
जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वैसे-वैसे लोकसभा का चुनाव प्रचार और तेज होता जा रहा है. रविवार को राजस्थान के बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जबरदस्त हमला बोला. पीएम मोदी ने कांग्रेस पर 'संपत्ति बांट देंगे' वाला तंज कसा. अब इसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांसवाड़ा में कहा था कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो वो लोगों की संपत्ति अल्पसंख्यकों में बांट देगी.
इस पर अब सियासी बवाल बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि उनके झूठ का स्तर इतना गिर गया है कि घबराकर वो अब जनता के मुद्दों को भटकाना चाहते हैं. इतना ही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का वक्त भी मांगा है. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी से मुलाकातर खड़गे उन्हें कांग्रेस का घोषणापत्र सौंपेंगे.
बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रैली में जिस बात का जिक्र किया, उसका जिक्र कांग्रेस के घोषणापत्र में नहीं है. हालांकि, राहुल गांधी ने संपत्तियों के सर्वे की बात जरूर कही थी. ऐसे में जानते हैं कि इस पूरे सियासी बवाल की कहानी क्या है?
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
बांसवाड़ा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि अगर कांग्रेस की सरकार आई तो वो लोगों की संपत्तियां लेकर ज्यादा बच्चों वालों और घुसपैठियों को बांट देगी.
मोदी ने कहा था, 'पहले जब इनकी सरकार थी तब उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक मुसलमानों का है. इसका मतलब ये संपत्ति इकट्ठा करते किसको बांटेंगे? जिनके ज्यादा बच्चे हैं, उनको बांटेंगे. घुसपैठियों को बांटेंगे. क्या आपकी मेहनत का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा? आपको मंजूर है ये?'
उन्होंने आगे कहा, 'ये कांग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है कि वो मां-बहनों के गोल्ड का हिसाब करेंगे. उसकी जानकारी लेंगे और फिर उसे बांट देंगे. और उनको बांटेंगे जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है. भाइयो-बहनो ये अर्बन नक्सल की सोच, मेरी मां-बहनों, ये आपका मंगलसूत्र भी नहीं बचने देंगे. ये यहां तक जाएंगे.'
कांग्रेस के घोषणापत्र में क्या है?
कांग्रेस ने 5 अप्रैल को अपना घोषणापत्र जारी किया था. इसे कांग्रेस ने 'न्याय पत्र' नाम दिया है. इसमें कहीं भी संपत्ति बांटने का जिक्र नहीं किया गया है.
कांग्रेस के घोषणापत्र में 'हिस्सेदारी न्याय' नाम से एक चैप्टर है. इसमें लिखा है, 'कांग्रेस पार्टी पिछले सात दशकों से समाज के पिछड़े, वंचित, पीड़ित और शोषित वर्गों एवं जातियों के हक और अधिकार के लिए सबसे अधिक मुखरता के साथ आवाज़ उठाती रही है. कांग्रेस लगातार उनकी प्रगति के लिए प्रयास करती रही है. लेकिन जाति के आधार पर होने वाला भेदभाव आज भी हमारे समाज की हकीकत है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग देश की आबादी के लगभग 70% हैं, लेकिन अच्छी नौकरियों, अच्छे व्यवसायों और ऊँचे पदों पर उनकी भागीदारी काफी कम है. किसी भी आधुनिक समाज में जन्म के आधार पर इस तरह की असमानता, भेदभाव और अवसर की कमी बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए.'
इसमें आगे लिखा है, 'कांग्रेस राष्ट्रव्यापी आर्थिक-सामाजिक जाति जनगणना करवाएगी. इसके माध्यम से कांग्रेस जातियों, उपजातियों और उनकी आर्थिक-सामाजिक स्थिति का पता लगाएगी. जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस उनकी स्थिति में सुधार के लिए सकारात्मक कदम उठाएगी.'
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फिर कहां से आई संपत्ति बांटने की बात?
असल में ये सारी बात राहुल गांधी के बयान से आई. हालांकि, राहुल गांधी ने भी संपत्ति लेकर बांटने की बात नहीं कही थी. उन्होंने ये जरूर कहा था कि अगर सरकार आई तो एक सर्वे कराया जाएगा और पता लगाया जाएगा कि किसके पास कितनी संपत्ति है.
घोषणापत्र जारी करते समय राहुल ने कहा था, 'हिंदुस्तान में 50% आबादी पिछड़े वर्ग की है. 15% आबादी दलितों की है. 8% आबाद आदिवासियों की है. 15% आबादी माइनॉरिटी की है. और 5% आबादी गरीब जनरल कास्ट की है. अगर आप इन सबको मिला दें तो 90% से ज्यादा आबादी इन लोगों की बनती है. मगर आप, अगर हिंदुस्तान की संस्थाओं को देखो, इंस्टीट्यूशन्स को देखो, बड़ी-बड़ी कंपनियों को देखो, तो इनमें से आपको कोई भी उन कंपनियों में, उन इंस्टीट्यूशन में, उन संस्थाओं में नहीं दिखाई देता.'
राहुल ने आगे कहा था, 'हिंदुस्तान की सबसे बड़ी 200 कंपनियों के मालिकों की लिस्ट निकालिए. उसमें आपको एक पिछड़े वर्ग का व्यक्ति नहीं मिलेगा, एक दलित नहीं मिलेगा, एक गरीब जनरल कास्ट का नहीं मिलेगा, एक माइनॉरिटी नहीं मिलेगा, एक आदिवासी नहीं मिलेगा.'
उन्होंने कहा था, 'इसलिए हमने वादा किया है कि जैसे ही हमारी सरकार आएगी, जाति जनगणना को हम पूरे देश में इम्प्लिमेंट कर देंगे. देश का एक्सरे कर देंगे, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. पिछड़े वर्ग को, दलितों को, आदिवासियों को, गरीब जनरल कास्ट के लोगों को, माइनॉरिटी को पता जाएगा कि इस देश में उनकी भागीदारी कितनी है. इसके बाद हम फाइनेंशियल और इंस्टीट्यूशनल सर्वे करेंगे. ये पता लगाएंगे कि हिंदुस्तान का धन किसके हाथों में है. कौन से वर्ग के हाथ में है और इस ऐतिहासिक कदम के बाद हम क्रांतिकारी काम शुरू करेंगे. जो आपका हक बनता है, वो हम आपके लिए आपको देने का काम करेंगे. चाहे वो मीडिया हो, ब्यूरोक्रेसी हो, हिंदुस्तान की सब संस्थाएं हो, वहां हम आपकी जगह बनाकर आपको हिस्सेदारी देंगे.'