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संविधान के वो 3 संशोधन जिनका जिक्र PM मोदी ने किया, जानें क्यों इसे 'मिनी कॉन्स्टीट्यूशन' कहा जाता है

राज्यसभा में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर तंज कसा. इस दौरान कांग्रेस के संविधान बचाओ के नारे पर पीएम मोदी ने कहा कि आपके मुंह से संविधान की रक्षा शब्द शोभा नहीं देता. प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान 38वें, 39वें और 42वें संविधान संशोधन का जिक्र भी किया.

पीएम मोदी ने राज्यसभा में भाषण के दौरान कांग्रेस को जमकर घेरा. पीएम मोदी ने राज्यसभा में भाषण के दौरान कांग्रेस को जमकर घेरा.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में भाषण दिया. वो राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा.

पीएम मोदी ने कहा, 'अब भी फेक नैरेटिव चलाते रहेंगे क्या? आप भूल गए 1977 का चुनाव... अखबार बंद थे, रेडियो बंद थे, बोलना भी बंद थे. और एक ही मुद्दे पर देशवासियों ने वोट दिया था, लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए वोट दिया था, संविधान की रक्षा के लिए पूरे विश्व में इससे बड़ा चुनाव नहीं हुआ है. भारत के लोगों की रगों में लोकतंत्र किस प्रकार से जीवित है, 1977 के चुनाव ने दिखा दिया.'

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उन्होंने कहा कि 'आपतकाल को मैंने बहुत निकट से देखा है. करोड़ों लोगों को यातनाएं दी गईं, उनका जीना मुश्किल कर दिया गया था. और जो संसद में हुआ, वो तो रिकॉर्ड पर है. भारत के संविधान की रक्षा करने की बात करने वालों से मैं पूछता हूं कि जब आपने लोकसभा को सात साल चलाया था, लोकसभा का कार्यकाल पांच साल है, वो कौनसा संविधान था जिसे लेकर आपने सात साल तक सत्ता की मौज ली और लोगों पर जुल्म करते रहे और आप संविधान हमें सिखाते हो.'

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'संविधान की आत्म को छिन्न-भिन्न करने का पाप इन्हीं लोगों ने किया था. 38वां, 39वां और 42वां संविधान संशोधन, जिन्हें मिनी कॉन्स्टीट्यूशन के रूप में कहा जाता था. ये सब क्या था. आपके मुंह से संविधान की रक्षा शब्द शोभा नहीं देता है. ये पाप करके आप बैठे हुए हो.'

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ऐसे में जानते हैं कि आखिर संविधान का 38वां, 39वां और 42वां संशोधन क्या था? जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिक्र करते हुए इन्हें 'मिनी कॉन्स्टीट्यूशन' बताया.

क्या था 38वां और 39वां संशोधन?

जून 1975 में इमरजेंसी लगने के बाद इंदिरा गांधी की सरकार ने सबसे पहले संविधान में 38वां संशोधन किया था. ये संशोधन 22 जुलाई 1975 को किया गया था. इस संशोधन के जरिए न्यायपालिका से आपातकाल की न्यायिक समीक्षा का अधिकार छीन लिया गया था.

इस संशोधन के करीब दो महीने बाद संविधान में 39वां संशोधन किया गया. इस संशोशन के मुताबिक, प्रधानमंत्री के चुनाव की जांच सिर्फ संसद की तरफ से गठित कमेटी ही कर सकती थी.

39वां संशोधन इसलिए किया गया था, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया था. हाईकोर्ट ने फैसले में चुनाव में धांधली होने की बात कही थी.

सबसे विवादित 42वां संशोधन!

इमरजेंसी के दौरान जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब उन्होंने संविधान में कई संशोधन किए. 40वें और 41वें संशोधन के बाद 42वां संविधान संशोधन पास किया गया. 42वां संशोधन सबसे विवादित माना जाता है और इसलिए इसे 'मिनी कॉन्स्टीट्यूशन' भी कहा जाता है.

42वें संशोधन के जरिए संविधान में बड़े स्तर पर बदलाव हुए. इसके जरिए संविधान की प्रस्तावना में भी तीन नए शब्द- समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया. इन शब्दों को जोड़ने के पीछे तर्क दिया गया कि देश को धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर विकसित करने के लिए ये जरूरी है.

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1976 में हुए 42वें संशोधन में सबसे अहम बात ये थी कि किसी भी आधार पर संसद के फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी. साथ ही सांसदों और विधायकों की सदस्यता को भी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती थी. संसद का कार्यकाल भी पांच साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया गया था.

42वें संशोधन के प्रावधानों में से एक मौलिक अधिकारों की तुलना में राज्य के नीति निर्देशक तत्व को वरीयता देना भी था. इस कारण किसी भी व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा सकता था. इतना ही नहीं, केंद्र सरकार को ये भी शक्ति मिल गई थी कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वो किसी भी राज्य में सैन्य या पुलिस बल भेज सकती थी.

1977 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार आने के बाद 44वें संविधान संशोधन के जरिए 42वें संशोधन के कई प्रावधानों को रद्द कर दिया गया था. हालांकि, संविधान की प्रस्तावना में हुए बदलाव से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी.

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