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गुजरात में बना नमक पूरा देश खाता है, मामला व्रत का हो तो पाकिस्तान से भी आता है!

देश में नमक का सबसे ज्यादा उत्पादन गुजरात में ही होता है. हालांकि, सेंधा नमक के लिए भारत को पाकिस्तान पर निर्भर रहना पड़ता है. पाकिस्तान में सेंधा नमक का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है. 2018-19 में भारत ने जितना सेंधा आयात किया था, उसमें से 99% से ज्यादा पाकिस्तान से ही आया था.

देश में 2021-22 में 266 लाख टन से से ज्यादा नमक का उत्पादन हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर) देश में 2021-22 में 266 लाख टन से से ज्यादा नमक का उत्पादन हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Priyank Dwivedi
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST

आपकी थाली का 'नमक' आजकल चर्चा में है. कारण है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नमक पर बयान और फिर कांग्रेस नेता उदित राज का उस पर विवादित ट्वीट.

दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाल ही में गुजरात दौरे पर गई थीं. इस दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में देश का 76% नमक बनता है, लिहाजा कहा जा सकता है कि सभी देशवासी गुजरात का नमक खाते हैं. इसके बाद कांग्रेस नेता उदित राज ने ट्वीट कर लिखा, द्रौपदी मुर्मू जैसा राष्ट्रपति किसी देश को न मिले. चमचागिरी की भी हद्द है. कहती हैं 70% लोग गुजरात का नमक खाते हैं. खुद नमक खाकर जिंदगी जिएं तो पता लगेगा.

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नमक का सबसे ज्यादा उत्पादन करने में चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरे नंबर पर है. आंकड़ों के मुताबिक, देश में नमक का सबसे ज्यादा उत्पादन गुजरात में होता है. 2021-22 में देश में 266 लाख टन से ज्यादा नमक का उत्पादन हुआ था. इसमें से 227.65 लाख टन यानी 85% नमक का उत्पादन गुजरात में हुआ था. गुजरात के बाद सबसे ज्यादा नमक का उत्पादन तमिलनाडु (17.21 लाख टन) और राजस्थान (16.90 लाख टन) में हुआ था.

नमक विभाग की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 में देश में नमक का जितना उत्पादन हुआ, उसमें से 76 लाख टन नमक घरेलू इस्तेमाल में लाया गया, जबकि 66 लाख टन नमक विदेशों में निर्यात किया गया. बाकी का नमक उद्योगों में भेजा गया.

लेकिन सेंधा नमक के लिए पाकिस्तान पर निर्भर!

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नमक का सबसे ज्यादा उत्पादन करने में भारत तीसरे नंबर पर है. 2020-21 में लगभग 870 करोड़ रुपये का 66 लाख टन नमक का निर्यात किया था. भारत का नमक चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, कतर, इंडोनेशिया, वियतनाम, बांग्लादेश, नेपाल और ताइवान जैसे देशों में खाया जाता है. लेकिन सैंधा नमक के लिए हम पाकिस्तान पर निर्भर हैं.

सेंधा नमक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल व्रत या उपवास में होता है. भारत में नवरात्रि के समय व्रत रखा जाता है. इसके अलावा कुछ खास मौकों पर भी व्रत रखने की परंपरा है. व्रत के समय बिना नमक के ही खाना खाया जाता है. ऐसे में खाने में आम नमक की बजाय सेंधा नमक डाला जाता है. 

भारत में सेंधा नमक का उत्पादन होता ही नहीं है. जबकि, पाकिस्तान इसमें कहीं आगे है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेवड़ा नाम की नमक खदान है. यहां हर साल साढ़े 4 लाख टन से ज्यादा सेंधा नमक निकलता है. सेंधा नमक जिसे सैंधव नमक, लाहौरी नमक, हैलाइट, गुलाबी नमक या हिमालयन नमक के नाम से जाना जाता है.

इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 में भारत ने 74,457 टन सेंधा नमक का आयात किया था. इसमें से 74,413 टन यानी 99% से भी ज्यादा सेंधा नमक पाकिस्तान से ही आया था.

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हालांकि, सेंधा नमक पर अब भारत ने अपनी निर्भरता कम भी की है. 2019-20 में भारत ने 60,441 टन सेंधा नमक का आयात किया था, जिसमें से 19,037 टन यानी 31% नमक पाकिस्तान से आया था. 2019-20 में सबसे ज्यादा 31,839 टन सेंधा नमक यूएई से आयात किया था. यूएई और पाकिस्तान के अलावा ईरान, मलेशिया, जर्मनी, अफगानिस्तान, तुर्की और ऑस्ट्रेलिया से भी सेंधा नमक आया था.

सबसे बड़ी खदान है खेवड़ा

खेवड़ा की नमक खदान कोह पहाड़ी पर है. ये दुनिया की सबसे बड़ी खदान मानी जाती है. हर साल साढ़े 4 लाख टन नमक यहां से निकलता है. इसमें से 99 फीसदी से ज्यादा सेंधा नमक होता है. 

कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये खदान इतनी बड़ी है कि अगले 450 साल तक यहां से नमक की आपूर्ति की जा सकती है. 

इस खदान की खोज की कहानी भी बड़ी रोचक है. कहा जाता है कि अलेक्जेंडर जब झेलम नदी को क्रॉस कर रहा था, तब उसके घोड़ों ने ये खदान चाट ली थी. इससे उसके बीमार घोड़े ठीक हो गए थे. तब पता चला था कि यहां नमक की खदान है. हालांकि, मुगलों के दौर में इस खदान से नमक का कारोबार शुरू हुआ.

आखिर में बात नमक कितना जरूरी?

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नमक में सबसे अहम तत्व होता है सोडियम. ये हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है. क्योंकि सोडियम  हमारे शरीर में पानी का स्तर सही बनाने से लेकर ऑक्सीजन और दूसरी जरूरी तत्वों को सभी अंगों तक पहुंचाने का काम करता है. अक्सर नमक को कम से कम खाने की सलाह दी जाती है. पर ये दूसरी बात है कि ऐसा होता नहीं है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस के मुताबिक, एक व्यक्ति को हर रोज 5 ग्राम से भी कम नमक खाना चाहिए. लेकिन भारत में हर व्यक्ति तय मानक से लगभग दोगुना नमक खाता है. ऑस्ट्रेलिया के जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ के मुताबिक, हर भारतीय हर दिन औसतन 10 ग्राम नमक खाता है. 

कुल मिलाकर नमक की मात्रा ज्यादा होना और कम होना, दोनों ही खतरनाक है. क्योंकि ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है तो इसकी मात्रा कम होने से शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है. 

हालांकि, WHO का कहना है कि अगर दिनभर में 5 ग्राम से कम नमक खाते हैं, तो इससे न सिर्फ ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, बल्कि हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा भी कम हो जाता है. WHO के मुताबिक, अगर नमक को सही मात्रा में लिया जाए तो इससे हर साल 25 लाख जानों को बचाया जा सकता है.

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