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क्या मुइज्जू गंवा देंगे अपनी कुर्सी? समझें- मालदीव की संसद में कितना मजबूत है विपक्ष

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है. मुइज्जू नवंबर में ही राष्ट्रपति बने हैं. और इतने वक्त में ही विपक्ष उन्हें पद से हटाने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में समझते हैं कि मालदीव की संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया है और क्या है इसका पूरा गणित?

मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है. मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 10:27 PM IST

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को पद से हटाने की तैयारी चल रही है. दो मुख्य विपक्षी पार्टियां उनके खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में हैं. 

मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग की तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब महीनेभर में भारत और मालदीव के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. जानकारी के मुताबिक, मालदीव की मुख्य विपक्षी पार्टी मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) संसद में महाभियोग लाने जा रही है. इसे द डेमोक्रेट्स पार्टी का समर्थन भी मिल रहा है. 

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ये दोनों वहीं पार्टियां हैं, जो हाल ही में भारत के समर्थन खुलकर सामने आई थीं. इन दोनों पार्टियों ने कहा था कि 'मौजूदा सरकार का भारत विरोधी रुख चिंताजनक है. किसी भी बड़े साझेदार विशेष रूप से लंबे समय से हमारे सहयोगी देश को अलग-थलग करना हमारे लिए हितकर नहीं है.'

एमडीपी का कहना है कि राष्ट्रपति मुइज्जू को पद से हटाने के लिए जल्द ही संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा. पार्टी का दावा है कि प्रस्ताव पर सांसदों के समर्थन के लिए हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं.

पर ये महाभियोग क्यों?

मोहम्मद मुइजू को राष्ट्रपति बने अभी तीन महीने भी नहीं हुए हैं. नवंबर 2023 में ही वो चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने हैं. और विपक्ष उन्हें अभी पद से हटाने की कोशिश में जुट गया है. पर सवाल है कि क्यों?

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इसके पीछे मुइज्जू का भारत विरोधी रुख भी माना जा रहा है. मालदीव की संसद में जो दो पार्टियां उनके खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहीं हैं, उन्होंने भारत विरोधी रुख को लेकर मुइज्जू सरकार की आलोचना की थी.

दोनों पार्टियों ने हाल ही में कहा था कि मालदीव की मौजूदा सरकार को देश के लोगों की भलाई के लिए सभी सहयोगी देशों के साथ काम करना चाहिए. हिंद महासागर में स्थिरता और सुरक्षा मालदीव के लिए जरूरी है.

जब से मुइज्जू की सरकार आई है, तब से भारत और मालदीव में तनाव बढ़ गया है. मुइज्जू ने अपना चुनाव इंडिया आउट कैंपेन पर लड़ा था. मुइज्जू को चीन का समर्थक माना जाता है. हालांकि, वो इस बात से इनकार करते हैं. इसके बाद मुइज्जू सरकार ने 15 मार्च तक सभी भारतीय सैनिकों को वापस लौट जाने को भी कह दिया है. इतना ही नहीं, पिछली सरकारों में भारत के साथ हुए कई समझौतों को भी मुइज्जू सरकार ने रद्द कर दिया है.

इसके अलावा दूसरी वजह मुइज्जू कैबिनेट में नए सदस्यों को लाने का भी है. संसद में मुइज्जू की पीपल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) और प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम) के गठबंधन की सरकार है. ये गठबंधन कैबिनेट में नए सदस्यों को लाना चाहता है, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं चाहता. 

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हाल ही में कैबिनेट में चार सदस्यों की मंजूरी को लेकर जमकर विरोध हुआ था. जब वोटिंग हुई तो एक सदस्य को तो मंजूरी मिल गई, लेकिन तीन की रुक गई. अब तक मुइज्जू कैबिनेट के 22 सदस्यों में से 19 सदस्यों को मंजूरी मिल चुकी है.

क्या मुइज्जू हट जाएंगे?

मालदीव की पीपल्स मजलिस यानी संसद में 80 सीटें हैं. संसद में राष्ट्रपति मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए 54 सांसदों का समर्थन जरूरी है.

मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 43 और द डेमोक्रेट्स के पास 13 सांसद हैं. इस तरह दोनों पार्टियों के कुल 56 सांसद हैं. इसलिए दोनों पार्टियां मिलकर मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकतीं हैं. 

स्थानीय मीडिया में एमडीपी के नेताओं ने दावा किया है कि उनके पास महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त सांसदों का समर्थन है. हालांकि, अभी इसे स्पीकर के पास नहीं भेजा गया है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि संसदीय चुनावों के बाद महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है. मालदीव में इस साल मार्च में संसदीय चुनाव होने हैं. 

प्रस्ताव पास होने का क्या है गणित?

मालदीव की संसद में वैसे तो 87 सदस्य हैं, लेकिन हाल ही में 7 सदस्यों के इस्तीफे के बाद कुल 80 सदस्य बचे हैं. ऐसे में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए 58 की बजाय 54 सांसदों के वोट की ही जरूरत है.

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स्पीकर के पास प्रस्ताव भेजा जाता है. प्रस्ताव मिलने के 14 दिन बाद इस पर बहस होती है. महाभियोग पर तीन घंटे की बहस होती है. राष्ट्रपति को अपने बचाव में बोलने के लिए 30 मिनट का समय मिलता है.

मालदीव के संविधान के मुताबिक, प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम एक तिहाई सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी है. जबकि, इसके पास होने के लिए दो तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए. अभी के आंकड़े देखें तो मालदीव में विपक्ष मजबूत है. विपक्ष के पास 56 सांसद हैं.

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