
अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने शपथ लेने जा रहे हैं. पहले कार्यकाल की तरह ही वे अपने निजी घर से वाइट हाउस शिफ्ट हो जाएंगे. यहीं पर उनका दफ्तर ओपल ऑफिस भी होगा, जहां बैठकर राष्ट्रपति सारे फैसले करते हैं. ट्रंप के वादों की प्लेट में पहले ही दिन से काफी कुछ करने को है. इसमें कई ऐसे वादे भी हैं, जिन्हें पूरा करना अकेले ट्रंप के बस में नहीं. जानिए, डे वन पर वे क्या कर सकते हैं और क्या नहीं.
अमेरिकी राष्ट्रपति बतौर कई सारी औपचारिकताएं हैं, जो ट्रंप को पूरी करनी होंगी.
इस दिन की शुरुआत शपथ लेने से होती है. देश के मुख्य न्यायाधीश उन्हें कैपिटल हिल के पास शपथ दिलवाएंगे. इसके बाद इनॉगरल एड्रेस होता है. ये वो भाषण है जिसमें राष्ट्रपति अपने आने वाले कामों का ड्राफ्ट देंगे.
कैपिटल हिल से निकलकर वे पहले एक औपचारिक लंच लेंगे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज समेत सारे बड़े अधिकारी होंगे. भोज में दोपहर लगभग बीत चुकी होती है. इसी समय कैपिटल हिल से लेकर वाइट हाउस तक परेड होती है, ताकि जनता अपने चुने हुए लीडर को देख सके.
परेड के साथ ही ट्रंप वाइट हाउस पहुंचेंगे. वे अपने पहले कार्यकाल में भी यहां रह चुके हैं. ये जगह उनकी परिचित है लेकिन उनके आने से कुछ ही घंटों पहले बाइडेन इसे खाली करेंगे, और उतनी ही देर में इसे नए लीडर के मुताबिक तैयार किया जाएगा. ट्रंप यहां का मुआयना करेंगे और फिर ओपल ऑफिस जा सकते हैं, जो कि उनका दफ्तर होगा.
लगभग दो घंटों में लेने होंगे फैसले
इस सब में शाम हो जाती है, अब बचे हैं डेढ़ से दो घंटे. इसके बाद डिनर प्रोग्राम भी होता है. तो इन्हीं दो घंटों में ट्रंप को बहुत कुछ करना है. ओपल ऑफिस में पहले दिन प्रेसिडेंट वे सारे फैसले लेता है, जो उसकी प्रायोरिटी लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. जैसे अभी की ही बात करें तो जो बाइडेन ने डे वन पर 17 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर दिए थे. वहीं ट्रंप ने केवल 1 ही ऑर्डर पास किया था. हां, लेकिन इसके अलावा उन्होंने एडमिनिस्ट्रेशन पर काफी सारे फैसले लिए. वहीं बाइडेन के ज्यादातर कामों में, पूर्व प्रेसिडेंट यानी ट्रंप के निर्णयों को पलटना शामिल था. ये सब कुछ एग्जीक्यूटिव आदेश के तहत किया गया.
क्या है एग्जीक्यूटिव ऑर्डर
यह वो ताकत है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति बिना कैबिनेट की मंजूरी के जारी कर सकता है. ये संविधान और फेडरल लॉ पर काम करता है. हालांकि, राष्ट्रपति एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए सारे फैसले नहीं ले सकता, बल्कि इसकी सीमा होती है. ऐसे ऑर्डर केवल उन्हीं मामलों पर लागू हो सकते हैं, जिसपर संविधान में पहले से कोई बात हो. अगर आदेश किसी कानून के खिलाफ जाए, तो कांग्रेस इसे चुनौती दे सकती है. वहीं बड़े फैसले जैसे बजट या फॉरेन पॉलिसी जैसी बातें भी अकेले राष्ट्रपति तय नहीं कर सकता. आमतौर पर ये आदेश ऐसे कामों के लिए जारी होता है, जो अर्जेंट हों.
इमिग्रेशन है प्राथमिकता में
ट्रंप ने लगातार इमिग्रेशन पर बात की. उनका कहना है कि वे न केवल बॉर्डर पर निगरानी पक्की कर देंगे, बल्कि अमेरिका में बैठे लाखों अवैध शरणार्थियों को भी बाहर निकाल देंगे. ये काम उन्होंने पहले ही दिन करने की बात दोहराई. लेकिन ये संभव नहीं है.
जनवरी 2017 में ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया था. इसके तहत 7 इस्लामिक देशों के लोगों के आने पर पाबंदी लगा दी गई. ये बैन 90 दिनों के लिए था. बाद में इसमें बदलाव होते रहे. चूंकि ये पाबंदी आने वालों के लिए थी, न कि पहले से बसे लोगों के लिए, लिहाजा इसे लागू करना आसान था. वहीं डिपोर्टेशन के आदेश से पहले कई तरह की लीगल चीजें सुलझानी होंगी तभी फैसला लिया जा सकेगा. यानी पहले दिन शरणार्थियों पर कुछ बड़ा हो, इसकी संभावना कम ही है.
एजुकेशन मिनिस्ट्री पर लेंगे निर्णय
एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला वादा ये है कि वे शिक्षा मंत्रालय को ही क्लोज कर देंगे. ट्रंप ने बार-बार लोगों के सामने इस बात को दोहराया. उनका आरोप है कि इस डिपार्टमेंट की वजह से अमेरिकी बच्चों की पढ़ाई कमजोर होती जा रही है. इस मंत्रालय की शुरुआत कांग्रेस ने की थी और वॉल स्ट्रीट जर्नल के तर्कों पर ध्यान दें तो पता लगता है कि केवल कांग्रेस ही इसे बंद कर सकती है. इसके लिए उनकी हामी चाहिए. साथ ही सीनेट में कम से कम 60 वोट भी इस पक्ष में होने चाहिए. अगर ये नहीं हो सका तो इस मंत्रालय के साथ खास छेड़छाड़ नहीं हो सकती, सिवाय इसके लिए ट्रंप आगे चलकर उनका बजट कम कर दें, या कुछ पॉलिसीज को कमजोर कर दें.
क्या चीन को देंगे परेशानी
दूसरे देशों, खासकर चीन और मैक्सिको से आ रही चीजों पर टैरिफ लगाने को लेकर भी ट्रंप ने खूब बातें कीं. उन्होंने कहा कि वे इन देशों समेत अमेरिका में आ रहे सारे उत्पादों पर टैरिफ लगा देंगे. वे अपने पहले टर्म के दौरान भी ऐसा कर चुके. अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत वे चाहते हैं कि अपने घरेलू बाजार को बढ़ाना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने चीन से आई चीजों पर आक्रामक ढंग से टैरिफ लगाया. साथ ही मैक्सिको को धमकाया कि अगर वो रिफ्यूजी मुद्दे को नहीं सुलझाएगा तो उसपर भी टैरिफ लगाएंगे. लेकिन ये फैसला एक सीमा तक ही लिया जा सकता है.
अमेरिकी संविधान के तहत टैरिफ पर बड़े निर्णय कांग्रेस ही ले सकती है, सिवाय कुछ खास हालातों के. जैसे, अगर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में हो, तो राष्ट्रपति टैरिफ लगा सकता है. इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत आपातकालीन स्थिति में प्रेसिडेंट ये काम कर सकता है. साथ ही अगर कोई देश व्यापार में बेईमानी करे तो उसपर भी टैरिफ लगाने की आजादी प्रेसिडेंट को है.