
जम्मू- कश्मीर में विधानसभा के लिए पहले चरण का मतदान चल रहा है. 10 सालों बाद हो रहे स्थानीय चुनाव को लेकर वोटर जोश में हैं. इससे पहले आम चुनावों में भी कश्मीर से भारी वोटिंग हुई थी. वहीं पाकिस्तान ऑक्युपाइड कश्मीर के हाल बेहाल हैं. पाकिस्तान के संविधान ने उसे स्वायत्ता दी हुई है. मतलब कायदे से उसपर पाकिस्तान का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. लेकिन मामला इससे अलग है. पीओके ऑटोनमी पाए हुए है लेकिन रस्मी तौर पर ही. उसके पास कहने को अपना प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अपनी सुप्रीम कोर्ट तक है, लेकिन इस सब पर पाकिस्तान का दखल रहा.
क्या है पीओके
इसकी दो एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट हैं. एक है कश्मीर. और दूसरा गिलगित बाल्टिस्तान. कश्मीर को पाकिस्तान स्वायत्त क्षेत्र मानता है और दावा करता है कि वो उसकी राजनीति या फैसलों में खास दखल नहीं देता. वहीं गिलगित बाल्टिस्तान के पास सीमित ऑटोनमी है. इसकी एक वजह ये भी है कि ये इलाका सामरिक लिहाज से काफी अहम है. साथ ही साथ यहां से चीन पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर भी गुजरती है इसलिए भी पाकिस्तान के लिए यहां सीधा कंट्रोल जरूरी है.
क्यों पाकिस्तान ने इसे कथित स्वायत्ता दी
भारत लगातार पीओके पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे का मुद्दा उठाते हुए अपना दावा पेश करता रहा. पाकिस्तान ने पूरी साजिश के साथ इसे हड़प तो लिया लेकिन भीतर ही भीतर वो डरे हुए है कि अगर उसने जोर-जबर्दस्ती की तो मामला हाथ से चला न जाए.
यही वजह है कि उसने न तो इस क्षेत्र को अपनाया, न ही अलग कर सका. विवादित इलाका होने की वजह से उसने यहां विकास पर भी ध्यान नहीं दिया. पाकिस्तान का इसके साथ रवैया कुछ वैसा ही रहा, जैसे घर के सामने अतिक्रमण की हुई जमीन के साथ घरवालों का होता है. वे उसपर कब्जा तो कर लेते हैं, लेकिन कोई स्थाई स्ट्रक्चर बनाने या बाड़ बनाने से डरते हैं क्योंकि कहीं न कहीं जानते हैं कि आगे चलकर वे फंस सकते हैं. तो पीओके की हालत भी कब्जाई हुई जमीन जैसी हो चुकी. उसपर घास-फूस लगाई जा रही है, लेकिन पक्की दीवार डालकर दावा पेश करने से बचा जा रहा है.
पाकिस्तान ने तकनीकी तौर पर रखा हुआ है अलग
तकनीकी तौर पर पाकिस्तान पीओके को अपना क्षेत्र नहीं, बल्कि स्वायत्त बताता है. पाकिस्तान के संविधान में देश के चार हिस्से हैं- पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा. पाकिस्तान ऑक्युपाइड कश्मीर इसमें शामिल नहीं. पाकिस्तान की संसद में भी इसका कोई रिप्रेजेंटेशन नहीं.
अलग है सरकारी स्ट्रक्चर
करीब 13 हजार किलोमीटर में फैले और 40 लाख से ज्यादा आबादी वाले पीओके को आंतरिक व्यवस्था चलाने की इजाजत है. वहां का राजनैतिक ढांचा अलग है, जहां एक अलग प्रधानमंत्री और विधानसभा होती है ताकि वे अपने स्थानीय मुद्दों को बेहतर ढंग से संभाल सकें. हालांकि पीओके से लगातार शिकायत आती रही कि सेंटर ही तय करता है कि कौन पीएम बनेगा, या फिर वो किस तरह के फैसले लेगा. होता ये है कि पाकिस्तान ये सुनिश्चित करता है कि केवल वही लोग चुनाव में हिस्सा लें जो उसे सपोर्ट करते हैं.
पीओके की सरकार आजाद कश्मीर अंतरिम कंस्टीट्यूशन एक्ट के तहत चलती है. लेकिन असल में इसका सरकारी ढांचा शक्तिहीन और हर तरह से पाकिस्तान पर निर्भर है. है ऐसा कि इस पूरे क्षेत्र को 14 सदस्यों वाली काउंसिल चलाती है, जिसपर इस्लामाबाद का कंट्रोल रहता है. इसमें लगभग आधे सदस्य पाकिस्तान के, जबकि आधे ही आजाद कश्मीर के होते हैं. इनका मुखिया पीएम होता है. ऐसे में काउंसिल जो भी निर्णय लेगी, उसे पीएम की नजरों से गुजरना होगा.
यहां एक सुप्रीम कोर्ट भी है, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और दो अन्य जज होते हैं. इसके अलावा एक हाई कोर्ट भी है.
क्यों नहीं ले सकते पाकिस्तान के इलेक्शन में हिस्सा
पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 1 में, पीओके चूंकि देश का हिस्सा नहीं, इसलिए यहां के लोग नेशनल असेंबली में भाग नहीं ले सकते. इस तरह से पाकिस्तान ने पीओके और अपने बीच एक दीवार खींच रखी है. वो कई बार यूएन में इस बात की दुहाई भी दे चुका कि उसने तो पीओके को इतनी छूट दे रखी है, जबकि भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना रखा है.
पाकिस्तान के खिलाफ क्यों रहता है गुस्सा
पीओके वो हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान आतंकियों की ट्रेनिंग के लिए करता रहा. मुंबई हमलों के दोषी आतंकी अजमल कसाब को यहां की राजधानी मुजफ्फराबाद में ही प्रशिक्षण मिला था. आरोप है कि टैरर फैक्ट्री बनाने के अलावा पाकिस्तान की सरकार ने यहां कोई काम नहीं किया. वो स्थानीय लोगों को भड़काती है कि उनके ये हाल भारत के चलते हैं. बेरोजगार लोगों को मिलिटेंट बनाती और इस्तेमाल करती है.
पीओके के लोग लगातार जोर लगाते रहे कि पाकिस्तान अपनी सेना और अपना राजनैतिक दखल दोनों वहां से हटा ले. इसे लेकर बहुत बार प्रदर्शन भी हुए.
भारत का अलग रहा रवैया
दूसरी तरफ भारत का रवैया पीओके के लिए हमेशा नरम और बिछड़े भाई जैसा रहा. कुछ समय पहले कश्मीर में एक चुनावी रैली के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पीओके का जिक्र करते हुए उन्हें वापस भारत से जुड़ने का खुला ऑफर दिया था. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के लोग पीओके की जनता को विदेशी मानते हैं, लेकिन भारत ने उन्हें हमेशा अपना माना है. आइए और हमारा हिस्सा बनिए.