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कानून वही, एक्शन नया... पुणे पोर्श कांड के आरोपी की रिहाई, हंगामा और फिर सिस्टम की सख्ती... 4 दिन में क्या बदल गया?

पुणे के पोर्श कार कांड में पुलिस से लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड तक हरकत में आ गया है. पुलिस ने नाबालिग आरोपी के पिता समेत होटल और बार के मालिकों को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने भी आरोपी नाबालिग की जमानत रद्द कर दी है.

पुणे केस के नाबालिग आरोपी को सुधार गृह भेज दिया गया है. पुणे केस के नाबालिग आरोपी को सुधार गृह भेज दिया गया है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2024,
  • अपडेटेड 5:40 PM IST

पुणे के पोर्श कार कांड में चार दिन में तेजी से चीजें बदल गईं. रविवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी, लेकिन बुधवार को उसकी जमानत रद्द कर दी गई. बुधवार को ही आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को कोर्ट ने दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. 

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को यरवदा के बाल सुधार गृह में 5 जून तक भेज दिया है. इस सुधार गृह में 30 से ज्यादा नाबालिग हैं. पुलिस ने बताया कि इस दौरान आरोपी का साइकोलॉजिकल टेस्ट भी किया जाएगा.

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वहीं, आरोपी के वकील प्रशांत पाटिल ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जस्टिस बोर्ड ने जमानत रद्द नहीं की है, बल्कि अपने पिछले आदेश में ही संशोधन किया है. उन्होंने दावा किया कि जमानत रद्द करने का मतलब होता कि आरोपी को हिरासत में लेना, लेकिन बोर्ड ने उसे सुधार गृह में भेजने का आदेश दिया है. 

4 दिन में कितना बदल गया केस?

- एक्सीडेंटः 19 मई के तड़के पौन तीन बजे पोर्श कार चला रहे नाबालिग आरोपी ने बाइक सवार अनीष अवधिया और अश्विनी कोस्टा को पीछे से टक्कर मार दी. इसमें दोनों की मौत हो गई. दुर्घटना के वक्त नाबालिग आरोपी ने कथित तौर पर शराब पी रखी थी और वो पार्टी से लौट रहा था. ये एक्सीडेंट पुणे के कल्याणी नगर इलाके में हुआ था.

- गिरफ्तारी और जमानतः पुलिस ने उसी दिन नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. वो 17 साल का है. उसी दिन जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी. इन शर्तों में 300 शब्दों का निबंध लिखना भी शामिल था. इसके साथ ही कोर्ट ने उसे आरटीओ जाकर ट्रैफिक रूल्स समझने को भी कहा था.

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- आरोपी के पिता की गिरफ्तारीः इस कांड पर जब लोगों का गुस्सा फूटा तो पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया. उनके अलावा पुलिस ने होटल ब्लैक क्लब के दो कर्मचारी नितेश शेवानी और जयेश गावकर को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का कहना है कि हादसे से पहले नाबालिग आरोपी ने शराब पी थी. कोर्ट ने इन तीनों को 24 मई तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है.

- नाबालिग की जमानत रद्दः 22 मई को नाबालिग आरोपी की जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने फिर पेशी हुई. बोर्ड ने उसकी जमानत रद्द करने का आदेश दिया. नाबालिग को यरवदा के बाल सुधार गृह में 5 जून तक भेज दिया गया है. 

यह भी पढ़ें: पुणे में एक्सीडेंट बेटे ने किया, गिरफ्तारी पिता की... नाबालिग को गाड़ी देना कितना खतरनाक? जानें क्या है कानून

नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल. (फोटो-PTI)

अब तक क्या-क्या सामने आया?

अब तक की जांच में सामने आया है कि हादसे से कुछ घंटों पहले नाबालिग आरोपी ने शराब पी थी. पुलिस के मुताबिक, नाबालिग आरोपी ने अपने दोस्तों के साथ एक बार में शराब पी थी. इस बार में उसने 48 हजार रुपये खर्च किए थे.

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उसी रात सवा तीन बजे नाबालिग आरोपी तेज रफ्तार से पोर्श कार चला रहा था. उसने बाइक से जा रहे अनीष अवधिया और अश्विनी कोस्टा को टक्कर मार दी. इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. टक्कर के बाद पोर्श कार रेलिंग से टकरा गई थी.

इस मामले में पुलिस आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 304A (लापरवाही की वजह से मौत), 279 (रैश ड्राइविंग) और मोटर व्हीकल एक्ट की कुछ धाराओं में केस दर्ज किया है. इसके अलावा पुलिस ने आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और होटल-बार के मैनेजर के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 और 77 के तहत केस दर्ज किया है. धारा 75 बच्चों के प्रति क्रूरता और धारा 77 बच्चों को नशीले पदार्थों की आपूर्ति से जुड़ी है.

यह भी पढ़ें: पुणे पोर्श केस के नाबालिग आरोपी पर कैसे बालिग की तरह केस चलेगा? जानिए कानून और आगे की प्रक्रिया

अब आगे क्या?

फिलहाल आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल 24 मई तक पुलिस हिरासत में रहेंगे. इस दौरान उनसे पूछताछ की जाएगी. पुलिस का कहना है कि पिता को पता था कि उनके बेटे के पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, उसके बावजूद उन्होंने उसे कार दी. इतना ही नहीं, उन्हें ये भी पता था कि उनका बेटा शराब पीता है, तब भी उसे पार्टी में जाने की इजाजत दी.

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वहीं, नाबालिग आरोपी पांच जून तक सुधार गृह में रहेगा. इस दौरान उसका साइकोलॉजिकल टेस्ट भी किया जाएगा. आरोपी की मेंटल हेल्थ का ख्याल रखने के लिए साइकोलॉजिस्ट या साइकियाट्रिस्ट या काउंसलर भी रहेंगे.

पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि नाबालिग आरोपी पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने की अपील पर अभी तक कोई आदेश नहीं आया है. 

आरोपी के वकील प्रशांत पाटिल का कहना है कि इस मामले में कम से कम दो महीने का समय लग सकता है, क्योंकि किसी नाबालिग पर वयस्क की तरह केस चलाने के लिए साइकियाट्रिस्ट और काउंसलर्स की रिपोर्ट मांगी जाती है.

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