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10 साल की बच्ची की किडनैपिंग, फिर जबरन शादी... पाकिस्तान का सिंध प्रांत कैसे बना हिंदुओं के लिए जहन्नुम?

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक बार फिर हिंदू बच्ची को किडनैप कर जबरन धर्मांतरण करवाकर उसकी शादी मुस्लिम शख्स से करवाने का मामला सामने आया है. गनीमत रही कि बच्ची को बचा लिया गया है. लेकिन हर साल सिंध में हजारों हिंदू लड़कियों के साथ ऐसी ज्यादती की जाती है.

पाकिस्तान के सिंध में हर साल हजारों लड़िकयों का धर्मांतरण करवाया जाता है. (AI Generated Image) पाकिस्तान के सिंध में हर साल हजारों लड़िकयों का धर्मांतरण करवाया जाता है. (AI Generated Image)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:10 PM IST

पहले अपहरण, फिर जबरन धर्मांतरण और आखिर में किसी अधेड़ शख्स से शादी. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक लड़कियों के साथ ऐसा आए दिन होता है. खासकर हिंदू लड़कियों के साथ.

अब ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है. सिंध में 10 साल की एक हिंदू बच्ची को अगवा कर जबरन उसका धर्मांतरण करवाया गया. इसके बाद उसकी शादी किसी अधेड़ मुस्लिम शख्स से करवा दी गई. गनीमत रही कि उसे बचा लिया गया.

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माइनोरिटी राइट्स पर काम करने वाले एनजीओ 'पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद' के अध्यक्ष शिवा काच्ची ने बताया कि 10 साल की बच्ची को पिछले हफ्ते कोट गुलाम मोहम्मद गांव से उसके घर के बाहर से अगवा कर लिया गया था. उसे जबरदस्ती इस्लाम में कन्वर्ट किया गया. फिर उसकी शादी एक बुजुर्ग मुस्लिम से करवा दी गई. उन्होंने बताया कि पुलिस की मदद से बच्ची को बचाया गया. 

उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही 15 साल की एक हिंदू बच्ची को अगवा किया गया था. उसका धर्मांतरण करवाकर 50 साल के मुस्लिम शख्स से शादी करवा दी गई है. हालांकि, अभी तक बच्ची को ढूंढा नहीं जा सका है. उन्होंने बताया कि पिछले रविवार से एक और लड़की गायब है. जिन लोगों ने उसे अगवा किया है, उन्होंने शादी और धर्मांतरण के फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए होंगे, ताकि बताया जा सके कि वो 20 साल की थी और उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया था.

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इसी साल जून में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने माना था कि उनके देश में अल्पसंख्यकों को धर्म के नाम पर टारगेट किया जा रहा है और उनकी सरकार उन्हें बचाने में नाकाम रही है. ख्वाजा आसिफ ने संसद में कहा था कि पाकिस्तान में हर दिन अल्पसंख्यकों की हत्या हो रही है. पाकिस्तान में कोई भी धार्मिक अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है.

हर साल हजार लड़कियों का जबरन धर्मांतरण 

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की लड़कियों का अपहरण किया जाना, उनके साथ बलात्कार करना, बाद में शादी करके जबरन उनका धर्म बदलवा देना, ये सब आम है. अमेरिका की रिलिजियस फ्रीडम की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यहां हर साल एक हजार से ज्यादा लड़कियों का जबरन शादी के बाद धर्मांतरण करवा दिया जाता है. 

जबरन शादी और फिर जबरन धर्मांतरण की ये घटनाएं हिंदू और ईसाई लड़कियों में सबसे ज्यादा होती हैं. इन धर्मों की नाबालिग लड़कियों को पहले किडनैप किया जाता है, उनसे बलात्कार किया जाता है और बाद में उनकी उम्र से तीन-चार गुना बड़े व्यक्ति से शादी करवा दी जाती है और धर्मांतरण कर दिया जाता है.

अमेरिकी सरकार की रिपोर्ट में ऐसे कई उदाहरण दिए गए हैं, जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति की कड़वी सच्चाई दिखाते हैं. एक ऐसा ही उदाहरण 18 साल की पूजा कुमारी का है. रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2022 में सिंध प्रांत से पूजा कुमारी को अगवा किया गया और फिर जबरदस्ती उससे शादी करने की कोशिश की गई. जब पूजा ने विरोध किया तो गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई.

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इसी तरह से एक उदाहरण 12 साल की क्रिश्चियन लड़की का भी है. अप्रैल 2022 में उसे अगवा किया गया, फिर जबरन धर्मांतरण किया गया और फिर 40 साल के शख्स से उसकी शादी करवा दी गई. अदालत ने लड़की के माता-पिता का केस खारिज कर दिया और कहा कि लड़की ने अपनी मर्जी से धर्म बदला और शादी की. 

ऐसे लोगों पर क्यों नहीं होता एक्शन?

'सेंटर फॉर डेमोक्रेसी, प्लूरलिज्म एंड ह्यूमन राइट्स' की एक रिपोर्ट बताती है कि सिंध प्रांत में हर साल हजार हिंदू लड़कियों और 700 ईसाई लड़कियों का जबरन धर्मांतरण करवाया जाता है. धर्मांतरण के बाद उनकी शादी करवा दी जाती है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जब लड़की के परिवार वाले एफआईआर दर्ज करवाते हैं, तो इसके बदले में अगवा करने वाले भी क्रॉस एफआईआर दर्ज करवा देते हैं और दावा करते हैं कि लड़की ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया था. ज्यादातर मामलों में जब तक मुकदमा अदालत में चलता है, तब तक लड़की अगवा करने वालों के पास ही रहती है. आखिर में ऐसे लोग फर्जी दस्तावेज दिखाकर साबित कर देते हैं कि ये सब लड़की की मर्जी से हुआ है और कोर्ट मुकदमा खारिज कर देती है.

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अल्पसंख्यक धर्म से जुड़ी नाबालिग लड़कियों के अपहरण, धर्मांतरण और जबरदस्ती शादी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट कहती है कि जब किसी लड़की के अगवा होने और उसका बलात्कार होने का मामला तूल पकड़ता है, तो आरोपी उससे जबरदस्ती शादी कर लेते हैं.

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ये सारा खेल बड़े संगठित तरीके से किया जाता है. अल्पसंख्यकों को पैसे और घर का लालच देकर जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है.

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की पूर्व अध्यक्ष जोहरा युसुफ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि सिंध प्रांत में लड़कियों का अपरहण कर धर्मांतरण किया जा रहा है और जबरदस्ती मुस्लिम व्यक्ति से उनकी शादी करवाई जा रही है. वो कहती हैं कि जब ये अदालतों से मदद मांगती है तो बहस इस पर होती है कि लड़की बालिग है या नहीं. ज्यादातर मामलों में इंसाफ तो मिलता नहीं है, लेकिन अगर किसी मामले में इंसाफ मिल भी जाए तो वो अपने साथ हुई ज्यादतियों से उबर नहीं पातीं.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भी सिंध प्रांत में अल्पसंख्यकों के हालात पर चिंता जताई गई थी. इस रिपोर्ट में जबरदस्ती धर्मांतरण करवाने वाले एक पीर के भाई का एक बयान भी लिया गया था. इसमें पीर का भाई बड़े घमंड के साथ कहता है कि हमने इतने हिंदुओं को मुस्लिम बनाया है कि उनकी गिनती भी नहीं की जा सकती.

मंदिरों में खोल दिए दुकान-बूचड़खाने

2014 में ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट ने एक सर्वे किया था. इस सर्वे में दावा किया गया था कि बंटवारे के समय पाकिस्तान में 428 मंदिर थे, लेकिन 1990 के दशक के बाद इनमें से 408 मंदिरों में खिलौने की दुकानें, रेस्टोरेंट, होटल्स, दफ्तर, सरकारी स्कूल या मदरसे खुल गए.

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इस सर्वे में ये भी सामने आया था कि अल्पसंख्यकों की पूजा स्थल वाली 1.35 लाख एकड़ जमीन को पाकिस्तान सरकार ने इवैक्युई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड को लीज पर दे दिया. इस ट्रस्ट का काम है विस्थापितों की जमीन पर कब्जा करना. सर्वे में दावा किया गया था कि ये जमीन 40 लाख हिंदुओं की है.

सर्वे के मुताबिक, पाकिस्तान में काली बाड़ी मंदिर था, जिसे डेरा इस्माइल खान नाम के शख्स ने खरीद लिया और वहां ताज महल होटल बना दिया. इतना ही नहीं, डेरा इस्माइल खान ने ट्रस्ट की मदद से एक श्मशान घाट पर भी कब्जा कर लिया.

इसी तरह खैबर-पख्तूनख्वाह के बन्नू जिले में हिंदू मंदिर था, वहां अब मिठाई की दुकान है. कोहाट में शिव मंदिर था, जो अब सरकारी स्कूल में बदल गया है. पेशावर में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को अब सरकारी गर्ल्स स्कूल बना दिया गया है. एबटाबाद में एक गुरुद्वारे में अब कपड़े की दुकान चलती है.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में 350 से ज्यादा मंदिर और गुरुद्वारे ऐसे हैं, जिनपर मुस्लिमों का कब्जा है. इन मंदिरों और गुरुद्वारों में बूचड़खाने और दुकानें खोल दी गई हैं.

2019 में पाकिस्तान की सरकार ने भी 400 मंदिरों में तोड़फोड़ या कब्जा होने की बात मानी थी. सरकार ने वादा किया था कि 400 मंदिरों को दोबारा रिस्टोर किया जाएगा और उन पर फिर से हिंदुओं को हक दिया जाएगा.

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पाकिस्तान में कितनी है अल्पसंख्यक आबादी? 

बंटवारे के बाद 1951 में जब जनगणना हुई तो सामने आया कि पाकिस्तान में 97 लाख से ज्यादा हिंदू और साढ़े पांच लाख के आसपास ईसाई थे. उस समय सिखों की आबादी का आंकड़ा नहीं था. 

पाकिस्तान में आखिरी बार 2017 में जनगणना हुई थी. इसके मुताबिक, यहां की आबादी 20.76 करोड़ है, जिसमें 20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम हैं. करीब 36 लाख हिंदू हैं और उनमें से भी 95 फीसदी सिंध प्रांत में रहते हैं. 26 लाख ईसाई हैं.

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