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3 महीने पहले आ जाते हैं एजेंट, परमाणु हमले में भी सेफ रहेगी कार... ऐसी है US राष्ट्रपति बाइडेन की सिक्योरिटी

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन आज भारत पहुंच रहे हैं. शाम सात बजे के करीब उनका एयरफोर्स वन विमान दिल्ली पहुंच जाएगा. राष्ट्रपति बाइडेन G-20 समिट में हिस्सा लेने के लिए यहां आ रहे हैं. जानते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति की सिक्योरिटी कितनी मजबूत होती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन. (फाइल फोटो) अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 11:10 AM IST

दिल्ली में हो रही G-20 समिट के लिए विदेशी मेहमान आने लगे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन आज शाम करीब सात बजे भारत पहुंच जाएंगे. 

भारत आने के बाद बाइडेन सबसे सुरक्षित कार 'द बीस्ट' में सफर करेंगे. इसे बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर से भारत लाया जाएगा. 

बाइडेन और उनके साथ अमेरिका से आने वाले प्रतिनिधि दिल्ली के आईटीसी मौर्या होटल में ठहरेंगे. इस होटल में ठहरने वाले बाइडेन इकलौते विदेशी मेहमान हैं. बाइडेन होटल के 14वें फ्लोर पर बने रूम में रुकेंगे. यहां आने-जाने वाले होटल के स्टाफ को स्पेशल एक्सेस कार्ड दिया गया है. इस होटल में 400 कमरे बुक किए गए हैं.

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भारत में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन को तीन लेयर की सिक्योरिटी दी जाएगी. पहले घेरे में अमेरिका की सीक्रेट सर्विस के एजेंट रहेंगे. इसके बाद एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के कमांडोज और तीसरे घेरे में पैरामिलिट्री फोर्स और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात होंगे.

अमेरिका के राष्ट्रपति दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति माने जाते हैं. इसलिए उनकी सुरक्षा भी सबसे सख्त होती है. अगर राष्ट्रपति अकेले रहना भी चाहें तो भी उनके आदेश को माना नहीं जाएगा. 

मिनी व्हाइट हाउस है एयरफोर्स वन

राष्ट्रपति जो बाइडेन एयरफोर्स वन विमान से भारत आ रहे हैं. ये बोइंग 747-200B सीरीज का विमान है. ऐसे दो विमान होते हैं, जिनपर 28000 और 29000 कोड होता है.

एयरफोर्स वन दुनिया के सबसे सुरक्षित विमान में से एक है. इसे मिलिट्री विमान की कैटेगरी में रखा गया है, क्योंकि ये किसी भी तरह का हवाई हमला झेल सकता है. 

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ये विमान न सिर्फ दुश्मन के रडार को जाम कर सकता है, बल्कि इससे मिसाइल भी छोड़ी जा सकती है. इस विमान में हवा में ही फ्यूल भरा जा सकता है.

इतना ही नहीं, एयरफोर्स वन एक तरह से मिनी व्हाइट हाउस की तरह काम करता है. इसमें वो सारी सुविधाएं होती हैं, जो राष्ट्रपति भवन में होती हैं. इसमें एक कम्युनिकेशन सेंटर भी होता है, जिससे राष्ट्रपति जब चाहें, जिससे चाहें फोन पर बात कर सकते हैं.

एयरफोर्स वन में तीन फ्लोर होते हैं. और इसका कुल एरिया चार हजार वर्ग फीट होता है. इसमें राष्ट्रपति के लिए सुइट होता है. 

इसमें दो किचन भी होते हैं, जिसमें एक बार में 100 लोगों का खाना बन सकता है. साथ ही इसमें प्रेस, सिक्योरिटी स्टाफ, ऑफिस स्टाफ और वीआईपी के लिए कमरे भी बने होते हैं.

3 महीने पहले आ जाते हैं एजेंट

अमेरिका के चार राष्ट्रपतियों की हत्या हो चुकी है. 1865 में अब्राहम लिंकन, 1881 में जेम्स गारफील्ड, 1901 में विलियम मैकिनली और 1963 में जॉन एफ कैनेडी. लिहाजा अमेरिका अपने राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर ज्यादा गंभीर है.

राष्ट्रपति के दौरे से कम से कम तीन महीने पहले सीक्रेट सर्विस के एजेंट वहां पहुंच जाते हैं. ये एजेंट यहां पर स्थानीय पुलिस और एजेंसियों के साथ मिलकर राष्ट्रपति के दौरे का खाका तय करते हैं. 

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सीक्रेट सर्विस 1901 से अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा का काम संभाल रही है. इसके एजेंट स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संभावित खतरे की पहचान करते हैं. जिन लोगों से खतरा हो सकता है, उनकी पहचान करते हैं. 

राष्ट्रपति के दौरे से कुछ दिन पहले स्नीफर डॉग्स भी पहुंच जाते हैं. ये राष्ट्रपति के रूट की जांच करते हैं. चप्पा-चप्पा छाना जाता है. उनके रूट के आसपास भी किसी गाड़ी को खड़े नहीं होने दिया जाता है.

सीक्रेट सर्विस एजेंट इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि जहां राष्ट्रपति ठहरे हैं, वहां से कम से कम 10 मिनट की दूरी पर ट्रॉमा सेंटर है या नहीं. संभावित हमले या इमरजेंसी के लिए राष्ट्रपति की सेफ लोकेशन भी तय की जाती है.

राष्ट्रपति के ब्लड ग्रुप का ब्लड भी साथ में रखा जाता है, ताकि खून चढ़ाने की स्थिति में देरी न हो. राष्ट्रपति जिस होटल में ठहरते हैं, उसमें उनके लिए पूरा फ्लोर खाली रखा जाता है. ऊपर और नीचे भी सिर्फ स्टाफ के लोग ही रहते हैं.

इतनी सिक्योर कार कहीं नहीं!

अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी लिमोजिन कार में ही सफर करते हैं. इसे 'द बीस्ट' नाम दिया गया है. इस कार को अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स ने तैयार किया है. इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित कार माना जाता है.

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इस कार का वजन 20 हजार पाउंड यानी करीब 10 हजार किलो होता है. इसकी कीमत 10 करोड़ रुपये के आसपास होती है. 

ये कार इतनी सुरक्षित है कि इस पर न्यूक्लियर अटैक और केमिकल अटैक तक का असर नहीं होता. इस कार में मशीन गन, टियर गैस सिस्टम, फायर फाइटिंग और नाइट विजन कैमरा जैसे इक्विपमेंट होते हैं. जरूरत पड़ने पर कार से दुश्मन पर हमला भी किया जा सकता है.

कार के गेट 8 इंच मोटे होते हैं. इसकी विंडो बुलेटप्रूफ होती है. इस कार की सिर्फ एक ही विंडो खुलती है जो ड्राइवर सीट के साइड में होती है. 

इस कार को चलाने वाला ड्राइवर इतना ट्रेन्ड होता है कि वो हमले की स्थिति में 180 डिग्री का टर्न मार सकता है. यानी गाड़ी को अचानक से उल्टा घुमा सकता है. 

ड्राइवर और राष्ट्रपति के कैबिन के बीच कांच की दीवार होती है. ताकि राष्ट्रपति सीक्रेट मीटिंग या सीक्रेट बात कर सकें. उनके पास एक सैटेलाइट फोन भी होता है. इस कार में राष्ट्रपति के ब्लड ग्रुप का ब्लड भी रखा होता है. 

एक बात और, कार के टायर की रिम मजबूत स्टील से बनी होती है. इसका मतलब है कि अगर कार पंक्चर भी हो जाए तो भी इसकी स्पीड पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस कार में जो पेट्रोल डलता है, उसमें खास तरह का फोम मिक्स होता है, ताकि धमाका न हो.

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न्यूक्लियर अटैक का बटन साथ होता है

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति के साथ हमेशा एक लेदर बैग लिए सेना का अफसर होता है. सीक्रेट सर्विस के एजेंट के पास इसकी सुरक्षा का जिम्मा भी होता है.

इस ब्रीफकेस को 'फुटबॉल' कहते हैं. इस ब्रीफकेस में न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल और लॉन्च करने का कोड होता है. 

राष्ट्रपति जहां कहीं भी जाते हैं, उनके साथ ये ब्रीफकेस हमेशा रहता है. अगर कोई इमरजेंसी आ जाए या युद्ध जैसी स्थिति हो तो राष्ट्रपति दुनिया में कहीं से भी परमाणु हमला करने का आदेश दे सकते हैं.

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