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Global Hunger Index: हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान-बांग्लादेश-नेपाल से भी कैसे पिछड़ा भारत? रैंकिंग के पैमानों पर क्यों उठ रहे सवाल

Global Hunger Index 2023: ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग फिसल गई है. इस साल 125 देशों की रैंकिंग में भारत 111वें नंबर पर है. पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका की रैंकिंग भारत से कहीं बेहतर है. हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 111वें नंबर पर है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 111वें नंबर पर है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

Global Hunger Index 2023: ग्लोबल हंगर इंडेक्स की 2023 की रिपोर्ट आ गई है. इसमें भारत और पिछड़ गया है. इस साल 125 देशों में भारत 111वें नंबर पर है. 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स से पता चलता है कि किसी देश में भुखमरी और कुपोषण के कैसे हालात हैं? रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले में भारत की स्थिति और खराब होती जा रही है.

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पिछले साल 121 देशों की रैंकिंग में भारत 107वें नंबर पर था. 2021 में 101वें और 2020 में 94वें नंबर पर था.

इस साल भारत की रैंकिंग चार पायदान और गिर गई है. पड़ोसी मुल्कि पाकिस्तान (102वें), बांग्लादेश (81वें), नेपाल (69वें) और श्रीलंका (60वें) नंबर पर हैं.

पर भारत की रैंकिंग में गिरावट क्यों हो रही है? ग्लोबल हंगर इंडेक्स को मापने का तरीका क्या है? बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देश भारत से आगे क्यों हैं?

क्या है ग्लोबल हंगर इंडेक्स?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स दुनियाभर में भूख को मापने का जरिया है. इसे चार पैमानों पर मापा जाता है. इनमें कुपोषण, बच्चों में ठिगनापन (उम्र के हिसाब से कम हाइट), बच्चों का वजन (हाइट के हिसाब से कम वजन) और बाल मृत्यु दर (5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत) शामिल है. 

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हंगर इंडेक्स का कुल स्कोर 100 प्वॉइंट का होता है. इसके आधार पर किसी देश में भूख की गंभीरता का पता लगाया जाता है. अगर किसी देश का स्कोर 0 है तो वहां अच्छी स्थिति है. लेकिन किसी देश का स्कोर 100 है, तो वो बेहद खराब स्थिति में है. 

भारत का स्कोर 28.7 है और उसे 'गंभीर' स्थिति में रखा गया है. पाकिस्तान का स्कोर 26.6 है और वो भी 'गंभीर' स्थिति में है. बांग्लादेश का स्कोर 19.0, नेपाल का 15.0 और श्रीलंका का 13.3 है.

भारत कैसे पिछड़ा?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में बच्चों में वेस्टिंग रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है. यानी, यहां के बच्चों का वजन उनकी हाइट के हिसाब से कम है. 

भारतीय बच्चों में वेस्टिंग रेट 18.7 फीसदी है. जबकि, 35.5% बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से कम हाइट के हैं.  

इंडेक्स के मुताबिक, भारत की 16.6 फीसदी आबादी कुपोषित है. वहीं, बाल मृत्यु दर 3.1% है. यानी, भारत में पैदा होने वाले हर 1000 में से 3.1% बच्चे पांच साल भी नहीं जी पाते.

पड़ोसी मुल्कों की क्या है स्थिति?

- पाकिस्तानः 37.6% आबादी कुपोषित है. 18.5% बच्चों का वजह उनकी हाइट के हिसाब से कम है, जबकि 7.1% बच्चों की उम्र के हिसाब से हाइट कम है. बाल मृत्यु दर 6.3% है. 

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- बांग्लादेशः 23.6% आबादी कुपोषित है. 11% बच्चों का वजह उनकी हाइट के हिसाब से कम है, जबकि 11.2% बच्चों की उम्र के हिसाब से हाइट कम है. बाल मृत्यु दर 2.7% है. 

- श्रीलंकाः 13.1% आबादी कुपोषित है. 13.1% बच्चों का वजह उनकी हाइट के हिसाब से कम है, जबकि 5.3% बच्चों की उम्र के हिसाब से हाइट कम है. बाल मृत्यु दर 0.7% है. 

- नेपालः 24.8% आबादी कुपोषित है. 7.7% बच्चों का वजह उनकी हाइट के हिसाब से कम है, जबकि 5.4% बच्चों की उम्र के हिसाब से हाइट कम है. बाल मृत्यु दर 2.7% है. 

- अफगानिस्तानः 44.7% आबादी कुपोषित है. 30.1% बच्चों का वजह उनकी हाइट के हिसाब से कम है, जबकि 3.7% बच्चों की उम्र के हिसाब से हाइट कम है. बाल मृत्यु दर 5.6% है.

- चीनः 2.5% से भी कम आबादी कुपोषित है. 1.7% बच्चों का वजह उनकी हाइट के हिसाब से कम है, जबकि 4.8% बच्चों की उम्र के हिसाब से हाइट कम है. बाल मृत्यु दर 0.7% है.

 

सरकार का क्या है कहना?

केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है. सरकार ने हंगर इंडेक्स में रैंकिंग मापने के तरीके को गलत बताया है.

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि इसको मापने के चार में तीन पैमाने बच्चों की हेल्थ से जुड़े हैं और ये पूरी आबादी की तस्वीर नहीं बताते हैं. वहीं, कुपोषण का अनुमान पोल के जरिए किया गया है, जिसमें तीन हजार लोग हिस्सा लेते हैं.

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मंत्रालय का कहना है कि पोषण ट्रैकर के मुताबिक, बच्चों में वेस्टिंग रेट (हाइट के हिसाब से वजन) 7.2% से भी कम है. 

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