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चीन से फंडिंग, कश्मीर-अरुणाचल पर साजिश और गौतम नवलखा-नेविल राय सिंघम से लिंक... NewsClick Case में नए दावे

NewsClick Case: न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने रिमांड एप्लीकेशन में कई सारे आरोप लगाए हैं. पुलिस का दावा है कि जांच में पता चला है कि विदेश से आई फंडिंग का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों में किया गया.

न्यूजक्लिक फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ. (फाइल फोटो) न्यूजक्लिक फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 1:44 PM IST

NewsClick Case: न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दोनों की 14 दिन की रिमांड मांगी थी. हालांकि, कोर्ट ने अभी सिर्फ सात दिन की ही रिमांड दी.

रिमांड मांगते समय स्पेशल सेल ने आरोप लगाया है कि चीन का प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए पैसे मिले थे. उन्होंने ये कहानी फैलाने की साजिश रची थी कि कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश विवादित इलाके हैं.

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प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती को मंगलवार को स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था. इससे पहले पुलिस ने न्यूजक्लिक से जुड़े 88 ठिकानों पर छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप, कम्प्यूटर समेत तकरीबन 80 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को जब्त कर लिया था. 

स्पेशल सेल ने क्या-क्या आरोप लगाए?

रिमांड एप्लीकेशन में स्पेशल सेल ने बताया, 'सीक्रेट इनपुट से पता चला है कि पुरकायस्थ, नेविल रॉय सिंघम और सिंघम की शंघाई स्थित कंपनी के चीनी कर्मचारियों के बीच मेल पर बातचीत होती थी. ये इनके अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं दिखाने के इरादे को उजागर करता है.'

एप्लीकेशन में आरोप लगाया गया है, 'इन व्यक्तियों की इस तरह की कोशिशों से वैश्विक और घरेलू स्तर पर एक कहानी फैलाने की साजिश का पता चलता है कि कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश विवादित इलाके हैं.'

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'भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ छेड़छाड़ और कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के भारत के हिस्सों के रूप में न दिखाना एकता और अखंडता को कमजोर करने की मंशा से किया गया कृत्य है.'

स्पेशल सेल के मुताबिक, 'ये भी पता चला है कि न्यूजक्लिक के शेयरहोल्डर गौतम नवलखा एंटी-इंडिया और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे. जैसे प्रतिबंधित नक्सली संगठनों का समर्थन करना और देश विरोधी तत्वों और पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आईएसआई के एजेंट गुलाम नबी फई से उनकी साठगांठ थी.'

सरकार को बदनाम करने की साजिश रची!

पुलिस का कहना है कि ये भी पता चला है कि पुरकायस्थ और उसके सहयोगियों ने विदेशी फंडिंग की हेराफेरी की. अवैध विदेशी फंडिंग के जरिए किसान आंदोलन को लंबा खींचकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नष्ट करने की साजिश रची.

पुलिस ने ये भी कहा कि कोविड महामारी के रोकने के भारत सरकार के प्रयासों को बदनाम करने के लिए एक झूठी कहानी गढ़ी गई.

रिमांड एप्लीकेशन में आरोप लगाया गया है कि पुरकायस्थ ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए 'पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज्म' संगठन के साथ मिलकर साजिश रची थी.

इतना ही नहीं, ये भी पता चला है कि न्यूजक्लिक के मालिकाना हक वाले पीपुल्स डिस्पैच पोर्टल का इस्तेमाल एक साजिश के तहत झूठी कहानियां फैलाने के लिए किया गया. ये सब विदेश से मिली फंडिंग के बदले में किया गया था.

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नेविल रॉय सिंघम. (फाइल फोटो)

और क्या आरोप लगे हैं?

पुलिस ने बताया कि ईमेल का एनालिसिस करने पर पता चला है कि सिंघम, पुरकायस्थ और चक्रवर्ती एक-दूसरे के संपर्क में थे. 

वो तीनों इस बात पर चर्चा करते थे कि कश्मीर के बिना भारत का नक्शा कैसे दिखाया जाए. साथ ही अरुणाचल प्रदेश को विवादित इलाके के रूप में कैसे दिखाया जा सकता है.

इस मकसद को हासिल करने के लिए आरोपी ने विदेशी फंड की आड़ में 115 करोड़ रुपये से ज्यादा लिए थे.

क्या है मामला?

इस साल अगस्त में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट छापी थी. इसमें दावा किया गया है कि  'न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक एक ग्लोबल नेटवर्क का हिस्सा था, जिसे अमेरिकी करोड़पति नेविल रॉय सिंघम से फंड मिल रहा था.' 

दिल्ली पुलिस ने इस साल 17 अगस्त को आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए और आईपीसी की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया था. इसी मामले में मंगलवार को छापेमारी की गई.

पुलिस ने यूएपीए की धारा-16, 17, 18 और 22C के तहत केस दर्ज किया है. साथ ही एफआईआर में आईपीसी की धारा-153A (दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 120B (आपराधिक साजिश) भी लगाई गई है. 

पुलिस ने बताया कि इस मामले में 46 लोगों से पूछताछ की गई है. इनमें 37 पुरुषों से स्पेशल सेल के दफ्तर में और 9 महिलाओं से उनके घर पर पूछताछ की गई.

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इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी फंडिंग के सोर्सेस की जांच के लिए न्यूजक्लिक के परिसरों पर छापेमारी की थी. 

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