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हर साल 200 हादसे, सैकड़ों मौतें... जानें फिर भी क्यों सबसे सेफ माना जाता है फ्लाइट का सफर

आंकड़े बताते हैं कि हवाई सफर करना ज्यादा सुरक्षित है. सड़क और रेल से सफर करना ज्यादा खतरे भरा है. जानकारों का भी कहना है कि हवा में 38 हजार फीट की ऊंचाई पर सफर करना जमीन पर ड्राइविंग करने से ज्यादा सेफ है. ऐसे में जानते हैं कि सैकड़ों हादसे और मौतों के बावजूद हवाई यात्रा को सेफ क्यों माना जाता है?

हवाई सफर को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर) हवाई सफर को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 12:19 PM IST

नेपाल में बुधवार को एक बड़ा विमान हादसा हुआ. इस विमान में 19 लोग सवार थे, जिनमें से 18 की मौत हो गई. हादसे में एकमात्र पायलट की ही जान बच सकी. जो विमान हादसे का शिकार हुआ, वो सौर्य एयरलाइंस का बॉम्बार्डियर CRJ-200 एयरक्राफ्ट था.

ये हादसा काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट पर हुआ. सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि विमान पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जा रहा था, लेकिन टेकऑफ होते ही कुछ मिनटों के अंदर ये दाईं और मुड़ गया रनवे पर ही क्रैश हो गया. इस विमान को दाईं की जगह बाईं ओर मुड़ना था. हादसे के वीडियो में दिख रहा था कि ये एयक्राफ्ट पूरी तरह जलकर खाक हो गया था.

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ये इस साल का अब तक का सबसे बड़ा विमान हादसा है. इससे पहले मार्च में रूसी वायुसेना का एक प्लेन क्रैश हुआ था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी.

नेपाल में हवाई सफर को सबसे अनसेफ माना जाता है. उसकी वजह नेपाल का पहाड़ों से घिरा होना और तेजी से मौसम बदलना है. पिछले साल ही जनवरी में येति एयरलाइंस का विमान क्रैश हो गया था. इस हादसे में 72 यात्रियों की मौत हो गई थी. बीते 24 साल में नेपाल में विमान हादसों में 350 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन क्रैश हो चुके हैं. प्लेन क्रैश की 813 घटनाओं में 1,473 यात्रियों की मौत हो चुकी है.

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सबसे ज्यादा विमान हादसे लैंडिंग के दौरान होते हैं. इन सात साल में लैंडिंग के दौरान 261 हादसे हुए हैं. उसके बाद 212 हादसे उड़ान के दौरान ही हुए हैं. 

इसी दौरान भारत में 14 हादसे हुए हैं. हालांकि, इन हादसों में सिर्फ एक ही ऐसा हादसा था, जिसमें यात्रियों की मौत हुई थी. अगस्त 2020 में केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट में एयर इंडिया एक्सप्रेस का बोइंग 737-800 लैंडिंग के दौरान रनवे पर फिसलकर क्रैश हो गया था. इस विमान में 190 यात्री सवार थे, जिनमें से 21 की मौत हो गई थी.

ये हादसा इतना भयानक था कि विमान कई टुकड़ों में टूट गया था. एक साल बाद जांच रिपोर्ट में इस हादसे की वजह पायलट को माना गया था. 257 पन्नों की जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि पायलट ने तय एसओपी को नजरअंदाज किया था.

फिर भी सबसे सेफ मानी जाती है हवाई यात्रा!

आंकड़े देखें तो बीते 7 साल में हर साल औसतन 200 विमान हादसे हुए हैं. और सालभर में ही सैकड़ों से ज्यादा लोगों की जान गई है. लेकिन इसके बावजूद भी फ्लाइट के सफर को सबसे सुरक्षित माना जाता है.

फ्लोरिडा की एम्ब्री-रिडल एयरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंथनी ब्रिकहाउस ने सीएनएन को बताया कि हवाई सफर ट्रांसपोर्टेशन का सबसे सुरक्षित साधन है. उन्होंने कहा, 38 हजार की फीट की ऊंचाई पर उड़ना, जमीन पर ड्राइव करने से ज्यादा सुरक्षित है.

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इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोएशन (IATA) की सालाना सेफ्टी रिपोर्ट में बताया गया था कि 2023 में दुनियाभर में 3.7 करोड़ से ज्यादा विमानों ने उड़ान भरी. ये संख्या 2022 की तुलना में 17% ज्यादा है. इसके बावजूद सिर्फ एक ही हादसा था, जिसमें लोगों की जान गई थी. पिछले साल नेपाल में हुए विमान हादसे में 72 लोगों की मौत हो गई थी.

इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 12.6 लाख विमान उड़ते हैं, तब एक हादसा होता है. जबकि, 2022 में 13 लाख से ज्यादा विमानों के उड़ान भरने पर एक हादसा हुआ था. अगर पांच साल का औसत निकाला जाए तो 8.80 लाख फ्लाइट के उड़ान भरने पर एक हादसा हुआ.

IATA का दावा है कि अगर कोई व्यक्ति 1,03,239 सालों तक हर दिन हवाई सफर करेगा, तब जाकर एक दिन कोई ऐसा मौका आएगा, जब वो हादसे का शिकार होगा. 

मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर अर्नॉल्ड बार्नेट ने एविएशन सेफ्टी पर एक रिपोर्ट की थी. इसमें दावा किया गया था कि 2018 से 2022 के बीच अगर 1.34 करोड़ यात्रियों ने हवाई सफर किया है, तो उसमें से सिर्फ एक को ही मौत का खतरा है. इसका मतलब हुआ कि अगर आप हवाई सफर कर रहे हैं तो मौत का खतरा बहुत कम है. 

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भारत में कितना सेफ है हवाई सफर?

आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में भी हवाई सफर सेफ ही है. बीते पांच साल में भारत में सिर्फ एक ही ऐसा विमान हादसा हुआ है, जिसमें यात्रियों की मौत हुई हो.

सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में देशभर में डेढ़ लाख से ज्यादा रोड एक्सीडेंट हुए थे. इन हादसों में 61 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे. देखा जाए तो सड़क हादसों में हर दिन औसतन 167 लोगों की जान चली गई.

इसी तरह रेल हादस भी थम नहीं रहे हैं. 2022-23 में 48 रेल हादसे हुए थे, जिनमें 9 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि, इन आंकड़ों में ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे के आंकड़े शामिल नहीं है. ओडिशा के बालासोर में पिछली साल जून में बड़ा हादसा हो गया था, जिसमें 300 से ज्यादा यात्रियों की मौत हो गई थी. हाल ही में पश्चिम बंगाल में कंचनजंगा एक्सप्रेस और यूपी के गोंडा में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई थी. कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे में 10 तो चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे में 4 यात्रियों की मौत हो गई थी.

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