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Israel Palestine Conflict: इजरायल-फिलिस्तीन में सुलह का वो फॉर्मूला... जो मान लिया होता तो बच जाती हजारों लोगों की जान

Israel-Palestine Conflict: इजरायल और फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास के बीच जंग शुरू हो गई है. इस जंग में अब तक दोनों ओर से हजारों लोग मारे जा चुके हैं. 1948 में जैसे ही इजरायल अलग मुल्क बना, वैसे ही ये विवाद क्षेत्रीय तनाव में बदल गया. दोनों के बीच शांति के लिए दशकों पहले एक सॉल्यूशन लाया गया था, लेकिन इसे कभी माना नहीं गया.

इजरायल और हमास के बीच 7 अक्टूबर से जंग जारी है. इजरायल और हमास के बीच 7 अक्टूबर से जंग जारी है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 8:15 PM IST

Israel-Palestine Conflict: इजरायल और फिलिस्तीन एक बार फिर आमने-सामने हैं. जंग शुरू हो चुकी है. शनिवार सुबह फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर रॉकेट दागे थे. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है, 'दुश्मन को ऐसी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसके बारे में उसने कभी नहीं सोचा होगा.'

इजरायल और हमास के बीच पहले भी संघर्ष हो चुका है. लेकिन इस बार ये संघर्ष से कहीं ज्यादा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इजरायल ने कभी आधिकारिक तौर पर हमास के खिलाफ जंग का ऐलान नहीं किया गया था. लेकिन इस बार ऐसा किया है.

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इस बीच दुनिया भी दो धड़ों में बंट चुकी है. अरब देश और इस्लामिक राष्ट्र हमास के साथ खड़े हैं. तो भारत और अमेरिका जैसे मुल्क इजरायल के साथ हैं. 

वहीं, पाकिस्तान 'टू स्टेट थ्योरी' की वकालत कर रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि उनका देश मध्य पूर्व में स्थाई शांति के लिए हमेशा से टू स्टेट समाधान की पैरवी करता रहा है.

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पर ये टू स्टेट थ्योरी क्या है?

टू स्टेट सॉल्यूशन या दो राष्ट्र समाधान का प्रस्ताव सबसे पहले 1937 में आया था. तब ब्रिटिश सरकार में पील कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में ये प्रस्ताव दिया था.

इसमें नेगेव रेगिस्तान, वेस्ट और गाजा पट्टी को अरब लोगों को देने का प्रस्ताव रखा गया था. जबकि, गलीली में ज्यादातर समुद्री तट और फिलिस्तीन की उपजाऊ भूमि यहूदियों को देने की बात थी. येरूशलम ब्रिटिश अपने पास ही रखना चाहते थे. इस प्रस्ताव का यहूदियों ने तो समर्थन किया लेकिन अरबों ने खारिज कर दिया.

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1947 में फिर संयुक्त राष्ट्र ने बंटवारे का प्रस्ताव रखा. इसमें तीन-तरफा विभाजन था. येरूशलम को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में ही रखने का प्रस्ताव था. जबकि, यहूदियों और अरबों के लिए अलग-अलग मुल्क बनाने की बात थी. इस बार भी यहूदियों ने इसे मान लिया लेकिन अरब नेताओं ने इसका विरोध किया.

1967 के बाद...

14 मई 1948 को इजरायल बना. बनते ही पहला अरब-इजरायल युद्ध शुरू हो गया. सालभर तक चले युद्ध के बाद सीजफायर का ऐलान हुआ.

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में साल 1967 में टर्निंग प्वॉइंट है. 1967 में छह दिन तक युद्ध चला था. छह दिन की इस जंग में इजरायल ने मिस्र और सीरिया की वायुसेना पर हमला कर दिया था.

इस युद्ध में इजरायल ने सिनाई प्रायद्वीप, गाजा पट्टी, वेस्ट बैंक, येरूशलम और गोलान हाइट्स पर कब्जा कर लिया. इस युद्ध से पहले तक गाजा पट्टी पर मिस्र और वेस्ट बैंक पर जॉर्डन का नियंत्रण था. 

इस युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में एक रिजॉल्यूशन पास किया गया, जिसमें इजरायल से कब्जे वाले इलाके छोड़ने का ऐलान किया गया.

1964 में बनी फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) ने टू स्टेट सॉल्यूशन का हमेशा विरोध किया. हालांकि, 1970 के मध्य में पीएलओ ने इसके समर्थन के संकेत दिए. 

1976 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में टू स्टेट सॉल्यूशन पर एक और रिजॉल्यूशन आया. ये 1967 के पहले की सीमा रेखा के आधार पर था. लेकिन अमेरिका ने वीटो का इस्तेमाल कर इसे गिरा दिया. इस प्रस्ताव ने टू स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन किया, साथ ही ये भी कहा कि सीमाओं पर सभी पार्टियों को बातचीत करनी चाहिए.

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अब तक क्यों नहीं निकला हल?

1. बॉर्डरः इजरायल और फिलिस्तीन के बीच अब तक बॉर्डर तय नहीं है. ज्यादातर का मानना है कि 1967 के अरब-इजरायल युद्ध से पहले की रेखा को सीमा माना जाए. हालांकि, इजरायल इसके पक्ष में नहीं है.

2. येरूशलमः दोनों ही येरूशलम को अपनी राजधानी बताते हैं. इजरायल ने तो इसे अपनी आधिकारिक राजधानी भी घोषित कर दिया है. येरूशलम यहूदियों के साथ-साथ ईसाई और मुस्लिमों के लिए भी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है. इतना ही नहीं, येरूशलम में इजरायल ने बुनियादी ढांचा इतना विकसित कर लिया है, जिससे उसकी स्थिति यहां मजबूत हो गई है.

3. शरणार्थीः 1948 में हुए पहले अरब-इजरायल युद्ध के बाद लाखों की संख्या में फिलिस्तीनी यहां से भाग गए थे. अनुमान है कि आज उनकी संख्या 50 लाख के आसपास होगी. अगर सीमाएं तय होती हैं और फिर से उन्हें यहां बसाया जाता है तो इससे यहूदियों का अनुपात कम हो जाएगा.

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तो शांति हो सकती थी बहाल!

14 मई 1948 में इजरायल के बनने के बाद से ही यहां तनाव है. अगर टू स्टेट सॉल्यूशन को मान लिया जाता, तो आज स्थिति बहुत अलग होती. 

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अभी समस्या ये है कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच कोई सीमा रेखा ही तय नहीं है. फिलिस्तीन भी दो हिस्सों में बंटा हुआ है. एक हिस्से पर इस्लामी चरमपंथी संगठन हमास का कब्जा है, जिसे इजरायल और पश्चिमी देश आतंकी संगठन मानते हैं. 

इजरायल और फिलिस्तीन अलग-अलग देश होते

इस समय इजरायल तो अलग देश है, लेकिन फिलिस्तीन अलग मुल्क नहीं है. 1948 में बने इजरायल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगले ही साल मान्यता मिल गई थी. 11 मई 1949 से इजरायल संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है. इसके इतर फिलिस्तीन अब तक एक मुल्क नहीं बन पाया है. 

फिलिस्तीन असल में दो हिस्सों में बंटा है. एक है- वेस्ट बैंक और दूसरा- गाजा पट्टी. वेस्ट बैंक पर महमदू अब्बास फतह की राजनीतिक पार्टी का नियंत्रण है. जबकि, गाजा पट्टी पर इस्लामिक चरमपंथी संगठन हमास का दबदबा है. 

फिलिस्तीन येरूशलम को अपनी राजधानी बताता है. जबकि, 1967 में छह दिन तक चली जंग में इजरायल ने येरूशलम पर कब्जा कर लिया था. और इसे अपनी राजधानी घोषित कर दिया था.

हालांकि, इजरायल को भले ही संयुक्त राष्ट्र के ज्यादातर सदस्यों ने अलग देश के तौर पर मान्यता दे रखी हो. लेकिन अब भी ज्यादातर देश येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता नहीं देते हैं.

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