तौर पर दुबई में बैठे कारोबारी मित्र ने इससे लॉगइन किया और महुआ की ओट में सवाल पूछे थे. ये संसद सदस्यों का समय बर्बाद करने जैसा भी है.
किन सवालों पर भड़कीं महुआ?
विपक्ष के सांसदों ने आरोप लगाया कि कमेटी के चीफ विनोद कुमार सोनकर तृणमूल नेता से काफी निजी सवाल पूछ रहे थे. कथित तौर पर उनसे पूछा गया कि आपने इस साल दर्शन हीरानंदानी से कितनी बार संपर्क किया? आप कितनी बार दुबई गईं? आप किस होटल में ठहरी थीं? इसके अलावा उनसे कॉल और फोन रिकॉर्ड पर भी सवाल किए गए, जिससे महुआ नाराज हो गईं. वहां से लौटकर उन्होंने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखते हुए कमेटी के सवालों की तुलना 'चीरहरण' तक से कर दी.
आगे क्या हो सकता है?
कमेटी ने बातचीत कर ली है और सबूत भी जमा कर रही है. 2 नबंवर को हुई बातचीत के बाद कमेटी देखेगी कि क्या इसमें और भी तहकीकात की जरूरत है. ये प्रोसेस कई महीनों तक भी चल सकता है. अगर कमेटी मानती है कि महुआ मोइत्रा का व्यवहार अनैतिक रहा तो वो इस आशय की रिपोर्ट स्पीकर को सौंप देगी. इसके बाद रिकमंडेशन लोअर हाउस के पास जाएंगे, यहां बहस के बाद ही कोई फैसला होगा.