Advertisement

बिना परमिशन, NO इन्वेस्टिगेशन... MP में CBI के लिए क्यों जारी हुआ ये आदेश? जानें- किन-किन राज्यों में है ऐसा नियम

मध्य प्रदेश में मोहन यादव की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने सीबीआई जांच को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब सीबीआई को प्रदेश सरकार के किसी अफसर-कर्मचारी या मंत्री-विधायक के खिलाफ जांच के लिए राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी. ऐसे में जानते हैं कि सीबीआई तो केंद्रीय एजेंसी है, फिर उसे राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत क्यों पड़ती है?

सीबीआई को लेकर एमपी सरकार ने नया आदेश जारी किया है. (फाइल फोटो) सीबीआई को लेकर एमपी सरकार ने नया आदेश जारी किया है. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 7:56 PM IST

मध्य प्रदेश में अब सीबीआई को जांच से पहले राज्य सरकार की लिखित अनुमति लेनी होगी. हालांकि, ये लिखित अनुमति राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़ी जांच के लिए जरूरी होगी. 

इसका मतलब ये हुआ कि अगर सीबीआई को एमपी में किसी अफसर, कर्मचारी के खिलाफ कोई जांच करनी है तो उसे राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत होगी. इतना ही नहीं, एमपी के किसी मंत्री या विधायक की जांच के लिए भी मंजूरी लेनी होगी.

Advertisement

अब तक कई राज्यों ने सीबीआई की एंट्री पर अपने यहां बैन लगा रखा है. अब तक जांच के लिए जिन राज्यों में लिखित अनुमति लेनी पड़ती थी, वहां विपक्षी पार्टी की सरकार है. लेकिन मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है.

क्यों लिया सरकार ने ये फैसला?

गृह विभाग की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि एमपी सरकार के अफसरों-कर्मचारियों या राज्य सरकार से जुड़े मामले में जांच बिना लिखित अनुमति के शुरू नहीं की जाएगी.

हालांकि, केंद्र सरकार के अफसर-कर्मचारियों और किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ जांच करने के लिए लिखित अनुमति की जरूरत नहीं होगी.

एमपी सरकार ने दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1946 की धारा 3 का इस्तेमाल करते हुए ये नोटिफिकेशन जारी किया है. हालांकि, सरकार का कहना है कि ये प्रावधान पहले से था. गृह सचिव संजय दुबे ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि ये पुराना प्रावधान है, लेकिन भारतीय न्याय संहिता (BNS) के लागू होने के कारण फिर से नोटिफिकेशन जारी किया गया है.

Advertisement

कुल मिलाकर, इसका मतलब ये हुआ कि राज्य सरकार से जुड़े किसी व्यक्ति या मामले की जांच शुरू करने के लिए सीबीआई को लिखित अनुमति लेनी होगी. ये राज्य सरकार पर निर्भर करेगा कि वो जांच की अनुमति दे या न दे.

गृह विभाग ने ये नोटिफिकेशन भले ही गुरुवार को जारी किया है, लेकिन ये नियम 1 जुलाई से लागू हो गया है.

(फाइल फोटो- इंडिया टुडे आर्काइव)

CBI को सहमति की जरूरत क्यों?

सीबीआई का गठन दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1946 के तहत हुआ है. इस कानून की धारा 6 कहती है कि केंद्र सरकार और रेलवे को छोड़कर बाकी सभी मामलों से जुड़ी जांच के लिए सीबीआई को राज्य सरकार की लिखित अनुमति लेनी होगी.

सरकारों की तरफ से सीबीआई को दो तरही की अनुमति दी जाती है. एक अनुमति किसी खास केस की जांच से जुड़ी होती है और एक सामान्य सहमति होती है. आमतौर पर ज्यादातर राज्यों ने सीबीआई को 'सामान्य सहमति' दे रखी है. सामान्य सहमति मिलने पर सीबीआई राज्यों में बिना रोक-टोक जांच कर सकती है.

जब राज्य सरकार सामान्य सहमति वापस ले लेती है तो फिर सीबीआई को हर मामले में जांच के लिए मंजूरी लेनी होती है. इतना ही नहीं, छोटी-छोटी कार्रवाई के लिए भी मंजूरी लेना जरूरी होता है. सामान्य सहमति वापस लेने पर सीबीआई उस राज्य के किसी व्यक्ति या कर्मचारी के खिलाफ केस भी दर्ज नहीं कर सकती.

Advertisement

तो क्या अब CBI की एंट्री नहीं होगी?

सीबीआई भले ही केंद्र सरकार की एजेंसी है, लेकिन ये तभी किसी मामले की जांच करती है जब हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या केंद्र से आदेश मिलता है. अगर मामला किसी राज्य का है, तो जांच के लिए वहां की राज्य सरकार से अनुमति लेनी होती है.

एमपी सरकार के नोटिफिकेशन में कहीं भी 'सामान्य सहमति' वापस लेने का जिक्र नहीं है. यानी, सीबीआई अब भी एमपी में बिना रोक-टोक जांच कर सकती है. 

हालांकि, सीबीआई को एमपी में राज्य सरकार के किसी कर्मचारी-अफसर या मंत्री-विधायक के खिलाफ जांच करनी है तो उसे राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी.

(फाइल फोटो-AFP)

कहां-कहां बैन है CBI की एंट्री?

देश के कई राज्यों में सीबीआई की एंट्री पर बैन है. यहां अगर सीबीआई को जांच करना है तो उसे राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी.

झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और केरल में सीबीआई की एंट्री पूरी तरह बैन है. यहां राज्य सरकारों ने सीबीआई को दी जाने वाली सामान्य सहमति वापस ले ली है.

पहले मेघालय, मिजोरम, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी विपक्षी पार्टी की सरकार होने पर सीबीआई की एंट्री पर रोक लगा दी गई थी. हालांकि, इन चारों राज्यों में एनडीए सरकार आने के बाद सामान्य सहमति फिर से दे दी है.

Advertisement

क्या बाकी एजेंसियों को भी मंजूरी लेनी होती है?

सीबीआई को तो राज्य सरकार की अनुमति लेनी होती है. लेकिन केंद्र की बाकी एजेंसियों को ऐसी जरूरत नहीं पड़ती. चाहे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) हो या प्रवर्तन निदेशालय (ED) हो. ये एजेंसियों पूरे देश में कहीं भी जाकर जांच कर सकतीं हैं. इन्हें राज्यों में जांच करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं होती.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement