
आज से ठीक 453 दिन पहले आठ जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को एक रिपोर्ट सौंपी. यही वो रिपोर्ट थी जिसने दिल्ली के शराब घोटाले को खोलकर रख दिया.
इस रिपोर्ट में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे. इस रिपोर्ट के आधार पर एलजी सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की. 2022 की 17 अगस्त को सीबीआई ने केस दर्ज किया. इसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर और दो कंपनियों को आरोपी बनाया.
इस घोटाले में चूंकि पैसों की हेराफेरी भी हुई, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इसमें शामिल हो गई. सीबीआई के बाद ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया.
शराब घोटाले में इस साल 26 फरवरी को सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया. सिसोदिया के बाद 4 अक्टूबर को ईडी ने संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया. मनीष सिसोदिया और संजय सिंह, दोनों ही आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में से हैं. और दोनों ही अब जेल में हैं.
पर ऐसा क्या था उस रिपोर्ट में?
- मुख्य सचिव ने इस रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया पर गलत तरीके से शराब नीति तैयार करने का आरोप लगाया. लाइसेंसधारी शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया. और तो और कथित तौर पर एलजी और कैबिनेट की मंजूरी लिए बगैर ही शराब नीति में अहम बदलाव भी कर दिए.
- मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि कोविड का बहाना बनाकर मनमाने तरीके से 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी.
- आरोप लगा कि एयरपोर्ट जोन में लाइसेंसधारियों को 30 करोड़ वापस कर दिए गए, जबकि ये रकम जब्त की जानी थी, क्योंकि एयरपोर्ट अथॉरिटी ने दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी थी.
- इतना ही नहीं, एक्साइज डिपार्टमेंट ने बिना किसी मंजूरी के विदेशी शराब की कीमतें तय करने का फॉर्मूला संशोधित किया और बीयर पर 50 रुपये प्रति केस की एक्साइज ड्यूटी लेवी हटा दी.
- आरोप यहीं खत्म नहीं हुए. सिसोदिया पर ये भी आरोप लगा कि उन्होंने बिना किसी मंजूरी के एक्साइज पॉलिसी को दो बार- 1 अप्रैल से 31 मई और 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया.
कैसे फंसे सिसोदिया?
- सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) शामिल हैं.
- इसमें अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे को भी आरोपी बनाया गया है. इन तीनों को सिसोदिया का करीबी माना जाता है. आरोप है कि तीनों ने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब कारोबारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया. बाद में दिनेश अरोड़ा सरकारी गवाह बन गया.
- चूंकि, मनीष सिसोदिया के पास एक्साइज डिपार्टमेंट था, इसलिए उन्हें दिल्ली के इस कथित शराब घोटाले में मुख्य आरोपी बनाया गया. सीबीआई ने आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री होने के नाते सिसोदिया ने 'मनमाने' और 'एकतरफा' फैसले लिए, जिससे खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और शराब कारोबारियों को फायदा हुआ.
- 17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने केस दर्ज किया और दो दिन बाद ही 19 तारीख को मनीष सिसोदिया के घर और दफ्तर समेत सात राज्यों के 31 ठिकानों पर छापेमारी की. 30 तारीख को सीबीआई ने सिसोदिया के बैंक लॉकर भी खंगाले. सिसोदिया ने दावा किया कि सीबीआई को कुछ नहीं मिला.
- सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, मनीष सिसोदिया के कथित करीबी अर्जुन पांडे ने शराब कारोबारी समीर महेंद्रू से 2 से 4 करोड़ रुपये लिए थे. ये रकम विजय नायर की ओर से ली गई थी. विजय नायर कुछ साल तक आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन इंचार्ज भी रहे हैं.
- इस साल 14 जनवरी को सीबीआई ने दिल्ली सचिवालय में सिसोदिया के दफ्तर में तलाशी ली. 26 फरवरी को सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद 9 मार्च को ईडी ने भी सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया.
संजय सिंह कैसे फंसे?
- मनीष सिसोदिया के बाद संजय सिंह आम आदमी पार्टी के दूसरे बड़े नेता हैं, जिन्हें शराब घोटाले में गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी से पहले ईडी ने संजय सिंह से 10 घंटे पूछताछ की थी.
- संजय सिंह की गिरफ्तारी के पीछे दिनेश अरोड़ा की गवाही है. ईडी ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि दिनेश अरोड़ा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की थी. इस मीटिंग में संजय सिंह भी मौजूद थे.
- ईडी को दिए बयान में दिनेश अरोड़ा ने बताया कि वो एक प्रोग्राम में संजय सिंह से मिला था और इसके बाद मनीष सिसोदिया से उसकी मुलाकात हुई थी. सूत्रों के मुताबिक, ये प्रोग्राम दिल्ली चुनाव से पहले फंड जुटाने के लिए किया गया था.
- चार्जशीट के मुताबिक, 'दिनेश अरोड़ा सबसे पहले संजय सिंह से मिला था. मनीष सिसोदिया से उसकी मुलाकात अपने रेस्टोरेंट में हुई एक पार्टी में हुई थी. संजय सिंह के कहने पर अरोड़ा ने कई रेस्टोरेंट मालिकों से बात की. अरोड़ा ने दिल्ली चुनाव के लिए पार्टी फंड जुटाया और 32 लाख रुपये का चेक सिसोदिया को सौंपा.
- ईडी ने आरोप लगाया है कि इसके बदले संजय सिंह ने दिनेश अरोड़ा का एक मामला सुलझाया जो एक्साइज डिपार्टमेंट के पास पेंडिंग था.
- चार्जशीट के मुताबिक, 'दिनेश अरोड़ा ने बताया कि सार्थक फ्लेक्स के रिटेल लाइसेंस होल्ड अमित अरोड़ा ने उन्हें और कंवरबीर को सार्थक फ्लेक्स के ज्वॉइंट वेंचर में पार्टनर बनने को कहा था. अमित ने उनसे अपनी दुकान को पीतमपुरा से ओखला शिफ्ट करने में मदद मांगी. लेकिन ये मामला एक्साइज डिपार्टमेंट के पास पेंडिंग था. दिनेश अरोड़ा ने इस मसले को सिसोदिया के सामने उठाया और फिर संजय सिंह के निर्देश पर एक्साइज डिपार्टमेंट ने मामले को निपटा दिया.'
क्या थी नई शराब नीति?
- 22 मार्च 2021 को मनीष सिसोदिया ने नई शराब नीति का ऐलान किया था. 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू कर दी गई.
- नई शराब नीति आने के बाद सरकार शराब के कारोबार से बाहर आ गई. और पूरी शराब की दुकानें निजी हाथों में चली गई.
- नई नीति लाने के पीछे सरकार का तर्क था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी.
- हालांकि, नई नीति शुरू से ही विवादों में रही. जब बवाल ज्यादा बढ़ गया, तब 28 जुलाई 2022 को सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर फिर पुरानी पॉलिसी लागू कर दी.