
Israel-Hamas War: आसमान से गिरते बम... जमीन पर चलतीं गोलियां... और इस जंग में पिसते आम लोग... हमेशा यही होता है. और इजरायल और हमास की जंग में भी यही हो रहा है.
फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर पांच हजार रॉकेट दागे. फिर जमीन, समंदर और आसमान से इजरायल में घुसपैठ कर दी. सैकड़ों इजरायली नागरिकों को बंधक भी बना लिया.
इजरायल पर 50 साल के इतिहास में ये अब तक का सबसे घातक हमला है. इस बीच इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) सोशल मीडिया पर हमलों से जुड़ी तस्वीरें साझा कर रही है. आईडीएफ ने इसे 'वॉर क्राइम' यानी 'युद्ध अपराध' बताया है.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद कुछ नियम तय किए जाते हैं. और जब इन नियमों के खिलाफ जाकर युद्ध लड़ा जाता है तो उसे वॉर क्राइम माना जाता है.
कौन से कानून से लड़े जाते हैं संघर्ष?
- 1939 से 1945 तक दूसरा विश्व युद्ध हुआ. भारी तबाही मची. ऐसी तबाही फिर न हो, इसलिए दुनिया के सारे देशों के नेता 1949 में स्विट्जरलैंड की राजधानी जेनेवा में जुटे. इसे जेनेवा कन्वेंशन कहा जाता है.
- जेनेवा कन्वेंशन के दौरान युद्ध को लेकर जो नियम बने, उसे इंटरनेशनल ह्यूमैनेटिरियन लॉ (International Humanatarian law) कहा गया. इसमें कुल 161 नियम है. इसे सभी 196 देशों ने मान्यता दी है.
- इसमें ये भी लिखा है कि कब जंग के दौरान लॉ ऑफ वॉर लागू होगा. अगर कोई लड़ाई एक ही देश के अंदर चल रही है तो ये लागू नहीं होगा. लेकिन जब दो देशों के बीच लड़ाई हो रही है और उसमें हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है तो ये कानून लागू होगा. इन नियमों को बनाने का मकसद उन लोगों की रक्षा करना था जो जंग नहीं लड़ते या जंग लड़ने की स्थिति में नहीं होते.
- ये कानून हमास जैसे आतंकी संगठनों पर भी लागू होता है. अगर इन युद्ध अपराधों के लिए घरेलू कानून के आधार पर आरोप तय नहीं होते हैं, तो फिर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) आरोप तय करती है.
- आईसीसी सभी सदस्य देशों में होने वाले युद्ध अपराधों की जांच करने का आदेश दे सकती है. न्यूज एजेंसी ने बताया कि मंगलवार को आईसीसी के प्रॉसिक्यूटर ने बताया है कि उसका आदेश मौजूदा संघर्ष में किए गए कथित अपराधों पर भी लागू होता है.
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आईसीसी का क्या है रोल?
- आईसीसी की स्थापना 2002 में हुई थी. इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट हेग में बनी है. 123 देश इसके सदस्य हैं. सदस्य देशों में होने वाले युद्ध अपराधों, नरसंहारों या मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच आईसीसी कर सकती है.
- चीन, रूस, अमेरिका, भारत और मिस्र जैसे देश इसके सदस्य हैं. आईसीसी फिलिस्तीन को मेंबर स्टेट की मान्यता देता है, जबकि इजरायल इसका सदस्य नहीं है.
- सीमित बजट और स्टाफ के साथ, आईसीसी पहले यूक्रेन और अफगानिस्तान से लेकर सूडान और म्यांमार तक 17 मामलों की जांच कर रही है. आईसीसी ने 2023 के लिए फिलिस्तीनी इलाकों में जांच के लिए एक मिलियन यूरो का बजट रखा है.
- आईसीसी 2021 से फिलिस्तीनी इलाकों में हुए युद्ध अपराधों की जांच कर रहा है. जांच के दौरान इजरायली सैनिकों, हमास आतंकियों और दूसरे सशस्त्र संगठनों पर युद्ध अपराध का आरोप लगा है.
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युद्ध अपराध कब होता है?
- ह्यूमन राइट्स वॉच के इजरायल और फिलिस्तीन के डायरेक्टर उमर शाकिर ने बताया कि नागरिकों की जानबूझकर हत्याएं करना, बंधक बनाना और सामूहिक सजा देना जघन्य अपराध के दायरे में आता है.
- जेनेवा कन्वेंशन के तहत, नागरिकों को बंधक बनाना, हत्या करना या फिर उन्हें टॉर्चर करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है.
- आम नागरिकों को निशाना बनाना, उन्हें बंधक बनाना, संपत्तियों पर कब्जा करना, अमानवीय बर्ताव करना, टॉर्चर करना, जानबूझकर हत्या करना, युद्धबंदियों को ट्रायल से रोकना जैसे बर्ताव युद्ध अपराध में गिने जाते हैं.
क्या यहां लागू होगा जेनेवा कन्वेंशन?
- अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को कहा कि इजरायल को प्रतिक्रिया देने का अधिकार है. उन्होंने कहा था कि उन्होंने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से बात की थी और चर्चा की थी नियमों के अनुसार चलकर अमेरिका और इजरायल जैसे लोकतंत्र खुद को कैसे मजबूत और सुरक्षित रख सकते हैं.
- नागरिकों पर हमला करना भी युद्ध अपराध के दायरे में आता है. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, सैन्य ठिकानों पर हमले करने के दौरान भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि इससे नागरिकों को नुकसान न पहुंचे.
- आईसीसी में इजरायल के डिफेंस लॉयर निक कॉफमैन ने न्यूज एजेंसी को गाजा सीमा के पास एक म्यूजिक फेस्टिव में हमास के हमले का उदाहरण दिया.