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जहाजों के डूबने से करोड़ों टन गोल्ड समा गया समंदर में, जानिए क्यों हर बार निकालने की कोशिश होती रही फेल

दुनियाभर के समंदरों की गहराई में रहस्यमयी जीव-जंतु या कोरल ही नहीं हैं, इसमें गोल्ड भी डूबा हुआ है. अमेरिकी सरकारी विभाग नेशनल ओशन सर्विस की मानें तो समुद्र की तलहटी में थोड़ा-बहुत नहीं, 20 मिलियन टन से भी ज्यादा सोना पड़ा हुआ है. इसकी कीमत लगभग 800 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा होगी. ये गोल्ड इतना ज्यादा है कि इससे दुनिया में अमेरिका जैसे कई ताकतवर देश बनाए जा सकें.

हादसों के शिकार हुए जहाजों में अक्सर कीमती सामान समेत सोना भरा होता था. सांकेतिक फोटो (Unsplash) हादसों के शिकार हुए जहाजों में अक्सर कीमती सामान समेत सोना भरा होता था. सांकेतिक फोटो (Unsplash)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 मई 2023,
  • अपडेटेड 10:40 AM IST

महिला खिलाड़ियों के कथित यौन उत्पीड़न के विरोध में पहलवानों की एक टीम अपने मेडल गंगा में बहाने के लिए हरिद्वार पहुंची. हालांकि ऐन वक्त पर उन्हें मनाकर रोक दिया गया. वैसे इस राजनैतिक स्टंट को छोड़ दें तो भी दुनिया के पानी में करोड़ों टन सोना और कीमती धातुएं डूबी हुई हैं. जहाजों के हादसों का शिकार होने से लेकर लोगों के आस्था में फेंके हुए सिक्के तक गहरे समुद्र में हैं.

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किन जहाजों में हादसे के वक्त था सोना?

साल 1641 में ब्रिटेन का रॉयल मर्चेंट नाम का जहाज खराब मौसम की वजह से कॉर्नवॉल के पास पानी में समा गया. 2019 में जहाज का ऊपरी हिस्सा तो मिला, लेकिन उसका बॉटम कभी नहीं मिल सका. एक अनुमान है कि जब जहाज डूबा, तब उसके खजाने में एक लाख पाउंड गोल्ड रखा हुआ था. 

पुर्तगाली कार्गो फ्लोर दी ला मेर ने लगभग एक दशक तक गुलाम देशों से सोना और कीमती सामान बटोरकर पुर्तगाल पहुंचाने का काम किया. 16वीं सदी की शुरुआत में प्रशांत महासागर में एक हादसे का शिकार होकर जहाज समुद्र की गहराई में समा गया. अनुमान है कि उस वक्त भी कार्गो में 2 बिलियन डॉलर की लागत का सोना रखा हुआ था. ऐसे एक नहीं हजारों या शायद इससे भी ज्यादा जहाज होंगे. 

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डूबे हुए सोने की वैल्यू के सिर्फ अनुमान ही लगते रहे. सांकेतिक फोटो (Reuters)

कितने कीमत होगी डूबे हुए गोल्ड की?

नेशनल ओशनिक एंड एटमॉसफेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, ये कहना मुश्किल है कि कुल कितना सोना या फिर कितने वैल्यू का कीमती सामान समुद्र में खो चुका है. अक्सर बड़े डूबे हुए जहाजों के आधार पर इसकी गणना होती रही. हालांकि माना जाता है कि ये इतना होगा, जिससे कई नए और बेहद ताकतवर देश बस सकते हैं. आमतौर पर ये लूटा हुआ सोना होता था, जो गुलाम देशों से जीतकर यहां से वहां ढोया जा रहा होता था.

समुद्र में जब इतना सारा सोना यहां-वहां पड़ा हुआ है और दुनिया को ये पता भी है, तो उसे निकाला क्यों नहीं जा रहा? इसमें कई बड़ी प्रैक्टिकल दिक्कतें हैं.

क्यों नहीं निकाला जा सका ये खजाना?

पहली बात तो ये कि हमें ये नहीं पता कि समंदर के किस हिस्से में कितना सोना जमा होगा. चलिए, एक बार ये पता लग भी जाए तो भी समुद्र में उतनी गहराई तक जाना आसान नहीं. अगर गहराई तक पहुंच जाएं तो भी एक बहुत बड़ी समस्या सामने होगी. सोना तली पर पड़ा हो, ये जरूरी नहीं. हो सकता है कि वो किसी बड़े पत्थर के नीचे दबा हो या उसपर कोई कोरल रीफ बन चुकी हो. ऐसे में उसे निकालने के लिए खुदाई करनी होगी. ये सारी प्रोसेस कितना समय लेगी, ये नहीं पता. उतनी देर समुद्र में मीलों भीतर रहना मुमकिन नहीं. अगर मशीनों को ये काम दिया जाए, तो भी अचानक आने वाले तूफान या मछलियां उसे खराब कर देंगी. 

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जहाजों के निचले हिस्से बहुत कम ही खोजे जा सके. सांकेतिक फोटो (Unsplash)

सोने का पता लगाने के लिए बना टूल

समुद्र में गोल्ड कहां-कहां पड़ा है, कई बार ये जानने की कोशिश हुई. समुद्र पर काम करने वाली देशी-विदेशी संस्थाएं लगातार इसपर काम कर रही हैं. सबसे पहले 19वीं सदी के आखिर में ब्रिटिश चर्च के पादरी और गणितज्ञ फोर्ड जर्नेगन ने एक टूल बनाया. गोल्ड एक्युमुलेटर नाम के इस टूल के बारे में उनका दावा था कि मर्करी और बिजली की मदद से हम समुद्र में छिपे सोने को खोज भी सकते हैं और बाहर भी निकाल सकते हैं. 

जर्नेगन ने एक कंपनी भी खड़ी की, जिसे नाम दिया- इलेक्ट्रोलाइड मरीन सॉल्ट्स. कंपनी खूब जोर-शोर से अपना विज्ञापन करने लगी. यहां तक कि बहुत से इनवेस्टरों ने अपना पैसा भी लगा दिया. समुद्र में सोने की कथित खोज और खुदाई चलती रही. बाद में जर्नेगन इनवेस्टरों के दिए पैसों समेत कहीं गायब हो गया. सोना नहीं मिल सका. 

पेटेंट भी हो चुका है

साल 1900 में लंदन के एक इनवेस्टर हेनरी क्ले ने सोने की खुदाई का एक पेटेंट तक करा लिया. मैथड ऑफ एक्सट्रेक्टिंग गोल्ड फ्रॉम सी-वॉटर नाम का ये पेटेंट एक तरह का दावा था कि जो भी उनके तरीके से समुद्र में माइनिंग करेगा, वो पेटेंट के दायरे में आएगा. हालांकि ये भी उतना ही बेकार साबित हुआ.

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समुद्री पानी में सोने के गलने की आशंका भी लगातार रहती है. सांकेतिक फोटो (Pixabay)

क्या हम बढ़ा-चढ़ाकर सोच रहे हैं!

समुद्र की गहराई में जाने की कोशिश तो लगातार होती रही, लेकिन सोना खोजने में बड़ी कामयाबी नहीं मिली. यहां तक कि ये भी मान लिया गया कि गोल्ड एक्सट्रेक्ट करने में जितने पैसे लगेंगे, सोने की कीमत उससे कुछ कम ही होगी. 

पानी में घुल चुका है गोल्ड

नहीं मिले तो अंगूर खट्टे की तर्ज पर ये भी कहा जाने लगा कि समुद्र में सोना तो है, लेकिन बहुत कम. अर्थ एंड प्लानेटरी साइंस लेटर्स नाम के साइंस जर्नल में छपी एक रिपोर्ट मानती है कि हर 100 मिलियन टन समुद्र के पानी में केवल 1 ग्राम ही सोना है. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने ये दावा अटलांटिक और नॉर्थ पेसिफिक ओशन के बारे में किया. इसके बाद भी हालांकि सोने की खोज अब तक चल रही है. 

क्या सोना समुद्र में सुरक्षित रहता है?

ये एक और एंगल है, जिसपर बात होती रही. समुद्र के खारे पानी में लगभग सारी चीजें गल जाती हैं. अगर कोई जहाज सैकड़ों सालों से इसकी तलहटी में दबा पड़ा हो तो खारा पानी न केवल सोने को गला देगा, बल्कि वो पानी में घुल भी जाएगा.

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