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मजबूरी या रणनीति! यूक्रेन के खेरसान से क्यों लौट रही है पुतिन की सेना, जानें 5 बड़े कारण

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के साथ जारी जंग में रूस ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है. रूस ने अपनी सेना को खेरसान से पीछे हटने का आदेश दिया है. रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने अपनी सेना को हटने को कहा है. पर आखिर क्या वजह रही कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा?

खेरसान को सितंबर में पुतिन ने आजाद मुल्क घोषित कर दिया था. (फाइल फोटो-AP/PTI) खेरसान को सितंबर में पुतिन ने आजाद मुल्क घोषित कर दिया था. (फाइल फोटो-AP/PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

Russia-Ukraine War: रूस ने अपनी सेना को यूक्रेन के खेरसान इलाके से निकलने का आदेश दिया है. रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने बुधवार को अपने सैनिकों को खेरसान के पास निप्रो नदी (Dnipro River) के पश्चिमी तट से हट जाने को कहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है. बुधवार को बाइडेन ने कहा कि ये दिखाता है कि रूस की सेना किसी 'समस्या' से जूझ रही है. 

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खेरसान वही इलाका है, जिसे दो महीने पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने आजाद देश घोषित किया था. लेकिन दो महीने में ही रूस ने अपनी सेना को वहां से लौटने का आदेश दे दिया है. 9 महीने से जारी यूक्रेन के साथ इस जंग में रूस के लिए ये बड़ा झटका है. पर ऐसा क्या हुआ कि पुतिन को अपनी सेना को वापस बुलाना पड़ा है. क्या ये पुतिन की रणनीति है या फिर मजबूरी?

5 कारणः क्यों पीछे हट रही रूसी सेना?

1. कमजोर पड़ी रूसी सेना!

रूस-यूक्रेन जंग में खेरसान अहम इलाकों में है. यहां शुरू से ही रूस की सेना हावी रही. लेकिन इस इलाके को आजाद मुल्क घोषित करने के बाद अपने इलाके को वापस लाने के लिए यूक्रेनी सेना ने जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की.

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बुधवार को खेरसान में रूस समर्थित किरील स्त्रेमोसोव की मौत हो गई. रूस का कहना है कि स्त्रेमोसोव कार दुर्घटना में मारे गए हैं. उनकी मौत को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आ पाई है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने कहा कि कोई भी कहीं से भी तब तक नहीं हटता जब तक उसे दुश्मन की ताकत का सामना न करना पड़े. जेलेंस्की ने कहा कि ये रूस का गिफ्ट नहीं है, हमने लड़कर खेरसान को फिर से जीता है.

2. लगातार मारे जा रहे हैं रूसी सैनिक!

यूक्रेन के साथ जंग में रूस को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है. यूक्रेन जंग के कमांडर जनरल सर्गेई सुरोविकिन (General Sergei Surovikin) ने रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु को बताया है कि अब खेरसान में सप्लाई कर पाना संभव नहीं है. इसलिए वहां से सैनिकों को हटा लेना चाहिए.

इस बीच अमेरिकी सेना के जनरल मार्क मिली ने अनुमान लगाया है कि इस जंग में अब तक रूस के एक लाख से ज्यादा सैनिक या तो मारे गए हैं या फिर बुरी तरह घायल हो चुके हैं. उनका ये भी कहना है कि इस जंग में यूक्रेन के भी 40 हजार से ज्यादा आम नागरिकों के मारे जाने का अनुमान है.

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कीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल सुरोविकिन ने कहा कि खेरसान से सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला 'कठिन' था. उन्होंने कहा कि ये फैसला स्थिति का आकलन करने के बाद लिया गया है.

3. सेना में विद्रोह!

यूक्रेन के साथ जंग शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद खबरें आई थीं कि रूसी सैनिक इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते हैं. इसके बाद सितंबर में पुतिन ने तीन लाख सैनिकों की लामबंदी का आदेश दिया था. हालांकि, पुतिन के इस ऐलान के बाद हजारों की संख्या में युवा रूस छोड़कर जाने लगे थे.

9 महीने से जारी जंग ने अब सैनिकों का मनोबल भी तोड़ दिया है और अब वहां भी विद्रोह होने की खबर है. 

दो दिन पहले ही डोनेत्स्क में मोर्चा संभाल रही रूसी नौसेना के सैनिकों ने एक खुला पत्र लिखा था. इस पत्र में सैनिकों ने लिखा था कि हमारे हथियार खत्म होते जा रहे हैं, लेकिन रूसी अधिकारी इस बात को छिपा रहे हैं.

गवर्नर प्रिमोर्स्की क्राई को लिखे खत में सैनिकों ने लिखा था कि एक बार फिर हमें लड़ाई में उतार दिया गया है, ताकि जनरल मुरादोव खुद को गेरोसिमोव (रूस के जनरल स्टाफ के प्रमुख) की नजरों में खुद को अच्छा दिखा सकें.

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4. दुनियाभर में आलोचना!

यूक्रेन से जंग छेड़ने के लिए दुनियाभर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आलोचना हो रही है. अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने पुतिन के इस फैसले की निंदा की थी. अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों ने रूस और पुतिन पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं.

माना जा रहा है कि जंग से अपने कदम पीछे खींचकर रूस अब खुद को अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहा है. सेना वापस बुलाने के फैसले को जनरल सुरोविकिन ने 'कठिन फैसला' बताया है. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेचन लीडर रमजान कदिरोव का कहना है कि जनरल सुरोविकिन ने एक वास्तविक सैन्य नेता की तरह काम किया है और वो किसी भी आलोचना से डरते नहीं है. कदिरोव को पुतिन का करीबी माना जाता है. 

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी कह चुके हैं कि रूस इसे गिफ्ट या एहसान के तौर पर दिखा रहा है, लेकिन ये हमने लड़ाई करके जीता है.

इस जंग को लेकर आलोचना का सामना कर रहे रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने जी-20 समिट में भी न जाने का फैसला लिया है. ये समिट 15 नवंबर से इंडोनेशिया के बाली में होने जा रही है. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन समेत दुनियाभर के नेता आएंगे. बताया जा रहा है कि इन नेताओं का सामना करने से बचने के लिए पुतिन ने इस समिट में न जाने का फैसला लिया है.

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5. पर, कहीं ये पुतिन की नई रणनीति तो नहीं?

अक्टूबर में पुतिन ने जनरल सुरोविकिन को यूक्रेन जंग की कमान सौंपी थी. जनरल सुरोविकिन को 'मिस्टर तबाही' भी कहा जाता है. अफगानिस्तान से लेकर सीरिया की जंग तक में जनरल सुरोविकिन की क्रूरता दुनिया ने देखी है. लेकिन यूक्रेन के साथ जंग में सेना वापस बुलाने के फैसले ने हैरान कर दिया है.

हालांकि, इसे पुतिन की नई रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. जनरल सुरोविकिन का कहना है कि हमें अपने सैनिकों को बचाने की जरूरत है और उन्हें वहां से हटाकर दूसरे मोर्चों पर लगाया जा सकता है. इस पर सर्गेई शोइगु ने भी सहमति जताई और कहा कि सैनिकों को दूसरी ओर ले जाने के उपायों पर काम करें.

सेना वापसी की रूस के ऐलान पर यूक्रेनी राष्ट्रपति के सलाहकार मिखाइलो पोडोलियाक ने ट्विटर पर लिखा कि शब्दों से ज्यादा काम बोलता है. उन्होंने लिखा कि हमें अभी तक इस बात के कोई संकेत नहीं मिले हैं कि रूस बिना किसी लड़ाई के खेरसान छोड़ रहा है.

खेरसान कितना अहम?

खेरसान नीपर नदी और ब्लैक सी से जुड़ा हुआ है. ये इलाका जहाजों के निर्माण में आगे है. यहां पर लगभग 3 लाख लोग रहते हैं.

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मशीन इंजीनियरिंग से लेकर केमिकल प्रोडक्शन और छोटे उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं. खेरसान में मोर्स्की बंदरगाह है, जहां से सालाना करोड़ों डॉलर का कारोबार होता है.

शिक्षा के लिहाज से भी खेरसान काफी अहम इलाका है. यहां हायर एजुकेशन मुहैया करने वाले दर्जनों संस्थान हैं. यहीं पर खेरसान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ बिजनेस एंड लॉ भी हैं.

 

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