
एक बार भी असफल होने के बाद किस्मत को दोष देकर बैठ जाने वालों से दुनिया भरी पड़ी है. लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो बार-बार असफल होने के बावजूद फिर नया दांव चलने को तैयार रहते हैं. तमिलनाडु के रहने वाले के पद्मराजन उन्हीं में से हैं.
पद्मराजन अब तक 238 बार चुनाव लड़ चुके हैं और हर बार हारे ही हैं. पद्मराजन भले ही चुनाव हार चुके हों, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है.
तमिलनाडु के मेट्टूर में रहने वाले पद्मराजन स्थानीय चुनाव से लेकर राष्ट्रपति चुनाव तक लड़ चुके हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कई मुख्यमंत्रियों-मंत्रियों के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं.
पद्मराजन अब तक 5 बार राष्ट्रपति, 5 बार उपराष्ट्रपति, 32 बार लोकसभा, 72 बार विधानसभा, 3 बार एमएलसी और एक बार मेयर समेत कई चुनाव लड़ चुके हैं. पिछले साल तेलंगाना विधानसभा चुनाव के दौरान पद्मराजन ने गजवेल सीट से नामांकन दायर किया था. इसी सीट से तब के मुख्यमंत्री केसीआर भी चुनाव लड़ रहे थे.
1988 में लड़ा था पहला चुनाव
पद्मराजन अब 64 साल हो चुके हैं. उन्होंने अपना पहला चुनाव 1988 में लड़ा था. तब उन्होंने तमिलनाडु की मेट्टूर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था. और तब से ही वो चुनाव लड़ते आ रहे हैं.
पद्मराजन मेट्टूर में टायर रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं. इसके साथ-साथ वो खुद को होम्योपैथिक डॉक्टर भी बताते हैं.
पद्मराजन 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वड़ोदरा सीट से खड़े हुए थे. 2019 में उन्होंने राहुल गांधी को वायनाड से चुनौती दी थी. 2019 में पद्मराजन को महज 1,887 वोट मिले थे. पद्मराजन कहते हैं, 'सामने कौन खड़ा है, इसकी मुझे परवाह नहीं.'
जब वो चुनाव लड़ते हैं और हार जाते हैं तो लोग उनका मजाक भी उड़ाते हैं. हालांकि, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता. पद्मराजन कहते हैं, 'सभी चुनाव जीतना चाहते हैं. मैं नहीं. मेरे लिए चुनाव लड़ना ही जीत है. मैं हारकर ही खुश हूं.'
करोड़ों कर चुके हैं खर्च
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव लड़ने के इस जूनून से उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए हैं. उनका दावा है कि अब तक वो एक करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं.
चुनाव लड़ने के लिए 25 हजार रुपये तो जमानत राशि ही जमा करनी पड़ती है और वो रिफंड भी नहीं होती. क्योंकि जमानत राशि तभी वापस होती है, जब उम्मीदवार को कम से कम 16 फीसदी वोट मिलें. लेकिन पद्मराजन को कभी इतने वोट मिले ही नहीं.
पद्मराजन का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2011 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में रहा था. तब उन्होंने मेट्टूर सीट से चुनाव लड़ा था और उन्हें 6,273 वोट मिले थे. न्यूज एजेंसी एएफपी से उन्होंने कहा, 'मुझे एक भी वोट की उम्मीद नहीं है. लेकिन मुझे इससे पता चलता है कि लोग मुझे स्वीकार कर रहे हैं.'
2019 में पद्मराजन ने तीन सीट- वायनाड, वेल्लोर और धर्मपुरी से चुनाव लड़ा था. और तीनों ही जगह उन्हें 0.5 फीसदी से भी कम वोट मिले थे.
पद्मराजन कहते हैं, 'भागीदारी जरूरी है. लोग नामांकन दाखिल करने में झिझकते हैं. मैं जागरूकता पैदा करने के लिए रोल मॉडल बनना चाहता हूं.'
हर चीज का रिकॉर्ड रखा है
पद्मराजन भले ही कोई चुनाव न जीत सके हों, लेकिन वो नामांकन पेपर से लेकर हर छोटी-छोटी चीज का रिकॉर्ड रखते हैं. उन्होंने अब तक अपने सारे नामांकन पेपर और आईडी कार्ड को लेमिनेट करवा कर रखा है.
वो निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं, इसलिए उन्हें हर बार अलग-अलग चुनाव चिन्ह मिलता है. उन्हें कभी मछली, कभी रिंग, कभी हैट, कभी टेलीफोन जैसे चुनाव चिन्ह मिल चुके हैं. इस बार उनका चुनाव चिन्ह 'टायर' है.
एक समय लोग उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन अब पद्मराजन छात्रों को मोटिवेट भी करते हैं. वो कहते हैं, 'मैं जीतने के बारे में नहीं सोचता. अगर हम यही मानसिकता लेकर चलते हैं तो बाद में हमें इसका तनाव नहीं होता.'
लिम्का बुक में दर्ज है नाम
पद्मराजन भले ही चुनाव हारते रहे हों, लेकिन उनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड भी है. इतनी बार चुनाव हारने के कारण उनका नाम लिम्का बुक में दर्ज है.
इतना ही नहीं, पद्मराजन को 'इलेक्शन किंग' और 'वर्ल्ड्स बिगेस्ट इलेक्शन लूजर' जैसे नाम से भी जाना जाता है.
इस बार फिर उन्होंने तमिलनाडु की धर्मपुरी सीट से नामांकन दाखिल किया है. चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामे में उन्होंने बताया है कि उनके पास 49 हजार रुपये की नकदी है. उनके पास एक बाइक है और कुछ ज्वैलरी है. उनके पास कुल 1.11 लाख रुपये की चल संपत्ति है. जबकि, 14 लाख रुपये की अचल संपत्ति है.
उनका कहना है कि वो अपनी आखिरी सांस तक चुनाव लड़ना जारी रखेंगे. पद्मराजन मजाक-मजाक में कहते हैं कि जिस दिन वो चुनाव जीत जाएंगे, उस दिन उन्हें हार्ट अटैक आ सकता है.