
गोवा में 'खेला' हो गया है. कांग्रेस के 11 में से 8 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है. पार्टी छोड़ने वाले सभी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं. जो बीजेपी में शामिल हुए हैं, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत भी शामिल हैं.
कांग्रेस की इस बगावत में दिगंबर कामत और माइकल लोबो का नाम सामने आ रहा है. दोनों ही पुराने भाजपाई रहे हैं. लोबो इसी साल जनवरी में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आए थे, जबकि कामत तीन बार बीजेपी से विधायक रहे हैं.
दिगंबर कामत ने बताया कि उन्होंने इसी साल विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले जनवरी में मंदिर जाकर भगवान के सामने जनता और पार्टी के प्रति वफादारी की शपथ ली थी. उन्होंने बताया कि वो फिर मंदिर गए थे और भगवान से पूछा कि क्या करना चाहिए. भगवान ने कहा कि जो तुम्हारे लिए बेहतर हो, वो करो.
कांग्रेस ने इस साल विधानसभा चुनाव से पहले अपने सभी उम्मीदवारों से शपथ दिलवाई थी कि वो जीतने के बाद पार्टी छोड़कर नहीं जाएंगे. 8 विधायकों के बीजेपी में शामिल होने के बाद अब गोवा विधानसभा में कांग्रेस के सिर्फ 3 विधायक ही बचे हैं. कांग्रेस में अब यूरी अलेमाओ, आल्टन डी'कोस्टा और कार्लोस अल्वारिस फेरेरा ही बचे हैं. अलेमाओ ने कहा कि हमने शपथ ली थी कि हमेशा पार्टी में रहेंगे, लेकिन कोई कैसे भगवान को धोखा दे सकता है.
कांग्रेस इसे 'ऑपरेशन कीचड़' बता रही है. लेकिन गोवा में 'ऑपरेशन लोटस' को कामयाब बनाने में दिगंबर कामत और माइकल लोबो का नाम सामने आ रहा है. लोबो ने बताया कि बुधवार को कांग्रेस विधायक दल का बीजेपी में मर्जर करने का प्रस्ताव पास किया गया था. तीन विधायक इसके खिलाफ थे.
गोवा में कैसे हुआ पूरा खेल?
गोवा में ये पूरा खेल अब हुआ है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट जुलाई में ही लिखी जा चुकी थी. तब दिगंबर कामत और माइकल लोबो समेत 5 विधायक अचानक गायब हो गए थे. कांग्रेस ने उस समय कहा था कि 5 विधायकों से उसका संपर्क नहीं हो रहा है.
तब कांग्रेस ने माइकल लोबो और दिगंबर कामत पर बीजेपी के साथ मिलकर पार्टी के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया था. हालांकि, उस समय कांग्रेस के 5 विधायक बागी हुए थे, ऐसे में उन पर दल-बदल कानून के तहत सदस्यता जाने का खतरा बना था.
बागी विधायकों को अपनी सदस्यता बचाए रखने के लिए 8 विधायकों का साथ आना जरूरी था. ऐसे में उनके पास एक तिहाई विधायक हो जाते और दल-बदल कानून लागू नहीं होता.
अब जब 8 विधायक साथ आए तो सभी बीजेपी में शामिल हो गए. दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता भी नहीं जा सकती.
जो कांग्रेस विधायक बीजेपी में शामिल हुए हैं, उनमें दिगंबर कामत और माइकल लोबो के अलावा डेलियाला लोबो, राजेश फलदेसाई, केदार नाईक, संकल्प अमोनकर, एलेक्सो सिकेरा और रुडोल्फ फर्नांडिस शामिल हैं.
हालांकि, तीन साल पहले 2019 में भी कांग्रेस के 10 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. इसे कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. ये मामला अभी कोर्ट में है.
दिगंबर कामत और माइकल लोबो कौन हैं?
दिगंबर कामत
8 मार्च 1954 को मारगाव में जन्म हुआ. 68 साल के कामत 2007 से 2012 तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे हैं. वो मारगाव से 7 बार से विधायक हैं.
कामत ने अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस से शुरू किया था. 1995 में वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ गए थे. 1995, 1999 और 2002 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीता.
फरवरी 2005 में कामत बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में चले गए. उसके बाद 2002 का उपचुनाव, 2007, 2012, 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस की टिकट पर जीता.
इस साल फरवरी में विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे में कामत ने बताया था कि उनके पास 15.15 करोड़ रुपये की संपत्ति है. उनके ऊपर 4 क्रिमिनल केस दर्ज हैं.
माइकल लोबो
इसी साल जनवरी में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे. उन्होंने 2012 और 2017 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था. दोनों ही बार माइकल लोबो बड़े अंतर से जीते थे. वो कलिंगुट सीट से विधायक हैं. इस साल विधानसभा चुनाव से पहले लोबो कांग्रेस में आ गए थे. इस बार उन्होंने लगभग 5 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की.
2017 में चुनाव जीतने के बाद माइकल लोबो विधानसभा में डिप्टी स्पीकर बने थे. वो इस पद पर 24 मार्च 2017 से 13 जुलाई 2019 तक रहे थे. इसके बाद 15 जुलाई 2019 को वो कैबिनेट मंत्री बन गए थे. इस बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतने के बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था.
माइकल लोबो का जन्म 18 जून 1976 को गोवा के मापुसा में हुआ था. वो रोमन कैथोलिक हैं. उन्होंने 1993 में 12वीं की परीक्षा पास की थी. इस साल उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में बताया था कि उनके पास 92.91 करोड़ रुपये की संपत्ति है. उनके ऊपर 3 क्रिमिनल केस दर्ज हैं.
बाकी 6 विधायक कौन हैं?
- डेलियाला लोबोः माइकल लोबो की पत्नी हैं. पहली बार विधायक बनीं हैं. वो सियोलिम सीट से विधायक हैं. उनके पास 92.91 करोड़ रुपये की संपत्ति है. दो क्रिमिनल केस दर्ज हैं. चुनाव में 1,727 वोटों के अंतर से जीती थीं.
- राजेश फलदेसाईः कमबरजुआ सीट से विधायक हैं. बीजेपी के पांडुरंग मडकाईकर को 2,827 वोटों से हराकर पहली बार विधायक चुने गए. उनके पास 5.73 करोड़ रुपये की संपत्ति है और एक क्रिमिनल केस दर्ज है.
- केदार नाईकः पेशे से कारोबारी हैं. पहली बार विधायक चुने गए. सालीगाव सीट से विधायक हैं. उनके पास 4.24 करोड़ रुपये की संपत्ति है और एक क्रिमिनल केस दर्ज है. उन्होंने 1,899 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था.
- संकल्प अमोनकरः मोर्मुगाव से पहली बार विधायक चुने गए. उन्होंने तीन बार के बीजेपी विधायक मिलिंद नाईक को 1,941 वोटों से हराया था. गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष भी थे. उनके पास 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति है. 5 आपराधिक केस दर्ज हैं.
- एलेक्सो सिकेराः नुवेम से विधायक हैं. पहली बार विधायक बने हैं. 4,397 वोटों के अंतर से उन्होंने चुनाव जीता था. उनके पास 18.27 करोड़ रुपये की संपत्ति है.
- रुडोल्फ फर्नांडिसः राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनकी मां विक्टोरिया फर्नांडिस सांताक्रूज से चार बार विधायक रही थीं. 2019 में उनका निधन हो गया था. 2022 में कांग्रेस से टिकट मिलने के बाद रुडोल्फ फर्नांडिस पहली बार यहां से विधायक बने. उनके पास 34.66 करोड़ रुपये की संपत्ति है और एक क्रिमिनल केस दर्ज है.
गोवा विधानसभा में कैसे बदला नंबर गेम?
- गोवा में इसी साल फरवरी में विधानसभा चुनाव हुए थे. 40 में से 20 सीटें बीजेपी ने जीती थीं. इनके अलावा महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के दो और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी बीजेपी के पास है.
- कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं. इसके अलावा गोवा फॉरवर्ड पार्टी और रिवॉल्यूशनर गोअंस पार्टी की एक-एक सीट है. आम आदमी पार्टी ने 2 सीट हासिल की थी.
- कांग्रेस के 8 विधायकों के बीजेपी में आने के बाद अब उसके पास विधानसभा में 33 विधायकों का समर्थन हो गया है. वहीं, विपक्ष में सिर्फ 7 विधायक ही बचे हैं.
- ये सारे घटनाक्रम के बाद अब गोवा विधानसभा में एक भी पार्टी ऐसी नहीं बची, जो विपक्ष के नेता के पद पर दावा कर सके. विपक्ष का नेता बनने के लिए पार्टी के पास कम से कम 10% यानी 4 विधायक होने चाहिए.