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मर्जी से तलाक लेने पर महिला को पति से क्यों नहीं मिलेगा गुजारा-भत्ता? केरल हाईकोर्ट ने समझाया

एक मामले में फैसला देते हुए केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी मर्जी से तलाक लेती है तो फिर वो पति से गुजारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं है. ये मामला मुस्लिम महिला से जुड़ा था. महिला ने पति को 'खुला' के जरिए तलाक दिया था.

केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

अपनी मर्जी से तलाक लेने पर मुस्लिम महिला को पति से गुजारा-भत्ता पाने का हक क्यों नहीं है? इस पर केरल हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है.

एक मामले में सुनवाई के दौरान केरल हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर कोई मुस्लिम महिला मर्जी से तलाक लेती है, तो वो पति से गुजारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत उसे गुजारा-भत्ता नहीं मिल सकता.

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अगर कोई मुस्लिम महिला अपनी सहमति और मर्जी से तलाक लेती है तो इसे इस्लामी प्रथा में 'खुला' कहा जाता है. 

कोर्ट ने कहा कि अगर मुस्लिम महिला अपनी सहमति या मर्जी से पति को तलाक देती है या फिर किसी कारण से पति के साथ रहने से मना करती है या फिर सहमति से ही दोनों अलग-अलग रह रहे हों तो वो सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं है.

क्या था मामला?

लाइवलॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने गुजारा-भत्ता के लिए सबसे पहले फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी. उसने अपने लिए हर महीने 15 हजार और बच्चे के लिए 12 हजार रुपये के गुजारा-भत्ता की मांग की थी.

महिला ने दावा किया था कि वो दिसंबर 2018 तक अपने पति के साथ रह रही थी. लेकिन बाद में पति पर एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का आरोप लगाकर वो अलग हो गई थी. महिला का कहना था कि 27 मई 2021 को उसने 'खुला' के जरिए तलाक दे दिया था.

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वहीं, पति ने दावा किया था कि वो अपना कारोबार करता था. जब कारोबार में उसे नुकसान हुआ तो दिसंबर 2018 में उसकी पत्नी उससे अलग हो गई. पति ने अपनी पत्नी पर एक्स्ट्रा-मैरिटल रिलेशनशिप का आरोप लगाया था.

फैमिली कोर्ट ने पाया कि पति के पास पत्नी के एक्स्ट्रा-मैरिटल रिलेशनशिप के आरोप साबित करने के कोई सबूत नहीं है. फैमिली कोर्ट ने पत्नी और उसके बच्चे को 10-10 हजार रुपये हर महीने गुजारा भत्ता देने का फैसला सुनाया था.

गुजारा-भत्ता पाने की हकदार क्यों नहीं?

हाईकोर्ट के जज जस्टिस ए. बदरूद्दीन ने कहा, जब पत्नी 'खुला' के जरिए पति को तलाक दे रही है तो इसका मतलब वो उसके साथ रहने से मना कर रही है. 

उन्होंने कहा, अगर पत्नी ने 'खुला' के जरिए तलाक लिया है तो उसने अपनी इच्छा से पति के साथ रहने से इनकार कर दिया है, इसलिए सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत गुजारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला दूसरी शादी करने तक पति से गुजारा-भत्ता की मांग कर सकती है, बशर्ते तलाक का कोई ठोस कारण हो. 

अदालत ने कहा, सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत कोई भी तलाकशुदा महिला पति से गुजारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं है, अगर वो किसी और के साथ रह रही है या फिर बिना किसी कारण से पति से अलग रह रही है या फिर आपसी सहमति से अलग रहने का फैसला लिया हो. 

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जस्टिस बदरूद्दीन ने कहा कि 'खुला' का मतलब भी यही हुआ कि पत्नी अपनी मर्जी से पति के साथ नहीं रहना चाहती है. लिहाजा वो गुजारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं हो.

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच 2019 में मुकदमा शुरू हुआ और दोनों दिसंबर 2018 तक साथ थे. वहीं खुला 27 मई 2021 से प्रभावी है. लिहाजा पत्नी को हर महीने 7 हजार और बच्चे को 10 हजार रुपये का गुजारा-भत्ता 27 मई 2021 तक मिलेगा.

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