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क्या यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रज्वल रेवन्ना को जर्मनी से भारत लाया जा सकता है, कब हो सकता है इनकार?

कर्नाटक के सांसद और जेडीएस उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना पर यौन उत्पीड़न, हजारों सेक्स वीडियो रिकॉर्ड करने और धमकाने के आरोप हैं. इस बीच रेवन्ना के जर्मनी भाग जाने की बात कही जा रही है. जानिए, क्या जर्मनी और भारत के बीच अपराधियों की अदला-बदली पर कोई एग्रीमेंट है? अगर हां, तो ये कितना आसान या मुश्किल है?

जेडीएस उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना फरार बताए जा रहे हैं. (Photo- PTI) जेडीएस उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना फरार बताए जा रहे हैं. (Photo- PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2024,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

अश्लील सीडी मामले के आरोपी प्रज्वल रेवन्ना को जेडीएस पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया. रेवन्ना के 3 हजार से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो वायरल हैं. इस बीच आरोपी देश छोड़कर जर्मनी भाग चुका. परिवार का कहना है कि रेवन्ना पहले से ही वहां जाने के इरादे में था, और इन आरोपों से उसका कोई लेनादेना नहीं. ये मुद्दा उठ रहा है कि अपराधी जुर्म के बाद अक्सर विदेशों में पनाह क्यों लेते हैं? क्या इसके बाद उन्हें पकड़ने के रास्ते घट जाते हैं?

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रेवन्ना को लौटाने की मांग

इस मामले में जर्मनी दूतावास ने कोई भी कमेंट करने से इनकार कर दिया. जर्मन दूतावास के चीफ जॉर्ज एन्जवेलर का कहना है कि उन्होंने खबरों में इस बारे में पढ़ा लेकिन अभी इस मामले की पूरी जानकारी नहीं. इधर कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां रेवन्ना को जर्मनी से वापस बुलाए जाने की मांग कर रही हैं. कांग्रेस नेता अल्का लांबा ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री एक्सटर्नल अफेयर्स को प्रत्यर्पण के लिए लिखें ताकि फरार आरोपी जल्द लौटाया जा सके. 

क्यों भागते हैं विदेश

जुर्म करके बाहर भागना एक तरह से 'समय लेने' जैसा है. इस दौरान अपराधी अपने बच निकलने के रास्ते खोज लेता है. ये पहले भी कई बार देखा जा चुका. बीते साल खालिस्तानी चरमपंथी अमृतपाल के गायब होने पर भी यही अंदेशा जताया जा रहा था कि वो किसी और देश भाग गया होगा, लेकिन बाद में वो देश के भीतर ही पाया गया. आर्थिक मामलों के कई बड़े क्रिमिनल हैं, जो विदेशी मेहमान बने हुए हैं. 

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भगोड़े अपराधी कैसे पकड़ में आते हैं? 

इसके लिए काम आती है एक्स्ट्राडिशन ट्रीटी या प्रत्यर्पण संधि. प्रत्यर्पण का मतलब है वापस लौटाना. आसान तरीके से समझें तो अगर हमारे पास दूसरे की कोई चीज गलती से आ जाए, तो मांगने पर हमें उसे लौटाना होता है. यही प्रत्यर्पण है. इंटरनेशनल स्तर पर .अपराधियों के मामले में ये संधि की गई. इसके तहत दो देशों के बीच ये करार होता है कि अगर उनका कोई अपराधी दूसरे देश पहुंच जाए, तो उसे वापस लौटाया जाएगा. जैसे भारत से कोई ब्रिटेन चला जाए, या इसका उलट हो, तो वे क्रिमिनल को अपने यहां पनाह न देकर वापस भेज दें. 

क्या जर्मनी के साथ हमारा कोई एग्रीमेंट है

भारत के साथ इस देश ने साल 2001 में करार किया. तीन साल पहले ही प्रज्वल की तरह ही एक जर्मन आरोपी हमारे यहां आ गया था. वो बाल यौन शोषण और पोर्न फिल्में बनाने का आरोपी था. उसे लेकर जर्मन सरकार ने रिक्वेस्टिंग स्टेट बनकर एक फॉर्मल चिट्ठी भारत के विदेश मंत्रालय को भेजी. इसी बीच पता लगा कि आरोपी कर्नाटक में एक नियम तोड़ने के आरोप में पहले से ही ट्रायल में फंस चुका है. पिछले साल उसे एक्स्ट्राडिशन एक्ट के तहत जर्मनी वापस भेजने की मंजूरी मिल गई. 

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क्या कहता है दोनों देशों के बीच करार

भारत और जर्मनी में प्रत्यर्पण संधि की पहली शर्त है कि जिस अपराध के लिए आरोपी को बुलाया जा रहा हो, वो दोनों ही देशों में क्राइम की श्रेणी में आता हो, साथ ही उसपर कम से कम एक साल की सजा हो सकती हो. यानी जुर्म छोटी-मोटी चोरी जैसा मामूली न हो. 

कब मिल सकती है नामंजूरी

- अगर देश को लगे कि उसके देश में पनाह लिए आरोपी को राजनैतिक वजहों से तंग किया जा रहा है, तो वो उसे वापस भेजने पर हील-हुज्जत भी कर सकती है.

- प्रत्यर्पण संधि का आर्टिकल 5 कहता है कि देश किसी ऐसे आरोपी को भी लौटाने से मना कर सकता है जिसकी उम्र काफी कम हो. 

- अगर पनाह दे चुके देश को प्रत्यर्पण के लिए भेजी गई रिक्वेस्ट स्पष्ट न हो, आरोप साफ न हों, तब भी वो आरोपी को वापस नहीं भेजती. 

- एक्सट्राडिशन का आर्टिकल 12 कहता है कि मांग लिखित हो और डिप्लोमेटिक चैनल के जरिए हो वरना उसपर कोई कार्रवाई नहीं होगी. 

- अगर किसी पर लगा आरोप गंभीर हो, तो अर्जेंट एक्शन लेते हुए देश खुद उसे अपनी जेल में प्रोविजनल कस्टडी में रख सकते हैं. 

- भारत और जर्मनी के करार में एक दिक्कत ये भी है कि जर्मनी में मौत की सजा खत्म हो चुकी, जबकि भारत में ये अब भी है. ऐसे में जर्मनी चाहे तो फांसी की सजा पाए दोषी को भी वापस भेजने से इनकार कर सकता है. 

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- ह्यूमन राइट्स के हनन का हवाला देते हुए भी दूसरा देश अपराधी को हमें लौटाने से मना कर सकता है. 

अपराधी भी दे देते हैं चुनौती

क्रिमिनल होस्ट देश के कोर्ट में मामले को चुनौती दे देता है. अक्सर वे यह दलील देते हैं कि अपने देश की जेल में जान का खतरा है. या फिर वे वापस लौटने के रास्ते में ही मार दिए जाएंगे. कई बार अपराधी ये तक कह देते हैं कि अपने देश का मौसम उनकी मौजूदा सेहत के लिए सही नहीं. इस तरह से समय बीतता जाता है. अपराधी जहां से जुर्म करके भागा हैं, वहां की सरकारें बदलने का भी इसपर फर्क पड़ता है कि वो प्रत्यर्पण कितने समय बाद हो सकेगा, या फिर हो भी सकेगा, या नहीं.

क्यों देश किसी अपराधी को पनाह देता है 

इसमें उनका सीधा-सीधा फायदा होता है. अगर अपराधी बहुत ज्यादा पैसों का गबन करके भागा हो तो जाहिर है कि उसके पास काफी पैसे होंगे. वो किसी न किसी तरह से मेजबान देश को भरोसा दिला देता है कि वो उनके यहां इनवेस्ट करेगा. इससे भी देश कुछ समय के लिए अपराधी को सेफ ठिकाना दिए रहते हैं.

किनके साथ है हमारी संधि 

मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स की आधिकारिक साइट के मुताबिक भारत की 48 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि है. इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, और रूस जैसे बड़े देश भी शामिल हैं. वहीं 12 देशों के साथ हमारा एक्स्ट्राडिशन अरेंजमेंट है. इन दोनों में मोटा फर्क वही है, जो लिखित और कहे हुए वादे में होता है. अरेंजमेंट में केस थोड़ा हल्का हो जाता है. देश चाहें तो रिक्वेस्ट पर एकदम चुप्पी साध सकते हैं.

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