
विरोध करने पर अपनी ही जनता का दमन करने में चीन का रवैया किसी तानाशाह के कम नहीं. फिलहाल इस देश में सरकार की बेहद सख्त कोविड नीति पर आंदोलन हो रहा है, जिसे सरकारी सैनिक कुचलने की पूरी कोशिश में हैं. इस बीच लगातार उइगर मुस्लिमों की चर्चा हो रही है. वैसे सिर्फ मुसलमान ही नहीं, एक और समुदाय भी है, जिसने लंबे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की इतनी ज्यादतियां झेलीं कि अब लगभग खत्म हो चुका है. हम बात कर रहे हैं, फालुन गोंग कम्युनिटी की. नब्बे के दशक में आए इस समुदाय को वहां की सरकार ने शैतानी समुदाय कह दिया, जो लोगों को खुदकुशी के लिए उकसाता.
क्या है फालुन गोंग कम्युनिटी
इसकी शुरुआत नब्बे के शुरुआती समय में हुई. तब चीन में तेजी से बदलाव हो रहे थे. कारखाने बनने लगे थे. सिंगल चाइल्ड पॉलिसी से परिवार छोटे होने लगे. इसी दौर में बढ़ते अकेलेपन को दूर करने के लिए कई तरह की नई प्रैक्टिस शुरू हुई, लेकिन फालुन गोंग इसमें सबसे अलग थी.
इन्होंने की शुरुआत
आध्यात्म को मानने वाले शख्स ली होगंजी ने इसकी शुरुआत करते हुए कहा कि ये चीन के ही पुराने कल्चर क्विगॉन्ग के जैसी है. इसमें खास तरीके से बैठकर या खड़े होकर ध्यान किया जाता है. दावा था कि इससे शरीर के साथ-साथ मन की बीमारियां भी दूर होती हैं.
अकेलापन झेल रहे चीनी परिवार जुड़ने लगे
जल्द ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के सपोर्टर भी फालुन गोंग के सदस्य बन गए. अगले 7 सालों के अंदर ये समुदाय चीन में सबसे ज्यादा अनुयायियों की बिरादरी बन गई. साल 1998 में वहां की स्टेट स्पोर्ट्स कमीशन का अनुमान था कि अकेले चीन में ही 70 मिलियन से ज्यादा लोग ये नई प्रैक्टिस कर रहे हैं. शंघाई टीवी, जो उस दौर में सरकारी चैनल माना जाता था, उसके मुताबिक ये आंकड़ा 100 मिलियन से भी ऊपर था. यानी 1.3 बिलियन वाले देश (उस समय) में हर 13 में से 1 आदमी फालुन गोंग से था.
कम्युनिस्ट पार्टी को अपने खत्म होने का डर सताने लगे
ये डेटा चीनी सरकार को डराने के लिए काफी था. वो परेशान हो गई कि मेडिटेट करने-कराने से शुरू ये समुदाय कहीं किसी पार्टी का रूप न ले ले. वैसे भी गोंग को मानने वाले लोग खुद को कम्युनिस्ट पार्टी से अलग मानते थे. बता दें कि चीन में किसी भी चर्च, मंदिर या मस्जिद को चलाने के लिए पार्टी की इजाजत जरूरी है. गोंग समुदाय भी इसी नियम के साथ शुरू हुआ था.
आत्महत्या करने वालों की तरह दिखाया गया
पहले खुद भी फालुन गोंग की तारीफ करती कम्युनिस्ट पार्टी ने अब इसका विरोध शुरू कर दिया. बेहद शांतिपसंद समुदाय के बारे में कहा जाने लगा कि ये शैतान से प्रेरित है. जो इससे जुड़ेगा, वो कहीं न कहीं आत्महत्या के बारे में सोचने लगेगा. इससे चीन की आबादी कम होती चली जाएगी और वो कमजोर देश बन जाएगा. वैसे सरकारी मीडिया के पास खुदकुशी वाले कॉन्सेप्ट का कोई प्रमाण नहीं था. तब विदेशी मीडिया और संस्थाओं ने चीन आकर जांच करने की परमिशन मांगी, लेकिन उन्हें भी अंदर नहीं आने दिया गया.
राष्ट्रपति ने संभाली कैंपेन की कमान
तत्कालीन राष्ट्रपति जिआंग जेमिन ने खुद इसके खिलाफ सारे कैंपेन को प्लान और लॉन्च किया. सिर्फ इसी काम के लिए एक खास ऑफिस बना, जिसे नाम मिला 610 ऑफिस. इसका काम गोंग समर्थकों को चुप कराना था. इसमें हजारों अफसरों की नियुक्ति हुई, जो सिर्फ प्लानिंग करते. इससे कहीं ज्यादा लोग निगरानी रखने का काम करते.
मामूली कैंपेन नहीं, बल्कि शारीरिक-मानसिक टॉर्चर की शुरुआत
अनुयायियों को डिटेंशन कैंपों में भेजा जाने लगा. इसे कैंप की जगह 'री-एजुकेशन थ्रू लेबर' नाम दिया गया. यहीं से बदलाव के नाम पर हिंसा का नया चैप्टर शुरू हुआ. ह्यूमन राइट्स वॉच समेत कई संस्थाओं का कहना है कि कैंप में लोगों को बिजली के झटके दिए जाते. भूखा-प्यासा रखा जाता और भी कई तरह की हिंसा होती, जब तक कि वे फालुन गोंग से पूरी तरह किनारा न कर लें.
हिंसा के लिए चीन अक्सर बड़े-बड़े शब्द तैयार करता है
फालुन गोंग समुदाय की सोच बदलने के लिए एक टर्म बना- प्रोसेस ऑफ आइडियोलॉजिकल प्रोग्रामिंग. इसके तहत गोंग्स को तब तक टॉर्चर किया जाता, जब तक कि पूरी तरह से टूट न जाएं. पहले ऐसे मामले हुए, जब वादा करके कैंपों से निकले लोगों ने चीनी सरकार की बर्बरता के बारे में कह दिया था. तो अब सरकार ज्यादा संभलकर काम करने लगी.
गोंग्स से कुछ कागजों पर दस्तखत करवाया जाता, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी के लिए उनकी वफादारी की शपथ होती. कागजों पर परिवार का भी पूरा जिक्र होता. इससे होता ये था कि कैंप से निकलने के बाद भी लोग परिवार के मोह में सरकार से विद्रोह नहीं कर पाते थे.
सबसे ज्यादा बात हुई ऑर्गन हार्वेस्टिंग पर
चीन पर स्टडी कर चुके अमेरिकी लेखक इथन गुटमन के अनुसार साल 2000 से लेकर अगले 8 सालों में 65 हजार से भी ज्यादा फालुन गोंग मानने वालों का ऑर्गन निकालकर उन्हें गायब कर दिया गया.
कथित तौर पर कैदियों के अंग निकालकर ब्लैक मार्केट में हो रही सप्लाई
यूनाइटेड नेशन्स स्पेशल रिपोर्ट्योर ने भी जबरन ऑर्गन निकालने की बात में सच्चाई मानते हुए पूछा कि साल 2000 के बाद से चीन में ऑर्गन ट्रांसप्लांट में एकदम से तेजी कैसे आई. संदेह है कि गोंग समुदाय के शरीर से किडनी, लिवर निकालकर इंटरनेशनल ब्लैक मार्केट में बेचे जाने लगे. इंटरनेशनल कोएलिशन टू एंड ट्रांसप्लांट एब्यूज इन चाइना भी चीन पर ऑर्गन हार्वेस्टिम का आरोप लगा चुका है. याद दिला दें कि उइगर मुस्लिमों के बारे में भी कहा जा रहा है कि कैंप में रखकर जबरन उनके ऑर्गन निकाले जा रहे हैं.
हर साल 50 हजार कैदियों से जबर्दस्ती
अमेरिकी जर्नल ऑफ ट्रांसप्लांटेशन ने इसी अप्रैल 22 में एक स्टडी के हवाले से कहा कि चीन में राजनैतिक खतरा माने जाने वालों को कैद करके उनके अंग निकालना आम बात है. अनुमान के मुताबिक, हर साल लगभग 50 हजार कैदियों को ऑर्गन निकालकर मरने के लिए छोड़ दिया जाता है.
वैसे अब तक चीन में गोंग समुदाय पर खतरा है. चीन में अपना इंटरनेट, अपना सोशल मीडिया है. वहां इस कम्युनिटी पर कोई जानकारी नहीं मिलती. अगर कोई जानने की कोशिश करे तो पार्टी तुरंत एक्टिव हो जाती है और निगरानी शुरू हो जाती है.