
साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. दावा है कि नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया से लगने वाली सीमाओं पर सैनिक और भारी हथियारों की तैनाती कर दी है.
न्यूज एजेंसी ने साउथ कोरिया की सेना का हवाला देते हुए बताया है कि नॉर्थ कोरिया ने उन गार्ड पोस्ट को फिर से मरम्मत करना शुरू कर दिया है, जिन्हें 2018 में हुए सैन्य समझौते के बाद नष्ट कर दिया गया था.
साउथ कोरिया की सेना ने ये भी दावा कि नॉर्थ कोरियाई सैनिकों को सीमा के पास खुदाई करते हुए भी देखा गया है. साथ ही यहां पर भारी हथियार भी देखे गए हैं. नॉर्थ कोरिया के सैनिक जिस जगह पर सैन्य गतिविधि कर रहे हैं, वो डिमिलिटराइज्ड जोन है, जो 1950 के दशक से ही दोनों देशों के बीच बॉर्डर की तरह काम कर रहा है.
साउथ कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को पत्रकारों को नॉर्थ कोरिया की सैन्य गतिविधि वाली तस्वीरें भी दिखाईं. दावा है कि नॉर्थ कोरिया के सैनिक राइफल, बख्तरबंद गाड़ियां और हल्के तोपखाने दिख रहे हैं.
हफ्तेभर में कैसे बढ़ा दोनों के बीच तनाव?
दोनों मुल्कों के बीच ये तनाव पिछले हफ्ते से तब बढ़ना शुरू हुआ, जब नॉर्थ कोरिया ने एक जासूसी सैटेलाइट लॉन्च करने का दावा किया.
जासूसी सैटेलाइट लॉन्च करने का दावा किए जाने के बाद साउथ कोरिया ने 2018 के समझौते से पीछे हटने का संकेत दिया और कहा कि वो सीमा पर अपनी निगरानी फिर से बढ़ाएगा. इसके जवाब में 23 नवंबर को नॉर्थ कोरिया ने कहा कि वो इस समझौते से पूरी तरह से पीछे हट रहा है.
नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया KCNA के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया कि वो किसी भी तरह के समझौते को मानने के लिए बाध्य नहीं है और तत्काल सारे सैन्य उपाय बहाल किए जाएंगे. नॉर्थ कोरिया ने धमकाते हुए ये भी कहा था कि समझौते से पीछे हटने की साउथ कोरिया को भारी कीमत चुकानी होगी.
नॉर्थ कोरिया के इस फैसले की वजह क्या?
नॉर्थ कोरिया ने 21 नवंबर को एक Malligyong-1 नाम से जासूसी सैटेलाइट लॉन्च की थी. सैटेलाइट लॉन्च करना संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन था, क्योंकि इसमें बैलेस्टिक मिसाइल की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
माना जा रहा है कि इस जासूसी सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए नॉर्थ कोरिया को कथित तौर पर रूस से मदद मिली है.
सैटेलाइट लॉन्चिंग से पहले ही साउथ कोरिया ने कहा दिया था कि अगर इसे लॉन्च किया जाता है तो ऐसे में उसके पास 2018 में हुए समझौते पर दोबारा सोचने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होगा.
दरअसल, 2018 में साउथ कोरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति मून जे-इन और नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन के बीच एक सैन्य समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत, सीमा पर बनीं 11 गार्ड पोस्ट को नष्ट कर दिया था और पूरे इलाके को डिमिलिटराइज्ड जोन घोषित कर दिया गया था.
नॉर्थ और साउथ कोरिया में दुश्मनी क्यों हैं?
आज नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया एक-दूसरे के दुश्मन हैं और ये दुश्मनी 70 साल से भी ज्यादा पुरानी है. लेकिन कभी ये एक ही थे, जिसे कोरियन प्रायद्वीप कहा जाता था. प्रायद्वीप यानी पानी के बीच में उठा हुआ जमीन का हिस्सा.
कोरियन प्रायद्वीप एशिया के पूर्वी हिस्से में बसा था. यहां कभी कोरयो वंश का शासन था. कोरयो वंश ने सन् 918 से 1392 तक इस पर राज किया.
इसके बाद जोसेऑन वंश सत्ता में आया. इसने करीब 500 साल तक शासन किया. 1897 में इसी वंश के राजा गोजोंग ने 'कोरियन एम्पायर' नाम से नए साम्राज्य की नींव रखी.
ये वो वक्त था जब जापान काफी मजबूत साम्राज्य हुआ करता था. उसकी सेना काफी ताकतवर थी. 1910 में जापानी साम्राज्य ने कोरियन प्रायद्वीप पर कब्जा कर लिया. जापानी सेना ने यहां क्रूरता और बर्बरता की हदें पार की. यही वजह है कि आज भी दोनों देश जापान को बहुत ज्यादा पसंद नहीं करते हैं.
1939 से 1945 तक दूसरा विश्व युद्ध हुआ. इसमें जापान बुरी तरह हारा. 1945 में विश्व युद्ध में हार के बाद ही कोरियन प्रायद्वीप जापान के कब्जे से छूट पाया.
कैसे अलग हुए नॉर्थ और साउथ कोरिया?
कोरिया को जापान से तो मुक्ति मिल गई, लेकिन फिर वो कोल्ड वॉर में फंस गया. ये कोल्ड वॉर चलता था अमेरिका और सोवियत संघ (अब रूस) के बीच. दोनों ने कोरिया को बांट दिया. दक्षिणी हिस्से पर अमेरिका ने अपना नियंत्रण रखा और उत्तरी हिस्सा सोवियत के पास गया.
1948 के 15 अगस्त को दोनों जगह अलग-अलग सरकारें बनीं. उत्तर कोरिया बना 'डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया' और दक्षिण बना 'रिपब्लिक ऑफ कोरिया'. उत्तरी कोरिया की राजधानी बनी प्योंगयोंग और दक्षिण कोरिया ने सियोल को अपनी राजधानी बनाया.
उत्तर कोरिया बस नाम का डेमोक्रेटिक रिपब्लिक था. असल में वहां राजशाही थी जिसके मुखिया किम इल-संग थे. किम जोंग-उन के दादा. वहीं, दक्षिण कोरिया में अमेरिका ने सिंगमैन री को सत्ता में बैठाया. सिंगमैन री कम्युनिस्ट सिस्टम के कट्टर विरोधी थी.
फिर हुई दोनों में जंग...
इस बंटवारे के बाद दुश्मनी शुरू हो गई. किम इंल-संग ने 25 जून 1950 को अपनी सेना दक्षिण कोरिया की तरफ भेज दी. उनका कहना था कि वो दक्षिण को मिलाकर कोरिया का एकीकरण करेंगे. इससे जंग छिड़ गई. इसे 'कोरियाई युद्ध' कहा जाता है.
अमेरिका समेत 15 देश दक्षिण कोरिया के साथ आए. जबकि, उत्तर कोरिया का रूस और चीन की सेना ने दिया. तीन साल तक युद्ध चला. लाखों लोग मारे गए. 27 जुलाई 1953 को ये युद्ध रुक गया. मगर खत्म नहीं हुआ. क्योंकि उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच शांति समझौता नहीं हो सका था. लिहाजा, तकनीकी तौर पर ये युद्ध अभी भी चल ही रहा है.
युद्ध थमने के बाद साउथ कोरिया अमेरिकी मदद से आगे बढ़ता रहा. वहां लोकतंत्र है. इंडस्ट्री है और एक संपन्न राष्ट्र है. दूसरी ओर तानाशाही में नॉर्थ कोरिया लुढ़कता रहा. वहां गरीबी है. लोगों के पास सीमित आजादी है. दुनिया से भी कटा हुआ है. बंटवारे और युद्ध करने के बाद भी साउथ और नॉर्थ कोरिया में तनाव खत्म नहीं हुआ है.