
Nobel Peace Prize: ईरान की नरगिस मोहम्मदी को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया है. नरगिस मोहम्मदी महिला अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वालीं मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं.
नरगिस मोहम्मदी को ईरान की सरकार ने 13 बार गिरफ्तार किया है. 51 साल की नरगिस ने अपने 31 साल जेल में ही बिताए हैं. उन्हें 154 कोड़ों की सजा भी सुनाई गई थी.
हर साल जब भी नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की जाती है, तो ये बहस आम हो जाती है कि महात्मा गांधी को इससे सम्मानित क्यों नहीं किया गया? क्योंकि इस युग में तो उन्हें ही सबसे बड़ा शांति दूत माना जाता है.
पांच बार हुए थे नॉमिनेट
महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पांच बार नॉमिनेट किया गया था. उन्हें लगातार 1937, 1938 और 1939 में नॉमिनेट किया गया था. इसके बाद 1947 में भी उन्हें नामांकित किया गया था.
आखिरी बार 1948 में भी उन्हें नॉमिनेट किया गया था. लेकिन चार दिन बाद ही 30 जनवरी को उनकी हत्या कर दी गई.
नोबेल पुरस्कार की वेबसाइट पर गांधी को '20वीं सदी में अहिंसा का सबसे मजबूत प्रतीक' के रूप में बताया गया है. लेकिन उन्हें कभी इसके लिए नहीं चुना गया.
1960 तक नोबेल शांति पुरस्कार आमतौर पर अमेरिकी या यूरोपीय नागरिक को ही मिलता था. 1936 में पहली बार गैर-अमेरिकी और गैर-यूरोपीय को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उस साल लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना के कार्लोस सावेदरा लमास को ये पुरस्कार मिला था.
1960 में पहली बार किसी अफ्रीकी (अल्बर्ट जॉन लुतुली) और 1973 में एशियाई (हेनरी किसिंजर और ले डुक थो) को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
नामांकित होने पर भी क्यों नहीं मिला?
गांधी को 1937 में पहली बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. तब नॉर्वे के सांसद ओले कोल्बजॉर्नसेन ने उनका नाम भेजा था. नोबेल कमेटी ने जिन 13 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया था, उनमें गांधी का नाम भी था.
हालांकि, नोबेल कमेटी ने उनके नाम को नजरअंदाज कर दिया. तब नोबेल कमेटी के एक सलाहकार प्रोफेसर जैकब वॉर्म-मुलर ने गांधी पर 'आलोचनात्मक टिप्पणी' की थी.
वॉर्म-मुलर ने लिखा, 'बापू एक अच्छे, नेक और तपस्वी व्यक्ति हैं. वो स्वतंत्रता सेनानी, आदर्शवादी और राष्ट्रवादी हैं. वो अक्सर मसीहा होते हैं लेकिन फिर अचानक एक साधारण राजनेता बन जाते हैं.' उन्होंने ये भी लिखा कि गांधी हमेशा 'शांतिवादी' नहीं रहे.
अपनी बात को सही साबित करनेके लिए वॉर्म-मुलर ने 1920-21 असहयोग आंदोलन की एक घटना का जिक्र किया, जब चौरी-चौरा में भीड़ ने कई पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी और पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी.
वॉर्म-मुलर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि गांधीजी के आंदोलन सिर्फ भारतीयों तक सीमित थे. दक्षिण अफ्रीका में भी उनका आंदोलन भारतीयों के लिए था. उन्होंने अश्वेतों के लिए कुछ नहीं किया, जबकि वो भारतीयों से ज्यादा बदतर जिंदगी जी रहे थे.
आखिरकार 1937 का नोबेल शांति पुरस्कार चेलवुड के लॉर्ड सेसिल को दिया गया.
इसके बाद 1938 और 1939 में फिर से ओले कोल्बजॉर्नसेन ने महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया. लेकिन नोबेल कमेटी ने फिर नजरअंदाज कर दिया.
1947 में क्या हुआ?
1947 में बीजे खेर, गोविंद बल्लभ पंत और जीवी मवलांकर ने नोबेल कमेटी के पास गांधी का नाम भेजा. उन्होंने गांधी को 'विश्व शांति का सबसे प्रभावी चैम्पियन' बताया.
लेकिन उस साल कमेटी के सलाहकार जेन्स अरुप सीप ने गांधी के नाम का न तो समर्थन किया और न ही विरोध किया. वो इसलिए क्योंकि उस साल बंटवारे के कारण भारत में जबरदस्त हिंसा हुई थी.
उस साल नोबेल कमेटी के पांच में से दो सदस्य- हरमन स्मिट इंगेब्रेट्सन और क्रिश्चियन ऑफ्टेडल ने गांधी को शांति पुरस्कार दिए जाने का समर्थन किया.
आखिरकार उस साल नोबेल शांति पुरस्कार मानवाधिकार आंदोलन 'द क्वेकर्स' को दिया गया.
... तो 1948 में मिल जाता!
1948 में क्वेकर्स ने खुद गांधी का नाम इस पुरस्कार के लिए सुझाया. लेकिन नामांकन की आखिरी तारीख से दो दिन पहले ही उनकी हत्या कर दी गई.
तब कमेटी के सलाहकार जेन्स अरुप सीप ने लिखा कि 'गांधी ने भारत के भीतर और बाहर लोगों पर जो गहरी छाप छोड़ी, उसे देखते हुए उनकी तुलना सिर्फ धर्म के संस्थापक से की जा सकती है.'
उस समय तक मरणोपरांत नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया जाता था. हालांकि, कुछ परिस्थितियों में दिया भी जा सकता था. लेकिन यहां एक समस्या ये भी थी कि गांधीजी की कोई वसीयत नहीं थी. ऐसे में पुरस्कार राशि किसे दी जाती?
कमेटी के एक और सलाहकार वकील ओले टोरलीफ रोएड ने मरणोपरांत पुरस्कार पर सुझाव मांगे. हालांकि, उन्हें कोई सकारात्मक राय नहीं मिली. उन्हें सुझाया गया कि मरणोपरांत शांति पुरस्कार तभी दिया जाना चाहिए, जब कमेटी के फैसले के बाद पुरस्कार पाने वाले का निधन हुआ हो.
उस साल नोबेल कमेटी ने ऐलान किया कि शांति पुरस्कार के लिए इस साल कोई 'जीवित व्यक्ति' हकदार नहीं है. आखिरकार, उस साल किसी को भी शांति पुरस्कार नहीं दिया गया.
अब तक 141 शांति पुरस्कार दिए गए
नोबेल पुरस्कार की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, 1901 में शुरुआत के बाद से अब तक शांति के क्षेत्र में 141 नोबेल पुरस्कार दिए जा चुके हैं. इनमें 111 व्यक्ति और 30 संस्थाएं हैं.
इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस को दो बार और यूएन हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजिस को तीन बार शांति पुरस्कार मिल चुका है. हर साल 10 दिसंबर को ये पुरस्कार दिए जाते हैं.
पहला नोबेल शांति पुरस्कार जीन हेनरी ड्यूनेंट और फ्रेडरिक पासी को संयुक्त रूप से दिया गया था.