
पिछले साल 7 अक्टूबर को फिलीस्तीनी आतंकी गुट हमास ने इजरायली सीमा पर हमला करके सैकड़ों हत्याएं कर दीं, जबकि काफी लोगों को बंधक बना लिया. इसके बाद से युद्ध भड़का हुआ है. दोनों ही एक-दूसरे पर हमलावर हैं. तब गाजा का जिक्र क्यों? ये इजरायल से सटा वो इलाका है, जहां हमास ने अपना हेडक्वार्टर बना रखा है. तब से ही गाजा में तबाही मची हुई है. अब वहां की हेल्थ मिनिस्ट्री ने ये कहकर दुनिया को स्तब्ध कर दिया कि गाजा पट्टी की 60 हजार प्रेग्नेंट महिलाएं भूख और साफ-सफाई की कमी से जूझते हुए समय काट रही हैं.
क्यों गाजा पट्टी को लेकर पहले भी चिंता रही
ये इजरायल, मिस्र और भूमध्य सागर के बीच बसा एक छोटा-सा एरिया है, जहां फिलिस्तीनी रहते हैं. यहां प्रति किलोमीटर पर लगभग साढ़े 5 हजार लोग बसे हुए हैं, जिससे अंदाजा लगा सकते हैं कि इलाका कितना घना बसा हुआ होगा. यही वजह है कि युद्ध से यहां भारी तबाही मची हुई है. साल 2021 में UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने इस जगह को धरती का जहन्नुम कहा था. इससे पहले इसे ओपन-एयर जेल भी कहा जा चुका है.
कितनी मौतें हो चुकीं
फिलीस्तीनी हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार, गाजा में युद्ध से अब तक 31 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके. इस हिसाब से देखें तो रोज ढाई सौ के लगभग मौतें हो रही हैं. रिहायशी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं. हालात ऐसे हैं कि सवा दो मिलियन आबादी वाली पट्टी में 80% लोग घरों से बाहर शिविरों में रहने को मजबूर हैं. इसकी वजह से मौतों की संख्या और बढ़ रही है. भूख, साफ-सफाई की कमी और पानी की कमी से मौतों का आंकड़ा बढ़ ही रहा है. इसमें भी बच्चों के अलावा गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं.
शेल्टर में रहने को मजबूर
बमबारी में जिनके घर टूट चुके, वे महिलाएं शेल्टर में रह रही हैं. यहां खाने-पीने का अलग इंतजाम नहीं. ज्यादातर परिवार बाहर से मिल रही मदद पर निर्भर हैं. ये खाना पेट भरने लायक तो होता है, लेकिन न्यूट्रिशन नहीं रहता. यूनाइटेड नेशन्स के मुताबिक, फिलहाल हर पांच में से एक गर्भवती भारी कुपोषित है. शेल्टर में पानी या हाइजीन का पक्का इंतजाम नहीं. ऐसे में गर्भवती पर संक्रामक बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है.
नवजात की देखभाल के लिए भी अस्पतालों के पास कोई व्यवस्था बाकी नहीं. बता दें कि इजरायल और हमास की लड़ाई में गाजा पट्टी के ज्यादातर अस्पताल खाली हो चुके. वहां न बिजली है, न पानी और न ही स्टाफ. बाकी बचे अस्पताल ओवरलोडेड हैं. यहां भी इमरजेंसी केस भरे रहते हैं, जैसे बमबारी से घायल लोग. इन हालातों का सीधा असर गर्भवती महिलाओं और आगे नवजात शिशुओं पर हो रहा है. बता दें कि हाइजीन की कमी से पांच साल का होने से पहले ही ऐसे बच्चों की मौत हो सकती है, या फिर पूरी जिंदगी किसी न किसी बीमारी से जूझते रहने की आशंका होती है..
कैसी है अस्पतालों की स्थिति
यूनाइटेड नेशन्स की मानें तो गाजा पट्टी के एक तिहाई अस्पताल ही फंक्शनल रह गए हैं, वो भी आधे-अधूरे ढंग से. कई पड़ोसी देश फील्ड हॉस्पिटल बना रहे हैं. ये कैंप की तरह का स्ट्रक्चर है, जहां डॉक्टर और सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन ये वो सुविधाएं हैं, जो क्रिटिकल हालत वाले मरीजों तक सीमित हैं. डिलीवरी के समय महिलाएं जा भी रही हैं तो अमानवीय स्थितियां देख रही हैं.
कुछ ऐसे हैं महिलाएं के हाल
- लैंसेट की एक रिपोर्ट कहती है कि कई महिलाओं को सीजेरियन डिलीवरी की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में बेहोशी की दवा न होने के चलते उन्हें एनेस्थीशिया दिए बगैर ऑपरेशन हुआ. या फिर पेनकिलर नहीं मिल रहे.
- डिलीवरी के बाद अक्सर 24 घंटों के लिए जच्चा-बच्चा अस्पताल में रखे जाते हैं, लेकिन यहां बेड खाली करने के लिए 3 घंटे या इससे भी कम समय में उन्हें भेजा जा रहा.
- गाजा में पानी की सप्लाई में 94% तक कमी आ चुकी. प्रेग्नेंट या बच्चे को दूध पिला रही मांओं को पानी की ज्यादा जरूरत रहती है, लेकिन यहां भी वे मजबूर हैं.
- ज्यादातर महिलाएं एनीमिक हैं. ऐसे में समय से पहले बच्चे के जन्म या गंभीर स्थिति में मरा हुआ बच्चा जन्मने का डर भी रहता है. ये केस भी बढ़ रहे हैं, लेकिन इसका डेटा फिलहाल नहीं जुटाया जा सका.