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370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में अब होने जा रहा ये बदलाव, अमित शाह ने पेश किए बिल

संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है. इस सत्र में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो बिल पेश किए हैं. अगर ये बिल कानून बनते हैं तो जम्मू-कश्मीर में फिर बड़ा बदलाव हो जाएगा.

जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार ने दो बिल पेश किए हैं. (फाइल फोटो) जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार ने दो बिल पेश किए हैं. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के चार साल बाद मोदी सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो बिल पेश किए. पहला- जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2023 और दूसरा- जम्मू-कश्मीर रिऑर्गेनाइजेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2023.

पहला बिल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कश्मीरी प्रवासियों और पीओके से विस्थापित लोगों के लिए सीट रिजर्व रखने का प्रावधान करता है. वहीं, दूसरा बिल वंचित और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है.

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इन दोनों बिल पर बुधवार को भी चर्चा होगी. अभी इन्हें लोकसभा में पेश किया गया है. लोकसभा में पास होने के बाद इन्हें राज्यसभा में पेश किया जाएगा.

लेकिन ये दोनों बिल क्या हैं? इन बिल के कानून बनने से जम्मू-कश्मीर में क्या बदल जाएगा? समझते हैं...

जम्मू-कश्मीर रिऑर्गेनाइजेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2023 

5 अगस्त 2019 को सरकार ने जम्मू-कश्मीर को खास दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया था. साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था. 

अब ये नया बिल जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों को बढ़ाने का प्रावधान करेगा. ये कानून बनता है तो जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 114 सीटें हो जाएंगी.

जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त 2019 से पहले 111 विधानसभा सीटें थीं. इनमें से 24 सीटें पीओके में थीं. वहां चुनाव नहीं कराए जा सकते. इस तरह कुल 87 सीटें होती थीं, लेकिन लद्दाख के अलग होने के बाद 83 सीटें ही बची थीं.

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बिल के कानून बनने के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सीटें बढ़कर 83 से 90 हो जाएंगी. जम्मू में 6 और कश्मीर में एक सीट बढ़ जाएगी.

और क्या-क्या हैं प्रावधान?

इसके अलावा इस बिल में कश्मीरी प्रवासियों के लिए दो और पीओके से विस्थापित नागरिक के लिए एक सीट रिजर्व होगी.

दो कश्मीरी प्रवासियों में से एक सीट महिला के लिए होगी. कश्मीरी प्रवासी और विस्थापित नागरिकों को उपराज्यपाल नामित करेंगे.

बताया जा रहा है कि ये तीनों सीटें जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों से अलग होगी. इस हिसाब से जम्मू-कश्मीर में 93 सीटें हो जाएंगी.

इसके साथ ही अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 16 सीटें रिजर्व की हैं. इनमें से एससी के लिए 7 और एसटी के लिए 9 सीटें रखी गईं हैं.

कहां-कहां बढ़ेंगी विधानसभा सीटें?

जम्मू रीजन में सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ाई गई है. वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है. 

जम्मू के सांबा में रामगढ़, कठुआ में जसरोता, राजौरी में थन्नामंडी, किश्तवाड़ में पड्डेर-नागसेनी, डोडा में डोडा पश्चिम और उधमपुर में रामनगर सीट नई जोड़ी गईं हैं. 

वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में ही एक सीट बढ़ाई गई है. कुपवाड़ा में त्रेहगाम नई सीट होगी. अब कुपवाड़ा में 5 की बजाय 6 सीटें होंगी.

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जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2023

ये बिल एससी-एसटी और सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का प्रावधान करता है.

बिल के मुताबिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा उन्हें माना जाएगा, जिनके गांव एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास हैं और सरकार ने उन्हें पिछड़ा घोषित कर रखा है.

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