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भारत के साथ और कौन-कौन... अखंड भारत पर RSS का पूरा कॉन्सेप्ट है क्या? आसान भाषा में समझें

अखंड भारत कब तक बनेगा? आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इसका जवाब दिया है. उन्होंने एक छात्र से कहा कि जब तक आप बूढ़े होंगे, तब तक अखंड भारत बन जाएगा. लेकिन ये अखंड भारत का पूरा कॉन्सेप्ट क्या है? और क्या ये मुमकीन है? समझिए...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत. (फाइल फोटो-PTI) आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत. (फाइल फोटो-PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

देश का नाम 'इंडिया' और 'भारत' होगा? या सिर्फ 'भारत', इस पर बहस चल रही है. लेकिन इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने 'अखंड भारत' पर बड़ी बात कही है.

दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान भागवत से एक छात्र ने सवाल किया, 'हम भारत को अखंड भारत के रूप में कब तक देख लेंगे?' इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा, 'कब तक बनेगा, मैं ये तो नहीं बता सकता. उसके लिए ग्रह-ज्योतिष देखना पड़ेगा. मैं तो जानवरों का डॉक्टर हूं. लेकिन अगर आप उसको करने जाएंगे तो आपके बूढ़े होने से पहले आपको दिखेगा.'

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भागवत ने आगे कहा, 'क्योंकि परिस्थितियां अब ऐसी करवट ले रही हैं. जो भारत से अलग हुए हैं, उनको लगने लगा है कि गलती हो गई, हमको फिर से भारत होना चाहिए.'

ये पहली बार नहीं है जब भागवत ने अखंड भारत की बात कही है. पिछले साल अप्रैल में उन्होंने कहा था, '20-25 साल में तो भारत अखंड भारत बन जाएगा, लेकिन हम कोशिश करेंगे तो 15 साल में भी ऐसा हो सकता है.'

देश में अखंड भारत को लेकर बहस लंबे समय से होती रही है. नए संसद भवन के अंदर भी अखंड भारत की एक तस्वीर लगी है. इस पर काफी विवाद भी हुआ था. तब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि संसद में जो लगा है, वो अशोक के साम्राज्य को दिखा रहा है.

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पर ये अखंड भारत क्या है?

अखंड भारत को लेकर तीन तरह के कॉन्सेप्ट हैंः-

- पहलाः ऐसा भारत जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश भी हों. 

- दूसराः ऐसा भारत जिसमें पाकिस्तान-बांग्लादेश के अलावा नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार, अफगानिस्तान और श्रीलंका भी हों. 

- तीसराः ऐसा भारत जिनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार, अफगानिस्तान और श्रीलंका के साथ-साथ कंबोडिया, मलेशिया, वियतनाम और इंडोनेशिया भी हों.

अखंड भारत का इतिहास क्या है?

एक मंत्र बोला जाता है- जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्याव्रत देशांतगर्ते... इस मंत्र में जम्बूद्वीप को पृथ्वी के सात द्वीपों में से एक बताया है.

ये सात द्वीप हैं- जम्बू, प्लक्ष, शाल्मल, कुश, क्रौंच, शाक और पुष्कर. जम्बूद्वीप को इन्हीं सब द्वीपों के बीच में बताया है.

1941 में भंडारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट से पंडित पांडुरंग वामन की छपी किताब में लिखा था- 'भारतवर्ष के अंदर कई सारे देश आते थे. भारतवर्ष 'जम्बूद्वीप' के अंदर था.'

चंद्रगुप्त मौर्य ने किया था भारत को एकजुट

प्राचीनकाल में अखंड भारत कई गणराज्यों में बंट गया था. इसे एकजुट किया था मौर्य वंश के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने. चाणक्य ने उनका मार्गदर्शन किया था.

322 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद साम्राज्य को हराकर उसपर कब्जा कर लिया. फिर सिकंदर के कब्जे वाले इलाकों पर कब्जा करना शुरू किया. 305 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने सिकंदर के सेनापति सेल्युकस को भी हरा दिया था.

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राधा कुमुद मुखर्जी की किताब 'चंद्रगुप्त मौर्य एंड हिज टाइम' में लिखा है कि चंद्रगुप्त के बाद उनके बेटे बिंदुसार और पोते अशोक ने पूर्वी तट पर कलिंग और दक्षिणी तट पर तमिल राज्य पर भी कब्जा कर लिया था.

इस तरह मौर्य साम्राज्य में भारत पश्चिम में फारस यानी ईरान से पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु तक फैला था. इसे ही 'अखंड भारत' माना जाता है.

संघ कैसे देखता है?

आरएसएस से जुड़े सुरुचि प्रकाशन की किताब 'पुण्यभूमि भारतः मानचित्र परिचय' में अखंड भारत का कॉन्सेप्ट बताया गया है.

जुगल किशोर शर्मा की इस किताब में अफगानिस्तान को उपगनाथन, काबुल को कुभा नगर, पेशावर को पुरुषपुर, तिब्बत को त्रिविष्ट, श्रीलंका को सिंघलद्वीप और म्यांमार को ब्रह्मदेश बताया है.

सुरुचि प्रकाशन की ओर से प्रकाशित एक और किताब में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका और तिब्बत को अखंड भारत का हिस्सा बताया है.

नए संसद भवन में लगी अखंड भारत की तस्वीर.

कब-कब खंड-खंड हुआ भारत?

- पाकिस्तानः 1947 में बंटवारा हुआ. भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग देश बने.

- बांग्लादेशः पहले पाकिस्तान का हिस्सा था. 1971 में बांग्लादेश एक अलग मुल्क बना.

- नेपालः 1904 में गोरखाओं और अंग्रेजों में एक संधि हुई. इससे नेपाल अलग देश बना.

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- भूटानः ब्रिटेन ने 1907 में भूटान में उग्येन वांगचुक की राजशाही स्थापित कर दी.

- तिब्बतः 1914 में मैकमोहन लाइन बनी. इससे तिब्बत चीन का हिस्सा बन गया.

- श्रीलंकाः ब्रिटेन का कब्जा था, लेकिन वो अलग देश मानता रहा. 1948 में श्रीलंका आजाद हुआ.

- म्यांमारः भारत से 10 साल पहले 1937 में ब्रिटेन ने बर्मा (म्यांमार) को आजाद कर दिया.

- अफगानिस्तानः 1876 में रूस-ब्रिटेन की संधि से ये बफर स्टेट बना. 1919 में आजादी मिली.

कैसा होगा अखंड भारत?

- एरियाः भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार और श्रीलंका अखंड भारत में आते हैं तो देश का कुल क्षेत्रफल 83.97 लाख वर्ग किलोमीटर का होगा.

- आबादीः मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, अखंड भारत की आबादी 170 करोड़ से ज्यादा होगी. 55 करोड़ मुस्लिम और 100 करोड़ हिंदू होंगे. मुस्लिम आबादी 32% और हिंदू 60% से कम होंगे.

- अर्थव्यवस्थाः अखंड भारत की जीडीपी 300 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की होगी. सबसे ज्यादा जीडीपी भारत की ही होगी. अभी भारत की जीडीपी 272 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.

- संसदः ये सभी देश अखंड भारत का हिस्सा बनते हैं तो देश में 3 हजार 283 सांसद होंगे. इनमें सबसे ज्यादा 795 सांसद भारत में होंगे. दूसरे नंबर पर म्यांमार होगा, जहां 664 सांसद होंगे.

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पर क्या ये मुमकिन है?

फिलहाल तो बिल्कुल नहीं. क्योंकि सभी देश आजाद हैं. सबका अपना संविधान है. सबकी अपनी राजनीतिक व्यवस्था है. ये सारे देश फिर से एकजुट होंगे और भारत में मिलेंगे, इसकी गुंजाइश बेहद कम है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू भी इसकी वकालत करते रहे हैं. 2014 में उन्होंने कहा था कि अखंड भारत ही कश्मीर समस्या का समाधान है. 

हालांकि, जस्टिस काटजू यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर भारत को संगठित करने का फॉर्मूला देते हैं. यानी, जिसमें भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश साथ रहें और इन तीनों की अपनी-अपनी सरकारें भी हों. इन तीनों सरकार के ऊपर एक और सरकार होगी. यही फॉर्मूला यूरोपियन यूनियन में चलता है. वहां सभी देशों की अपनी-अपनी सरकार है और एक यूरोपियन यूनियन की भी सरकार जिसकी संसद भी है.

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